<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862</id><updated>2012-02-16T19:14:29.635-08:00</updated><title type='text'>KOBRA</title><subtitle type='html'>ब्लाग पर प्रकाशित किसी रचना के लिए उसका लेखक स्वयं जिम्मेदार होगा,विचार शुरुआत...</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/'/><link rel='hub' 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type='html'>(सिरसा) हरियाणा प्रदेश के अधिकतर गैर जाट मतदाताओं का कांग्र्रेस से मोह भंग हो रहा है और धीरे धीरे किसी ऐसे प्लेटफार्म की तरफ मुडऩे की फिराक में है, जहां उन्हें मान-सﾐमान और अधिकतर मिल सके । ऐसी स्थिति में गैर जाटों को लंबे समय तक नेतृत्व देने वाले पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के बाद उनके साहिबजादे व हजकां सुप्रीमों कुञ्लदीप बिश्र्रोई की तरफ गैर जाटों की निगाहे है, जिनसे गैर जाटों के लांभावित होने की संभावना व्यक्तञ् की जा रही है, परंतु कुञ्लदीप बिश्नोई गैर जाटों पर खरा उतरते नजर नहीं आते। गैर जाटों के लिए प्रदेश में बसपा उार प्रदेश के विधानसभाई चुनावी परिणाम उपरांत जरू सक्रिञ्य हुई थी और ﾀयास लगाया जाने लगा था कि हरियाणा की राजनीतिक तस्वीर में बदलाव आएगा, परंतु बसपा कोई करिश्मा न दिखा सकी। बसपा की सक्रिञ्यता ने कांग्रेस की चिंताए तो बढ़ा दी थी, मगर विधानसभा में एकमात्र बसपा विधायक का कांग्रेस को समर्थन देने से बसपा के राजनीतिक भविष्य पर प्रश्र्रचिन्ह लग गया। प्रदेश में साारूञ्ढ़ कांग्रेस, जो निर्दलीय तथा हजकांई से कांग्रेसी बने विधायकों से चल रही है, से गैर जाटों की दूरी अपनी अनदेखी के चलते है। मुख्यमंत्री भुपेंद्र सिंह हुड्डा अपनों से ही जुझ रहे है, जबकि इनेलो, ﾏााजपा के पास ऐसा कोई कद्दावर नेता नहीं, जो गैर जाटों को नेतृत्व दे सके । हजकां सुप्रीमों कुञ्लदीप बिश्र्रोई जरू स्व.भजनलाल के नाम से लाभांवित हो सकते है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि हरियाणा में गैर जाटों का कांग्रेस से मोहभंग हो रहा है, इसके लिए चिंतित कांग्रेस भी है, मगर उसके पास गैर जाटों को संगठित करने के लिए नेता नहीं है। सांसद वीरेंद्र सिंह अवश्य वैश्य समाज को एकत्रित करने का प्रयास कर रहे है, मगर इसमें उनका मुख्यमंत्री से छाीस का आंकड़ा बाधक बना हुआ है। राज्य में दलित समाज भी कांग्रेस के दूर होता जा रहा है, ﾀयोंकि कांग्रेस इस समुदाय को नेतृत्व प्रदान करवा सकती है। कांग्रेस ने सांसद व केंञ्द्रीय मंत्री सुश्री शैलजा को लेकर दलित समाज को कांग्रेसी ध्वज के नीचे एकत्रित करने का प्रयास किया था, मगर मुख्यमंत्री से शैलजा का छाीस का आंकड़ा आड़े आ गया। सांसद अशोक तंवर के भी मुख्यमंत्री से मधुर संबंध नहीं है, जिस कारण मुख्यमंत्री उन्हें भी दलित समाज का नेतृत्च देना उचित नहीं समझते नहीं है, इसलिए दलित समाज तथा गैर जाट मुख्यमंत्री के छाीस के आंकड़े की बदौलत अपना रूञ्झान करने लगे है। सूत्र यह भी बताते है कि जाट वर्ग का एक प्रभावी ग्रुप मुख्यमंत्री हुड्डा पर दवाब बना रहा है कि गैर जाटों तथा दलितों को कांग्रेसी नेतृत्व न उपलﾎध करवाया जाये, यदि जरू ी हो तो अपने ही विश्र्वासपात्रों को गैरजाट तथा दलित समाज पर थोपा जाए। प्रदेश में पंजाबी समुदाय की भी यही स्थिति है कि उनका कांग्रेसी रूञ्झान होते हुए भी कांग्रेसी नेतृत्व न देकर उनके रूञ्झान को परिवर्तित कर रही हे। भाजपा, जिनसे कभी गैर जाटों के धनिष्ठ संबंध थे, अब उन संबंधों में बदलाव आया है, ﾀयोंकि भाजपा के पास भी ऐसा कोई कद्दावर नेता नहीं, जो प्रदेश के गैरजाट, दलित समाज या फिर पंजाबी समुदाय को नेतृत्व दे सके । हरियाणा की वर्तमान राजनीतिक तस्वीर से पता चलता है कि राज्य का गैर जाट, दलित व पंजाबी समाज कांग्रेसी नेतृत्व न मिलने के कारण से दूर होता जा रहा है, हालांकि उनके लिए किसी भी राजनीतिक दल में उज्जवल भविष्य नहीं है, मगर कांग्रेसी सोच उपरांत भी कांग्रेस से दूरी बनाना कांग्रेस के लिए शुभ संके त नहीं कहा जा सकता।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-3089632804830732530?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/3089632804830732530/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2011/07/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/3089632804830732530'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/3089632804830732530'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2011/07/blog-post.html' title='हरियाणा-गैर जाट खिसक रहे है-कांग्रेस खेमे से'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-4975929861243481309</id><published>2010-09-21T15:08:00.000-07:00</published><updated>2010-09-21T03:27:18.965-07:00</updated><title type='text'>मंत्री महोदयों ये क्या हो रहा है</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/TJiHVoGp3bI/AAAAAAAAAX0/SnZK4tQYd1s/s1600/T_4_718505498.jpg"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 200px; FLOAT: right; HEIGHT: 152px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5519310148954873266" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/TJiHVoGp3bI/AAAAAAAAAX0/SnZK4tQYd1s/s200/T_4_718505498.jpg" /&gt;&lt;/a&gt; &lt;span style="font-family:arial;"&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;ये&lt;/span&gt; हैं स्वर्णिम मध्यप्रदेश के कर्णधार। - कानून-कायदों से परे, आरोपों से घिरे। - आधा दर्जन से ज्यादा मंत्रियों के कामकाज पर सवाल स्वर्णिम मध्यप्रदेश बनाने का संकल्प लेने वाली प्रदेश की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरकार के आधा दर्जन से ज्यादा मंत्रियों के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं। खुद को मध्यप्रदेश की साढ़े छह करोड़ जनता का हमदर्द बताने वाले इन मंत्रियों ने दोनों हाथों से लूट-सी मचा रखी है। कोई राज्य की योजनाओं को चूस रहा है तो किसी ने केंद्रीय योजनाओं पर बट्टा लगाने की ठान ली है। ऐसे मंत्रियों के भरोसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनता को स्वर्णिम मध्यप्रदेश का सपना दिखाया है। सरकार की प्राथमिकताएं और संकल्प चाहे जो हों, लेकिन विभागों में इन्हीं का एजेंडा का काम कर रहा है। किसी ने विभाग में अपने ठेकेदार छोड़ रखे हैं, तो किसी ने तबादलों को ही अपना व्यापार बना रखा है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;strong&gt;पारस जैन जी&lt;/strong&gt;,खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री:-&lt;/strong&gt; शकर एवं दाल खरीदी के मामले के बाद अब फोर्टिफाइड आटे को लेकर गंभीर आरोपों से घिरे। करोड़ों की आटा खरीदी का काम अपने नजदीकी ठेकेदार और मिल कंपनियों को देने की जुगत में। रिश्वत देने के बावजूद काम नहीं होने पर एक फूड इंस्पेक्टर ने आत्महत्या की। इंस्पेक्टर के परिजनों ने मंत्री पर अरोप लगाए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;strong&gt;रंजना बघेल जी&lt;/strong&gt;,महिला एवं बाल विकास विभाग में मंत्री :-&lt;/strong&gt; कुपोषण के कलंक से परेशान सरकार ने पूरा भरोसा जताया , लेकिन धांधली के एक नहीं दर्जनों आरोप उन पर हैं। विभाग को पीए और पति चला रहे हैं। अधिकारियों की पोस्टिंग विभाग का सबसे अहम काम बना हुआ है। पोषण आहार सप्लाई के ठेके में भारी भ्रष्टाचार। अपने गृह जिले धार के ठेकेदारों को ही सर्वाधिक ठेके देने के आरोप उन पर हैं। कुपोषण के निपटने के तमाम प्रयास विफल हुए। अब अटल बाल आरोग्य मिशन में कुपोषण से निपटने के तरीकों से बजट खर्च करने की योजना पर ध्यान है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;strong&gt;रामकृष्ण कुसमारिया जी&lt;/strong&gt;,कृषि मंत्री :-&lt;/strong&gt; बाबाजी के नाम से जाने वाले अपने पीए के कारण बदनामी और तमाम आरोप झेल रहे हैं। उन पर पीए के माध्यम से वसूली के आरोप हैं। पशुपालन मंत्री रहते हुए मछली ठेके गलत तरीके से दिए, जिस पर विवाद हुआ। इसी वजह से उनसे विभाग छिना। पिछले दो साल से जैविक नीति का राग अलाप रहे हैं, लेकिन आज तक नीति का अता-पता नहीं। मंत्री से पहले जब सांसद थे, तब मिस्टर टेन परसेंट कहलाते थे। मंत्री के रूप में भी यही पहचान। अधिकारियों में नूरा-कुश्ती कराने में माहिर।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;strong&gt;सरताज सिंह जी&lt;/strong&gt;,वन मंत्री :-&lt;/strong&gt; वन विभाग के दागी अफसरों को बचाने में हमेशा आगे रहे। कई अफसरों के दोषी करार होने के बाद भी कार्रवाई नहीं की। वन माफिया को संरक्षण देने के आरोप। बैतूल के जंगजों में मिले बंगर मामले में विभाग की लचीली कार्रवाई।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;strong&gt;अर्चना चिटनीस जी&lt;/strong&gt;,स्कूल शिक्षा मंत्री :-&lt;/strong&gt; स्कूल चलें हम और माध्यमिक शिक्षा अभियान को पलीता लगाया। स्कूल यूनिफार्म मामले में घोटाले के आरोप। सभी ठेकेदारों को अपने गृह नगर बुरहानपुर स्थित लैब से कपड़े का परीक्षण कराने के नाम पर वसूली। इस मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को हस्तक्षेप करना पड़ा। स्कूलों में सेवाभारती की पुस्तक देवपुत्र की सदस्यता के मुद्दे पर सरकार की थू-थू कराई। माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत स्कूलों में बिना टेंडर के ग्रीन बोर्ड लगावाए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;strong&gt;राजेंद्र शुक्ल जी&lt;/strong&gt;, ऊर्जा एवं खनिज मंत्री :-&lt;/strong&gt; खनिज माफिया को संरक्षण दिया। अपने गृह जिले रीवा के पड़ोसी जिले सतना में समर्थकों को खनिज लूट की खुली छूट दी। कटनी और अन्य स्थानों पर खनिज चोरी पर आंखें बंद किए हुए हैं। ऊर्जा विभाग से एमओयू कराकर उन्हें लाभ पहुंचाने के आरोप।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;strong&gt;अजय विश्नोई जी&lt;/strong&gt;,पशुपालन,मछलीपालन मंत्री :-&lt;/strong&gt; गैर परंपरागत ऊर्जा स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए दवा खरीदी घोटाले के आरोपी। लोकायुक्त में मामला दर्ज। स्वास्थ्य विभाग में महाघोटाले के आरोपी तत्कालीन स्वास्थ्य आयुक्त राजेश राजौरा और लघु उद्योग निगम के बीएम सिंह सहित अभय विश्नोई के खिलाफ आयकर की रिपोर्ट। विश्नोई को छोड़ दोनों अधिकारियों पर कार्रवाई हुई। इन कारगुजारियों से मंत्री पद तो गया, लेकिन जुगाड़ लगाकर फिर से मंत्री बने। पशुपालन, मछलीपालन के साथ मलाईदार अपरंपरागत ऊर्जा विभाग भी मिला।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;इसका मतलबय है :-&lt;/strong&gt; अगर मुख्यमंत्री महदोय ध्यान ना दे तो चलने दो अपना धन्धा पानी यही अपना रोजी रोटी चलेने दो। यह है मंत्रीयो का रवईया। इसका मतलब होने दो धान्धली कोई देखने वाला नही है चलेन दो धान्धली ।&lt;br /&gt;अब इन मंत्रियों पर नजर है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-4975929861243481309?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/4975929861243481309/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2010/09/blog-post_21.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/4975929861243481309'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/4975929861243481309'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2010/09/blog-post_21.html' title='मंत्री महोदयों ये क्या हो रहा है'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/TJiHVoGp3bI/AAAAAAAAAX0/SnZK4tQYd1s/s72-c/T_4_718505498.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-1438019802165349325</id><published>2010-09-19T18:53:00.000-07:00</published><updated>2010-09-19T06:23:57.411-07:00</updated><title type='text'>भुक्खड़ पत्रकार और शिवराज का लंगर</title><content type='html'>मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सरकारी खर्चे से भोजन कराने का बहुत शौक है.यही कारण है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आवास का सत्कार व्यय सालाना एक से दो करोड़ के आस-पास बैठता है. वैसे यहां हम सीएम शिवराज सिंह चौहान की फिज़ूलखर्ची की चर्चा नहीं कर रहे हैं. चर्चा तो उनके लंगर के आयोजन की है.हुआ यूं कि 2 सितम्बर श्री कृष्ण जन्माष्टमी को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्रकारों को रात्रिभोज पर बुलवाया. सीएम का पीआर संभालने वाले अधिकारी सभी को फोन करते हैं, इस क्षेपक के साथ..."सपरिवार आइयेगा.बहुत सेलेक्टेड लोगों को बुलाया गया है. लोकल मीडिया तक को नहीं बुलाया गया. ज़रूर आइये."&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मैं बता दूं, इस क्षेपक की ज़रूरत क्यों पड़ी. दरअसल जब भी सीएम के यहां से सपरिवार आने का न्योता होता है, कुछ लोगों को छोड़कर कोई परिवार लेकर नहीं जाता, क्योंकि वहां लंगर जैसा माहौल रहता है. कल इत्मीनान कराया गया तो कुछ लोगों ने हौसला कर लिया.सुबह से ही पत्नियों को ताकीद कर दी गई कि शाम को सीएम साहब के घर भोजन पर चलना है. शाम को कई बड़े अखबारों के मालिकान और संपादकनुमा / वरिष्ठ पत्रकार अपनी-अपनी पत्नियों के साथ पहुंच गए. उम्मीद थी कि माननीय शिवराज जी सपरिवार उनकी अगवानी करेंगे लेकिन देख कर भौचक रह गए वहां हमेशा की तरह कार्यकर्ता सम्मलेन जैसा माहौल है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हज़ारों की तादात में छोटे, बड़े, मंझोले, लम्बे, नाटे, काले, पीले, गोरे लोग पहले से कुर्सियों पर काबिज़ हैं. बैठने को जगह नहीं. गेट पर अगवानी कर रहे थे भाजपा भोपाल के पूर्व और वर्तमान अध्यक्ष. अखबार मालिक तो कई सारे संभावित लाभ-शुभ के चलते कुछ कह नहीं सकते थे, लिहाजा जहां जगह मिली, कुर्सियों पर सपरिवार धंस गए. जो बच गए वे सीएम हाउस में लगे पेड़ों पर पुश्त टिकाकर खड़े हो गए. वहां एक मंच भी बना था जिसमे रविन्द्र जैन जी रामानंद सागर की रामायण मार्का स्वर लहरियां बिखेर रहे थे.पास ही जो भोजन के पंडाल थे वहां ऐसा माहौल मचा था,जैसा किसी भी&lt;br /&gt;रेलवे स्टेशन पर शताब्दी/राजधानी एक्सप्रेस की सफाई के वक्त बचे हुए खाने पर स्टेशन के आस-पास रहने वाले अनाथ लोग टूटते हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जो पहली बार बीबीयों के साथ सीएम के घर अपना रौब गांठने गए थे उनके अरमान ठंडे पड़ गए.जिनके साथ थोड़ा बहुत बोलना सीख चुके बच्चे थे,वे पापा को कोहनी मारते कहने लगे,"पापा चलो कहीं और खाना खायेंगे पर यहाँ नहीं खायेंगे." खुद को तोप मानने वाली पत्रकारीय कौम भौचक थी कि क्या करें.अखबारों के मालिकों की मौजूदगी में गुस्सा भी कैसे झल्काएं. कहीं ये भी अखबार की "पॉलिसी " के खिलाफ बात न हो जाए. क्योंकि आजकल तमाम पत्रकार खबर लिखने से पहले अखबार की "पॉलिसी" पर ज़रूर विचार करते हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बहरहाल लोग कुढ़ते रह गए और मज़बूरी में भूखे पेट वहां से पलायन करना पडा.पत्नियों की तो चांदी हो गई क्योंकि ज्यादातर पतियों ने उन्हें मज़बूरी में होटल में ले जाकर डिनर दिया. इसमें वैसे देखा जाए तो सबसे बड़ा दोष जनसंपर्क आयुक्त का है, जो कार्यक्रम को ठीक तरह से मैनेज नहीं कर पाए.मुख्य मंत्री के घर पर लंगर ही होता है ये सभी जानते हैं,तो उन्हें ये क्षेपक वाला फोन पत्रकारों को नहीं करना था. यदि किया था तो उन्हें शिवराज से चिरोरी करना था कि "सर सिर्फ पत्रकारों को ही आज बुला लीजिये, बाकियों को कल या और किसी दिन बुला लेते हैं." लेकिन नए जन संपर्क आयुक्त शिवराज सिंह चौहान की उस "यस सर वाली आईएएस ब्रिगेड" से आते हैं, जिनके लिए कोई तर्क देना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है. लिहाजा वे मौन रहे. न केवल मौन रहे बल्कि खुद चुपचाप एक कुर्सी में बैठे रहे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हद तो तब हो गई जब मुख्यमंत्री महज 15 मिनट के लिए आये और चले गए.बताया गया कि उन्हें दो दिन से बुखार है. सवाल ये उठता है की जब सीएम को बुखार था तो उन्होंने पत्रकारों को भोज पर बुलाया ही क्यों? किसने कनपटी में रिवाल्वर रख कर धमकाया था कि हमें डिनर पर बुलाओ? अखबार मालिकों को भी बुलाकार क्या सीएम अपने व्यवहार से अपने ओहदे का भान करना चाहते थे? खैर जो भी हो, इतना ज़रूर हुआ है कि इसे मुख्यमंत्री की यदि पीआर कवायद समझा जाए तो इसमें पीआर बढ़ा नहीं कमज़ोर हुआ है, क्योंकि जो भी पत्रकार उस दिन वहां गया, वो गाली देते हुए ही वहां से लौटा है. ये वही जन संपर्क आयुक्त हैं जो सीएम के पैतृक गाँव में दलितों के साथ भेदभाव वाली खबर को हैंडल नहीं कर पाए थे और इस खबर ने शिवराज की बहुत भद पिटवा दी थी.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-1438019802165349325?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/1438019802165349325/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2010/09/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/1438019802165349325'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/1438019802165349325'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2010/09/blog-post.html' title='भुक्खड़ पत्रकार और शिवराज का लंगर'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-5109691018491038497</id><published>2010-05-07T19:05:00.000-07:00</published><updated>2010-05-07T07:14:56.266-07:00</updated><title type='text'>यदि कोई बाधा न आई तो प्रभात का अध्यक्ष बनना तय</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;मध्यप्रदेश में प्रभात झा का अध्यक्ष बनना लगभग तय है यदि कोई बाधा न आई तो। पार्टी की स्थापना से लेकर अब तक दो अवसर ही ऐसे आए हैं जब भारतीय जनता पार्टी में चुनाव की स्थिति बनी है। हालांकि राज्यसभा सदस्य प्रभात झा को नकराने भारतीय जनता पार्टी में पूर्व केंद्रीय मंत्रियों में फग्गनसिंह कुलस्ते, डा. सत्यनारायण जटिया चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में है, वहीं सांसद भूपेंद्र सिंह के भी चुनाव मैदान में उतरने की चर्चा है। &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;em&gt;भाजपा में इस बार निर्विरोध चुनाव की स्थिति बनती नजर आ रही हैं। पिछले एक माह से प्रदेश अध्यक्ष को लेकर दावेदारों की लंबी सूची थी, जो कि सिमट कर अब तीन - चार की संख्या में ही रह गई हैं। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गड़करी की मंशा के अनुरूप तो मध्यप्रदेश अध्यक्ष उनकी पसंद से नियुक्त होना था, लेकिन जिस तरह गुटबाजी उभरी और दावेदारों की संख्या बढ़ने लगी तो नितिन गड़करी ने भी अपना इरादा बदल दिया और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुरूप चुनाव कराने पर अपनी सहमति जता दी। इसके बावजूद बावजूद पार्टी के बड़े नेता इस मिशन में भी लगे रहे कि प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर सभी एक मत हो जाए। लेकिन राष्ट्रीय स्वयं सवक संघ के सह&lt;br /&gt;कार्यवाह सुरेश सोनी की पसंद राज्यसभा सदस्य प्रभात झा, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खेमे के नेताओं को पसंद नहीं आए। इसी वजह से पार्टी में एक गुट प्रभात झा को छोड़ किसी अन्य पर एकमत होने की रणनीति बनाता रहा। इस संदर्भ में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुमित्रा महाजन के दिल्ली स्थित&lt;br /&gt;सरकारी बंगले पर पूर्व और वर्तमान गठन से अब तक दो बार हुए हैं चुनाव सांसदों की एक बैठक भी हुई। इस बैठक में सर्व सम्मत एक नाम तय हो भी गया, उधर दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष नितिन गड़करी और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल से पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते और सत्यनारायण जटिया&lt;br /&gt;ने अपनी दावेदारी को लेकर मुलाकात की, वहीं सांसद भूपेंद्र सिंह ने भी इन दोनों नेताओं से बातचीत की। सूत्र बताते हैं कि पार्टी नेताओं ने दावेदारों को संकेत दिए हैं, लेकिन आज दोपहर दिल्ली में प्रभात झा के नाम पर सहमती बन गई। उनके निवास पर बधाई देनेवालों का तांता भी लगने लगा है। पार्टी के बड़े नेताओं के संकेत मिलने के बाद चर्चा यही है कि प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चुनाव कशमकश भरे माहौल में होंगे। उल्लेखनीय है कि भाजपा की स्थापना के बाद से अब तक दो बार ही प्रदेश&lt;br /&gt;अध्यक्ष को लेकर चुनाव हुए है जबकि अन्य अवसर नियुक्ति के ही रहे। वर्ष १९९० में हुए प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में लखीराम अग्रवाल के खिलाफ कैलाश जोशी चुनाव मैदान में थे जबिक वर्ष २००० में हुए चुनाव में विक्रम वर्मा के खिलाफ शिवराज सिंह चौहान चुनाव लड़े थे। उस समय जोशी और चौहान को पराजय का सामना करना पड़ा था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शिवराज सिंह चौहान को क्यों नहीं पसंद प्रभात&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;शिवराज सिंह चौहान को प्रभात झा पसंद नहीं है। इसीलिए तो उन्होंने पार्टी नेतृत्व के सामने न केवल अपना विरोध जताया था बल्कि अपने इस्तीफे तक की बात कह डाली थी। सुत्र यही बताते है कि अब शिवराज के इस विरोध पर गौर करें तो वे कदापि नहीं चाहते कि प्रदेश में कोई कदावर नेता आए और संगठन मुखिया की हैसियत से उन्हें निर्देश दे। उल्लेखनीय है कि शिवराज सिंह ने पिछले दिनों शिवसेना सुप्रीर्मो बाल ठाकरे की तर्ज पर एक कार्यक्रम में कथिक तौर पर कहा था कि प्रदेश में बिहारियों का क्या काम ? उन्हें उघोगों में रोजगार देने के बजाए स्थानीय लोगों को महत्व दे। जिसको लेकर खासा बवाल मचाया। शिवराज द्वारा उस समय कही गई बातें आज प्रभात झा के मामले में फीट लग रही है। सूत्रों के अनुसार शिवराज सिंह प्रभात झा के विरोध के फलस्वरूप ही अपनी पसंद भूपेंद्र सिंह अथवा फग्गन सिंह पर केन्द्रित कर दी है। अब यह तो कल ही पता चलेगा कि प्रभात झा के खिलाफ कौन, सामने होगा। मगर वृदांवन गए प्रदेश प्रतिनिधियों को लेकर चर्चा यही कही कि इन्हीं के दम पर चुनावी माहौल तय किया जाएगा। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में प्रदेश के ७० प्रदेश प्रतिनिधियों की भुमिका अहम होगी। सूत्रों के अनुसार शिवराज के इनर सर्किले ने राज्यसभा सदस्य प्रभात झा को सर्वम्मत अध्यक्ष बनने से रोकने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं तथा अपना ध्यान प्रदेश प्रतिनिधियो को हायर किया है। प्रतिनिधिइन दिनों वृंदावन में भागवत कथा का आनंद ले रहे हैं। बताते हैं कि ये प्रतिनिधि देर रात तक भोपाल आ जाएंग। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-5109691018491038497?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/5109691018491038497/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2010/05/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/5109691018491038497'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/5109691018491038497'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2010/05/blog-post.html' title='यदि कोई बाधा न आई तो प्रभात का अध्यक्ष बनना तय'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-186354871991074159</id><published>2010-04-24T13:35:00.000-07:00</published><updated>2010-04-24T01:05:32.414-07:00</updated><title type='text'>इलाज के अभाव में मौत शिव सरकार की सहायता घोषणा फर्जी निकली</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/S9KlY2IKtqI/AAAAAAAAAXk/zWRtLWRiZhU/s1600/1.jpg"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 169px; FLOAT: right; HEIGHT: 223px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5463611144219047586" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/S9KlY2IKtqI/AAAAAAAAAXk/zWRtLWRiZhU/s200/1.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-family:georgia;"&gt;थोथी घोषणाएं कर वाहवाही लूटने वाले मुख्यमंत्री शिवराज चौहान को प्रशासन कितनी गंभीरती से लेता है, इसक एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा सहायता राशि में तो कटौती की ही गई, स्वीकुत राशि का भी समय पर भुगतान नहीं किया गया। इस कारणएक व्यक्ति को असमय मौत के मुंह में जाना पड़ा। इतने गंभीर मामले में एक भी अधिकार को जिम्मेदार नहीं ठहराने से सरकार की संवेदनशीलता पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-family:georgia;"&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;भोपाल मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से सहायता राशि में लापरवाही सामने आई है। समय पर यहायता राशि न मिलने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। इससे मुख्यमंत्री शिवराज चौहान संवेदनशीलता की पोल खुल गई है। उलेखनीय है कि रेलवे में कार्यरत ब्रजभूषण सिरवैया का लीवर खराब हो गया था, जिसे नई दिल्ली के सर गंगराम अस्पताल में भर्ती किया गया था। सिरवैया की पत्री ममता सिरवैया ने अपना लीवर देकर पति की जान बचाने की पहल की, किंतु इस पर लगभग २५ लाख रूपए खर्च बताया गया। श्रीमती सिरवैया ने रेल विभाग में आवेदन देकर यह राशि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, जहां से २० लाख रूपए स्वीकुत किए गए। कुछ राशि उन्होंने परिजनों से जुटाई।फिर भी ५ लाख रूपए कम पड़ रहे थे। श्रीमती सिरवैया ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को आवेदन देकर शेष राशि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। इस पर मुख्यमंत्री ने पांच लाख रूपए देने की घोषणा की। जनसंपर्क विभाग ने सहायता राशि स्वीकृत करने संबंधी समाचार भी जारी किया,जो लगभग सभी प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश क्र. २१३ के तहत मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान कोष से पांच लाख की बजाय चार लाख रूपए देने का आदेश ८ जनवरी को कलेक्टर भोपाल को दिया। इसके बाद क्या हुआ, यह किसी को पता नहीं चला। उधर समय पर इलाज न हो पाने के कारण अस्पताल में भर्ती ब्रजभूषण सिरवैया की मौत हो गई। खास बात यह है कि यह सहायता राशि श्रीमती सिरवैया को आज तक नहीं मिल पाई है। प्रशासन की इस लापरवाही के कारण एक व्यक्ति की असमय मौत हो गई और इसके लिए आज तक किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-186354871991074159?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/186354871991074159/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2010/04/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/186354871991074159'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/186354871991074159'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2010/04/blog-post.html' title='इलाज के अभाव में मौत शिव सरकार की सहायता घोषणा फर्जी निकली'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/S9KlY2IKtqI/AAAAAAAAAXk/zWRtLWRiZhU/s72-c/1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-2085812559290413627</id><published>2010-02-20T09:54:00.000-08:00</published><updated>2010-02-20T22:10:40.701-08:00</updated><title type='text'>कागजों में जनकल्याण जनता हुई हलाकान</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/S4DNfzujjDI/AAAAAAAAAXY/BdFXF28xgCQ/s1600-h/nnnnn.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5440574296208673842" style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 200px; CURSOR: hand; HEIGHT: 119px" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/S4DNfzujjDI/AAAAAAAAAXY/BdFXF28xgCQ/s200/nnnnn.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;महिला आयोग ने कागजों में फूंके करोड़ों&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;em&gt;मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी, जननी सुरक्षा और कन्यादान योजना के माध्यम से जनकल्याण करने के लाख दावे करें, किंतु महिला आयोग उनके दावों की कलई खोल रहा है। खास बात यह है कि इस आयोग ने करोड़ों रुपए तो फूंक डाले, किंतु लोगों को न्याय नहीं मिल सका और अब आयोग द्वारा किए गए खर्च का विवरण देने में आनाकानी की जा रही है। यहाँ यह तथ्य भी गौरतलब है कि आयोग की कथित सक्रियता के बावजूद अपराधों का ग्राफ लगातार बढ़ता ही गया।&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;em&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;महिला आयोग में राजनीतिज्ञ :-&lt;/strong&gt; मप्र राज्य महिला आयोग अधिनियम 1995 के अनुसार राज्य महिला आयोग का गठन किया गया। इस अधिनियम के अध्याय-2 में उल्लेख है कि आयोग की अध्यक्ष विख्यात महिला सामाजिक कार्यकर्ता होगी या कोई वृत्ति करने वाली ऐसी विख्यात महिला होगी, जो महिलाओं के हित के लिए प्रतिबद्ध होगीं, जिसे राज्य सरकार द्वारा नाम निर्देशित किया जाएगा। आयोग की मौजूदा अध्यक्ष कृष्णकांता तोमर हैं, जो न समाजसेवी हैं, न विख्यात महिला। उनकी योग्यता मात्र यह है कि वे भाजपा से जुड़ी हैं। इसी अध्याय की कंडिका तीन तथा चार में कहा गया है कि आयोग की सदस्य दो ख्यातिप्राप्त सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा तथा स्वास्थ्य क्षेत्र की दो विशेषज्ञ होंगी। आयोग की मौजूदा सदस्य कमला वाडिया, मनोरमा गौर, सुषमा जैन और अमिता चपरा उपरोक्त विशेषज्ञता नहीं रखती हैं तथा उनकी योग्यता सिर्फ भाजपा नेताओं के परिवार से जुड़ी होना ही है।&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;em&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;ढेर सारा अमला :-&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt; &lt;em&gt;उपरोक्त अध्यक्ष, सदस्य के अलावा आयोग में 30 अधिकारी, कर्मचारी और भृत्य-चौकीदार हैं, जिन्हें हर माह 25 लाख 4776 रुपए वेतनमान दिया जाता है। आयोग को वर्ष 2005-06 में 77 लाख 30 हजार रुपए बजट आवंटित हुआ, जिसमें 72 लाख 92 हजार 237 रुपए खर्च किए गए। वर्ष 2006-07 के बजट 93 लाख, 86 हजार में 88 लाख, 39 हजार 534 रुपए खर्च हुए। वर्ष 2007-08 में 1 करोड़ 13 लाख, 50,000 रुपए के बजट में से 86 लाख 12 हजार 261 रुपए खर्च हुए।&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;em&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;बजट के साथ अपराध भी &lt;/em&gt;&lt;/strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;बदे :-&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt; &lt;em&gt;महिला&lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;em&gt; आयोग द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2005-06 में दहेज हत्या के 203, दहेज प्रताडऩा के 532, बलात्कार के 255, अपहरण के 69, हत्या के 82, आत्महत्या के 15, कार्यस्थल पर प्रताडऩा के 251, घरेलू अत्याचार के 512, संपत्ति विवाद के 250, भरण पोषण के 47, बच्चों से संबंधित अत्याचार के 14 और अन्य प्रकार के 1275 प्रकरण, यानी कुल 3,514 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए। वर्ष 2006-07 में 261 दहेज हत्या, 793 दहेज प्रताडऩा, 404 बलात्कार, 236 अपहरण और 188 हत्या के प्रकरणों के साथ ही कुल 5978 प्रकरण दर्ज किए गए।&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;em&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;35 फीसदी निराकरण :-&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt; &lt;em&gt;महिला आयोग को वर्ष 1998 से 2003 तक कुल 5860 प्रकरण प्राप्त हुए, जिनमें से मात्र 2105 प्रकरणों का ही निपटारा किया जा सका। शेष 3706 प्रकरण नस्तीबद्ध कर दिए गए। छह साल में आयोग को करोड़ों का बजट मिला और काम 35.92 फीसदी ही हुआ, जो उसकी कार्यक्षमता तथा उपयोगगिता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;em&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;कार्य विवरण कार्यालय में :-&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt; &lt;em&gt;आरटीआई एक्टिविस्ट सुश्री शेहला मसूद ने महिला आयोग में सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी मांगी कि आयोग की बैठकों का विवरण मय तारीख के उपलबध कराया जाए तो आयोग की ओर से दी गई सूची में बताया कि विवरण कार्यालय में उपलब्ध है। प्रश्न यह है कि जब प्रत्येक बैठक का कार्य विवरण रजिस्टर में दर्ज है तो उसका विवरण क्यों नहीं दिया जा रहा है? क्या इससे इस शंका को बल नहीं मिलता है कि आयोग में बैठकों के नाम पर फर्जीवाड़ा होता है और सरकारी बजट का दुरुपयोग किया जाता है? अपीलार्थी ने यह मामला राज्य सूचना आयोग में उठाया है।&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;em&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;अयोग्य कैसे दिलाएंगी न्याय :-&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt; &lt;em&gt;राज्य शासन ने महिला थानों में महिला काउंसलर की भी नियुक्तियां की हैं, जिन्हें स्नातकोत्तर होने के साथ ही समाज कल्याण का डिप्लोमाधारक होना चाहिए तथा कम से कम दो वर्ष का अनुभव भी होना चाहिए, लेकिन राजधानी के थानों में एक भी महिला काउंसलर इन योग्यताओं पर खरी नहीं उतरती है। किसी भी महिला काउंसलर के पास सोशल वेलफेयर का डिप्लोमा नहीं है। कुछेक तो मात्र बीए पास हैं और काउंसलर बना दी गई हैं। यही वजह है कि इनके द्वारा गलत समझौते कराने के कारण दोबारा प्रकरण दर्ज किए गए। जब राजधानी की यह हालत है तो प्रदेश के सुदूर अंचलों की स्थिति का अंदाज सहज ही लगाया जा सकता है। यही कारण है कि लोगों में कानून का भय नहीं है और इसी कारण महिलाओं पर अत्याचार के मामले बढ़ रहे हैं। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-2085812559290413627?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/2085812559290413627/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2010/02/blog-post_20.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/2085812559290413627'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/2085812559290413627'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2010/02/blog-post_20.html' title='कागजों में जनकल्याण जनता हुई हलाकान'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/S4DNfzujjDI/AAAAAAAAAXY/BdFXF28xgCQ/s72-c/nnnnn.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-9008340658271671489</id><published>2010-02-13T05:21:00.001-08:00</published><updated>2010-02-13T06:38:24.700-08:00</updated><title type='text'>परस्त्रीगमन में मगन मध्यप्रदेश की नौकरशाही</title><content type='html'>&lt;em&gt;भोपाल। मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार भले ही साफ-सुथरी छवि बनाने में जुटी हो। लेकिन सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन करने वाले नौकरशाह अय्याशी और रंगीनमिजाजी में डूबे हुए हैं। जिलों में पदस्थ कलेक्टर्स से लेकर प्रमुख सचिव स्तर के आला अफसर तक सब के सब प्रेम प्रसंगों में उलझे हैं। ने ऐसे आला अफसरों की खोजबीन की, तो उनकी रंगीन कहानियां कुछ इस तरह सामने आई। आला अफसरान को अय्याशी का रोग इस तरह लगा है कि वे अपनी स्टेनो तक को नहीं छोड़ रहे हैं। एक आईपीएस अफसर तो अपनी मातहत महिलाकर्मियों से भी मुंह काला कर रहे हैं। कुछेक अफसरान ने अपनी मातहत से शादियाँ कर ली हैं, तो कुछ अपनी अधीनस्थों को बाहर ले जाकर भी अपनी कामपिपासा शांत कर रहे हैं। खास बात यह है कि महिला आईएएस भी ऐसे मामलों से अलग नहीं हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;केस नंबर एक :-&lt;/strong&gt; ये जनाब पंजाब कॉडर के अफसर हैं। अपनी पत्नी से अलग रहने वाले इस अधिकारी की तीन प्रेमिकाएं हैं। जिनके नाम कविता, ममता और संजना हैं। ममता तो इन दिनों साहब के घर पर ही रहती हैं। इनके मकान में देर रात तक उक्त महिला शराब परोसती है। प्रमुख सचिव स्तर के यह अफसर जिस विभाग में आयुक्त के पद पर पदस्थ थे, उस विभाग की डीओ महिला से इस अधिकारी का प्रेम प्रसंग चलता था, लेकिन अब दोनों का विभाग बदल गया है। अफसर जहां दूसरे विभाग में है, तो महिला दूरदराज के जिले में पदस्थ है। इस कारण अफसर ने नई महिला प्रेमिका तैयार कर ली है। इसके एवज में अफसर उक्त महिला को करोड़ों का छपाई का काम दे चुके हैं। वह महिला जब भी दफ्तर में आती है, अधिकारी हर काम उसे थमा देते हैं। वैसे उक्त अफसर की पत्नी भी कमिश्नर स्तर के पद पर पदस्थ है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;केस नंबर दो :-&lt;/strong&gt; हाई प्रोफाइल इस अफसर की दो प्रेमिकाएं हैं। एक अफसर है तो दूजी प्रोफेशनल। भ्रष्टाचार के मामलों में हमेशा उलझे रहने वाले इस अफसर को अक्सर चार इमली में मार्निंग वॉक पर डेटिंग करते हुए देखा जा सकता है। जबकि दूसरी प्रेमिका जो एक प्रोफेशनल हैं, देर रात भोपाल के हेरिटेज होटल में गलबहियां करते हुए दिखती हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;केस नंबर तीन :-&lt;/strong&gt; ये जनाब इश्क के मामले में बड़े ईमानदार हैं। बीवी के अलावा यह सिर्फ एक अन्य स्त्री से प्रेम करते हैं। चूंकि स्वयं आईएएस हैं तो प्रेम भी आईएएस महिला से ही हुआ। पद की गरिमा का ध्यान इन्हें इसलिए नहीं है, क्योंकि उनकी प्रेमिका इनसे उम्र में काफी छोटी हैं। सो कोई शंका नहीं करता। ये जहां जिस जिले में पदस्थ होती हैं, वहां उनसे बिना नागा मिलना इनके कर्तव्य में शुमार है। पिछले छह साल से चल रहे इस प्रेम प्रसंग में यह खास बात है कि उक्त महिला अफसर की पोस्टिंग कभी भोपाल से दूरस्थ इलाके में नहीं हुई।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;केस नंबर चार :-&lt;/strong&gt; नौकरशाहों में काफी मुखर यह अफसर प्रेम प्रसंग में भी काफी मुखर हैं। इनकी पत्नी भी आईएएस हैं। वे काफी शांत, सुशील और सौम्य हैं। किंतु इसके विपरीत यह अफसर आफिस टाइम में अपनी प्रेमिका के साथ भोपाल के नौकरशाहों के क्लब में बीयर की चुस्कियां लेते देखे जा सकते हैं। इनकी प्रेमिका भी आईएएस हैं। अभी हाल में दिल्ली गई हैं। वैसे इनकी दूरियां अब साप्ताहिक हो गई हैं। क्योंकि ये मोहतरमा शनिवार रात भोपाल आ ही जाती हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;केस नंबर पांच :-&lt;/strong&gt; पूर्ववर्ती सरकार में पावरफुल रहे और अब भी क्रीम पोस्ट पर बैठे इस अफसर का प्रेम प्रसंग कुछ अलग है। इन्हें इंटरनेट पर एक इण्डोनेशिया की बाला से प्रेम हो गया है। पिछले दो साल से चल रहे इस प्रेम प्रसंग से इनकी पत्नी इस कदर परेशान हो गई है कि स्थिति तलाक तक पहुंच गई है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;केस नंबर छह :-&lt;/strong&gt; महिला बाल विकास विभाग में अपर संचालक के दो पद सरकार ने स्वीकृत किए हैं, जबकि प्रमोशन पाने की दौड़ में पांच अधिकारी भिड़े हुए हैं, इनमें से दो महिलाएं भी शामिल हैं, इस प्रमोशन के चक्कर में एक महिला अधिकारी प्रमुख सचिव पर ज्यादा दबाव बनाने में लगी हैं। इस कारण वह बार-बार एक-एक फाइल को लेकर पीएस के पास जाती है और एक से दो घंटे तक पीएस के पास बैठी रहती है। इससे खफा पीएस ने उक्त महिला को फटकार लगा दी। जिसकी शिकायत उक्त महिला ने अपने पुराने प्रेमी अफसर से कर दी। अफसर की फटकार तथा उक्त महिला को प्रमोशन दिलाने के लिए विभाग के एक पूर्व कमिश्नर प्रमुख सचिव से मिले और उक्त महिला का समर्थन किया। जब यह अधिकारी महोदय उस विभाग में हुआ करते थे, तब उनका इस महिला के साथ प्रेम प्रसंग जमकर चला करता था और इसकी चर्चा अभी भी विभाग के कर्मचारी करते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;केस नंबर सात :-&lt;/strong&gt; राज्य मंत्रालय में पदस्थ इस सचिव ने हाल ही में एक महिला बाल विकास अधिकारी से शादी की है। खास बात यह है कि इस आईएएस के सभी संगी-साथी प्रमुख सचिव स्तर तक पहुंच गए हैं, जबकि ये साहब सचिव ही हैं। कारण इनकी रंगीनमिजाजी और भ्रष्टाचार है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;केस नंबर आठ :-&lt;/strong&gt; वन विभाग के एक अधिकारी यूं तो 50 पार हो चुके हैं, पर रंगीनमिजाजी से बाज नहीं आ रहे हैं। इनका दिल अपनी स्टेनो पर ही आ गया। स्टेनो के साथ प्रेम की पींगे बढ़ाते हुए इन्होंने पिछले दिनों उससे शादी कर ली।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;केस नंबर नौ :-&lt;/strong&gt; लोक निर्माण विभाग के एक वरिष्ठ अभियंता को अपनी स्टेनो इतनी भायी कि वे अब उसी के साथ वक्त गुजारते हैं। हालांकि इन्हें चार इमली क्षेत्र में सरकारी आवास आवंटित है, किंतु स्टेनो को कोलार रोड पर एक मकान दिलवा दिया है, जहां इनका प्रेम परवान चढ़ता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;केस नंबर दस :-&lt;/strong&gt; लोक निर्माण विभाग के एक आईएएस अफसर रंगीन तबीयत के हैं। इन्होंने सांची में एक महिला को रखैल बना रखा है। यह महिला विभाग में ही दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी है। साहब उसे रायसेन के एक होटल में बुलवाते हैं और अपनी कामपिपासा शांत करते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;केस नंबर ग्यारह :-&lt;/strong&gt; सत्य का प्रकाश फैलाने वाले एक वरिष्ठ आईएएस अफसर महिला अफसर से प्रेम प्रसंग के कारण चर्चा में हैं। पहले यह महिला अफसर प्रशासन अकादमी में थीं और रात में अक्सर गायब रहती थी। अब यह दिल्ली में पदस्थ है और साहब छुट्टियों के समय रातें रंगीन करने दिल्ली जाते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;केस नंबर बारह :-&lt;/strong&gt; एक वरिष्ठ महिला आईएएस का दिल एक टीवी स्टार पर आ गया। यह प्रेम प्रसंग कई दिनों तक चला और अब दोनों ने शादी कर ली है। टीवी स्टार भाजपा का स्टार प्रचारक है और मध्यप्रदेश में एक निगम का अध्यक्ष भी रह चुका है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;केस नंबर तेरह:-&lt;/strong&gt; सतपुड़ा भवन में पदस्थ वन विभाग के एक आला अफसर का अपनी स्टेनो से प्रेम प्रसंग चल रहा है। साहब यदि चार घंटे आफिस में बैठते हैं तो स्टेनो भी इतना ही समय वहीं गुजारती है। कभी-कभी साहब अपने केबिन का दरवाजा अंदर से बंद कर दफ्तर में ही 'शुरू' हो जाते हैं। यदा-कदा वे स्टेनो को बाहर भी ले जाते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;केस नंबर चौदह :-&lt;/strong&gt; वन महकमे में मुख्य वन संरक्षक पद पर बैठे एक आईएफएस इतने रंगीनमिजाज हैं कि महिलाओं को देखकर उनकी लार टपकने लगती है। कई महिलाओं को बर्बाद करने वाले इस अफसर की करतूतों से परेशान होकर इनकी पत्नी ने इन्हें छोड़ दिया है। इसके बावजूद इनकी आदत नहीं सुधरी है। महिला कोई भी हो, वे उसकी निकटता पाने और उसे अपने जाल में फंसाने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;केस नंबर पंद्रह :-&lt;/strong&gt; एक अल्पसंख्यक आईपीएस अफसर महिला इंस्पेक्टर से इश्क फरमा रहे हैं, जो ब्राह्मण समाज की है। पहले यह अफसर रीवा में पुलिस अधीक्षक रह चुके हैं और फिलहाल भोपाल स्थित बटालियन में हैं। इनके प्रेम प्रसंग की पुलिस महकमे में खासी चर्चा है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;केस नंबर सोलह :-&lt;/strong&gt; पुलिस अधीक्षक स्तर की एक महिला आईपीएस को कोई नहीं मिला तो निरीक्षक स्तर के एक व्यक्ति को ही दिल दे बैठी। दोनों को अक्सर साथ में घूमते देखा गया है। खबर यह भी है कि कभी-कभी दोनों बाहर भी जाते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;केस नंबर सत्रह :-&lt;/strong&gt; जेल महकमे में अपने प्रचार अभियान के लिए चर्चित एक आला अफसर की नजर इतनी खराब है कि वे अपनी मातहत महिला प्रहरियों को भी नहीं छोड़ते हैं। महिला प्रहरी आसानी से हमबिस्तर हो जाए तो कोई बात नहीं, लेकिन जरा भी टेढ़ी की तो साहब की नजर भी टेढ़ी हो जाती है। वे ऐसी महिला प्रहरियों पर अनैतिक दबाव डालकर अपनी क्षुधा शांत करते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;केस नंबर अठारह :-&lt;/strong&gt; एक कारपोरेशन में प्रबंध संचालक पद पर पदस्थ अफसर अपनी मातहत महिलाकर्मियों को एक फार्म हाउस पर बुलवाते हैं और वहां रंगरलियां मनाते हैं। इस फार्म हाउस पर कुछ अन्य अफसर और मंत्री भी आते हैं। एक महिलाकर्मी ने इस अफसर की शिकायत पुलिस में भी की थी, जिसे एक वरिष्ठ पुलिस अफसर के हस्तक्षेप के बाद रफा-दफा किया गया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;केस नंबर उन्नीस :-&lt;/strong&gt; जब नौकरशाही अय्याशी में डूबी हो तो उनके आसपास मंडराने वाले पत्रकार भला कैसे पीछे रहते। एक पत्रकार पर एक महिला ने बलात्कार का आरोप लगाया तो सनसनी फैल गई, क्योंकि इस सेक्स स्केंडल में एक आईएफएस और तीन आईएएस अफसर के नाम भी सामने आए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;केस नंबर बीस :-&lt;/strong&gt; मंत्रालय में पदस्थ एक आईएएस का एक महिला प्रोफेसर से प्रेम प्रसंग चल रहा है। गत लोकसभा चुनाव में जब इनकी ड्यूटी राजस्थान में लगाई गई तो साहब अपने साथ उक्त प्रोफेसर को भी ले गए और वहां लोगों को बताया कि यह उनकी पत्नी है। किसी ने फोन पर साहब की पत्नी को सारी जानकारी दे दी। आईएएस पत्नी ने शासन को पत्र लिखकर पूछा कि उक्त अफसर महिला प्रोफेसर को किस हैसियत से अपने साथ ले गए थे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;केस नंबर इक्कीस :-&lt;/strong&gt; आईएएस स्तर के एक अफसर जब कलेक्टर थे तब एक महिला डीएसपी उनकी नजर में चढ़ गई। साहब ने उसे जमकर भोगा, जिससे वह गर्भवती हो गई। तब साहब ने उसे चलता कर दिया। नौ साल तक यह मामला विभिन्न अदालतों में चला और अब सुप्रीमकोर्ट में विचाराधीन है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रंगीनमिजाज मंत्री :-&lt;/strong&gt; ग्वालियर चंबल क्षेत्र के ये मंत्री महोदय तीन वक्त नॉनवेज भोजन पसंद करते हैं। शराब पीने के बाद वे स्वयं अपनी रंगीनमिजाजी के किस्से सुनाते हैं और रात में मुंबई की दो फिल्म अभिनेत्रियों, जिनके नाम प्रीति और दीप्ति हैं, से अपने संबंध होने का स्वयं दावा करते हैं। देर रात उनसे मोबाइल पर बात भी करते हैं।गल्र्स होस्टल में ताकझांक :- आदिवासी कोटे के ये मंत्री अव्वल दर्जे के अय्याश हैं। चूडिय़ों की खनक और घुंघरू की आवाज से ये बेचैन हो उठते हैं। इनका शगल है रात में शराब पीने के बाद आदिवासी गल्र्स होस्टल का दौरा करना। पिछले दिनें भोपाल के पास एक फिल्म की शूटिंग के दौरान अभिनेत्री के नहाने के दृश्य को इन्होंने दो बार रिटेक करवाया। इससे पूर्व इन्हीं मंत्री ने भोपाल के विंड्स एंड वेव्स रेस्टोरेंट पर एक कार्यक्रम के दौरान दिल्ली की एक पीड़ित पत्रकार से छेडख़ानी की थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;इन्हें गायिका चाहिए :-&lt;/strong&gt; यह मंत्री महोदय राज परिवार से हैं। शराब पीने के बाद इन्हें गजल सुनने और तवायफों को नचवाने का शौक है। पिछले दिनों इन्होंने भोपाल के पलाश होटल में देर रात शराब पीकर एक भजन गायिका के साथ दुर्व्यवहार किया था। यह खबर सभी अखबारों में प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सज्जन अफसर की सज्जनता :-&lt;/strong&gt; शिक्षा विभाग के एक अधिकारी की इंदौर यात्रा बड़ी चर्चा में हैं। यह सज्जन बीते दिनों अपने ही विभाग के एक अधिकारी के यहां शादी में गए थे। सज्जन ने इसके लिए सरकारी टूर बना लिया। यहां तक होता, तो भी ठीक था, लेकिन सज्जन अपने साथ एक महिला मित्र को भी ले गए। बताते हैं कि पहले तो सज्जन ने सरकारी टूर की औपचारिकता पूरी की, फिर अधिकारी महोदय के यहां शादी में शरीक हुए। उसके बाद महिला मित्र की चाकरी में लग गए। अब सज्जन की नेक-नीयत पर तो किसी को ऐतराज नहीं, लेकिन संगी-साथी हैरान इस बात पर हैं कि इतनी एनर्जी साहब लाते कहां से हैं!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नहीं लग रहा मन :-&lt;/strong&gt; भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी का मन नहीं लग रहा। उन्हें एक संभाग का कमिश्नर बनाया गया। मगर थोड़े समय बाद ही भोपाल वापसी की रट उन्होंने लगा दी। मंसूबा पूरा नहीं हुआ। पोस्टिंग की तय अवधि से ज्यादा हो चुका है, मगर भोपाल वापसी नहीं हुई है। मन न लगने की वजह भोपाल में पदस्थ महिला मित्र बताई जा रही है। कमिश्नरी मिलने के बाद मित्र ने ग्वालियर के दो दौरे किए। पहले भी ग्वालियर देख चुकी अफसर साहब के साथ उन स्थानों पर गई जो मशहूर हैं। अपने कार्यकाल में अनेक दौरे भोपाल के अधिकारी महोदय ने किए। दोनों शादीशुदा और बाल बच्चेदार हैं। मगर मित्रता तो मित्रता है। भला मेल-जोल कैसे रुक सकता है। ताजा खबर यह है कि इनकी भोपाल वापसी के लिए भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है। नेताजी और अधिकारी को नतीजे का इंतजार है और मित्र को साहब की वापसी का।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;'रेशमी रोशनी' के चर्चे :-&lt;/strong&gt; शिक्षा विभाग के एक संचालनालय में पिछले कुछ समय से 'रेशमी-रोशनी' के चर्चे छाए हुए हैं! दरअसल, कुछ समय पहले इस शाखा में एक महिला अधिकारी तबादला होकर आई। महिला अधिकारी के 'सौंदर्य' से शाखा के एक साहब इतने प्रभावित हुए कि बस पूरे समय संग-संग रहने की ही कोशिशें होती रहीं। दोनों एक ही जाति-समुदाय से थे, इसलिए प्रेम की पीगें और तेजी से बढऩे लगीं। हाल ये है कि दोनों के प्रेम की चर्चा पूरे विभाग में है, लेकिन जब दोनों राजी, तो कोई क्या करे। इसलिए जिस शाखा में दोनों हैं, उस शाखा के प्रमुख अधिकारी भी बेचारे बस यही कोशिश करते हैं कि दोनों सामने रहें, तो इधर-उधर के काम में लग जाएं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;महिला आईएएस का प्रेम :-&lt;/strong&gt; अपनी ऊंची कद-काठी और शराबनोशी के लिए चर्चित यह महिला अधिकारी कभी उच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से प्रेम प्रसंग के लिए भी जानी जाती थी। हालिया जानकारी यह है कि यह महिला अधिकारी इन दिनों एक उप सचिव स्तर के अधिकारी के साथ प्रेम पींगे बढ़ा रही है तथा दोनों को चार इमली क्षेत्र में साथ-साथ मार्निंग वाक करते भी देखा जाता है। प्रशासनिक क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि पति से दूर रहकर उच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से प्रेम करने वाली इस महिला का स्तर इतना क्यों गिर गया है कि अब उप सचिव स्तर के अधिकारी के साथ कदमताल कर रही है?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;दिल है कि मानता नहीं :-&lt;/strong&gt; उच्च शिक्षा से जुड़े़ एक शीर्ष अफसर की रसिकमिजाजी इन दिनों काफी चर्चा में है। इन सज्जन का दिल दो-तीन महिला रिसर्चर पर जब-तब मेहरबान हो जाता है। इसलिए अक्सर उनके साथ के कारण इनके किस्से चर्चित हो जाते हैं। पिछले दिनों सज्जन ने हद इतनी की कि दिल्ली के टूर पर भी एक महिला रिसर्चर को साथ ले गए। टूर में रिसर्च की रिसर्च हो गई और बाकी जो दोनों की मर्जी! इतना और बता दें कि ये सज्जन वास्तु को बहुत मानते हैं, सो रंगीन मिजाजी भी उसी अंदाज में करते हैं। वास्तु वाली रंगीनमिजाजी जानना है, तो वह तो इनकी कोई करीबी ही बता सकती है!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अय्याशी में भी साझेदारी :-&lt;/strong&gt; वन महकमे में दलाली, कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार में साझेदारी होना आम बात है, लेकिन दो अफसरों ने अय्याशी में साझेदारी की नई मिसाल पेश की है। बताया जाता है कि एक डीएफओ ने अच्छी पोस्टिंग कराने के लिए अपनी साली का सहारा लिया। एक सीसीएफ साहब को साली साहिबा इतनी भायी कि उन्होंने उसे अरेरा कॉलोनी में एक फ्लेट ही किराए से दिलवा दिया। अब सीसीएफ साहब इस फ्लेट में अपनी कामपिपासा शांत करने अक्सर आया-जाया करते हैं और बीच-बीच में मौका पाकर जीजा भी मुंह मारने से नहीं चूकते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डॉक्टर साहब को लवेरिया हुआ :-&lt;/strong&gt; स्वास्थ्य विभाग में दूसरी पंक्ति के एक डॉक्टर अफसर का दिल इन दिनों एक स्वयंसेवी संस्था की महिला पर आ गया है। महिला पहले से ही स्वास्थ्य विभाग की सेवा में लगी है, सो अनुदान और बहुत-सी मददें उनकी झोली में हैं। उस पर अब अफसर महोदय का दिल आ गया है, तो बात वीआईपी जैसी हो गई है। बताते हैं बीते दिनों अफसर महोदय कार्यालय से निकले और सीधे महिला के घर। अगले दिन छुट्टी थी, लेकिन फिर भी अधिकारी कार्यालय आए और वहां से कुछ फाइलें लेकर फिर महिला के घर जा पहुंचे। फाइलें क्या थी, यह तो नहीं पता, लेकिन चर्चा है कि नए वित्तीय वर्ष में किसी नए प्रोजेक्ट को विशेष तौर पर महिला के ऊपर न्यौछावर करने के लिए तैयार किया जा रहा है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;घरवाली बाहरवाली :-&lt;/strong&gt; ऊर्जा विभाग के एक अफसर की प्रेमकथा इन दिनों खूब चटखारे लेकर सुनी-सुनाई जा रही है। यह अफसर हैं तो द्वितीय श्रेणी के, लेकिन काम सारे प्रथम श्रेणी वाले हैं। ये महोदय विद्युत कंपनी की एक महिला के साथ प्रेम की पींगे भी बढ़ा रहे हैं। सब ठीक चल रहा था, लेकिन बात तब सामने आई जब बीते दिनों उनके ही किसी मित्र ने उनकी बीवी को इसकी जानकारी दे दी। मित्र तो अपनी मित्रता दिखा गए, लेकिन महोदय परेशान हैं। पत्नी भी एक संस्था में काम करती है। बस, पत्नी अब उस महिला पर नजर रखती है और महोदय अपनी पत्नी पर।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;तलाक की डगर पर :-&lt;/strong&gt; मध्यप्रदेश कैडर के चार आईएएस अफसर तलाक की डगर पर बढ़ रहे हैं। इनमें से एक अफसर दिल्ली में पदस्थ है। ये चारों आईएएस रंगीनमिजाज तो हैं ही, साथ ही इधर-उधर 'मुंह मारने का भी कोई मौका हाथ से नहीं जाने देते हैं। लेकिन इनके तलाक की वजह दूसरी है। दरअसल ये अफसरान बढ़ती उम्र में भी प्रेम-प्रसंग में डूबे हुए हैं और तलाक की वजह भी यही है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;महंगी पड़ी टेलीफोन अय्याशी :-&lt;/strong&gt; लोक निर्माण विभाग के एक आला अफसर को अपनी स्टेनो से टेलीफोन अय्याशी करना महंगा पड़ गया। बात दरअसल यह है कि इस अफसर की पत्नी इंदौर में है और यहां साहब अकेले हैं। सो, साहब ने अपनी स्टेनो से मौखिक अय्याशी करना शुरू कर दी, लेकिन जब साहब रात में भी उसके घर फोन करने लगे तो स्टेनो बिफर गई। उसने पुलिस में शिकायत कर दी। बाद में पुलिस के एक आला अफसर की मध्यस्थता के चलते मामला रफा-दफा किया गया। चार इमली क्षेत्र में रहने वाले इस अफसर पर भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं और खास बात यह है कि सिविल इंजीनियर न होते हुए भी इएनसी पद पर बैठे हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;महिला अफसर एक दीवाने दो :-&lt;/strong&gt; स्कूली शिक्षा में एक महिला अधिकारी के इन दिनों बड़े चर्चे हैं। इसका कारण इस सुंदर महिला अधिकारी पर कई अफसरों का दिल आना है। महिला कुछ महीने पहले ही पदस्थापना पर आई है, लेकिन जब से आई हैं तब से संयुक्त संचालक स्तर के दो अधिकारी इनके ऐसे दीवाने हुए कि आपस में ही भिड़ गए हैं। एक अफसर तो इतने लट्टू हो गए हैं कि महिला ने जिनके-जिनके नाम रिकमेंड किए, उनकी शाखा ही बदल दी। अब दोनों ही अफसर तरह-तरह के जतन करके महिला अधिकारी को रिझाने की कोशिश में लगे रहते हैं। महिला अधिकारी भी कम नहीं, जब जिसका पलड़ा भारी होता है उस ओर मुस्करा देती है। आगे के हाल तो भईयां तीनों ही जानें..!&lt;/em&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-9008340658271671489?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/9008340658271671489/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2010/02/blog-post_13.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/9008340658271671489'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/9008340658271671489'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2010/02/blog-post_13.html' title='परस्त्रीगमन में मगन मध्यप्रदेश की नौकरशाही'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-5647855369012125403</id><published>2009-11-27T08:46:00.000-08:00</published><updated>2009-11-27T20:48:31.340-08:00</updated><title type='text'>सब कुछ नहीं खरीद सकता पैसा</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;पैसे से बहुत कुछ हो सकता है, लेकिन सब कुछ नहीं । जीवन में धन की माया सब तरफ नजर आती है। यही वजह है कि धन भी शक्ति माना जाता है। एक ऐसी शक्ति जिसे लेकर यह भ्रम अक्सर बना रहता है कि पैसे से सब कुछ खरीदा जा सकता है। पर ऐसा नहीं है। दुर्भाग्य यह है कि जिस तरह कठिन से कठिन लक्ष्य को हासिल करने के बाद ही उसकी सरलता का अनुभव होता है, ठीक उसी तरह धन को अर्जित करने के बाद उसकी निरर्थकता का अनुभव होता है।&lt;br /&gt;किसी ने कहा है कि पैसा ब़ड़ी नामुराद चीज है, लेकिन यह बात पैसा कमाने की बाद ही मालूम प़ड़ती है। रहस्य को पा लेने के बाद ही समझ में आता है कि जिसे हम जीवन का आधार मान बैठे थे दरअसल वह बहुत साधारण चीज है। धन भी इसका अपवाद नहीं है। लेकिन मनुष्य ऐसा प्राणी है, जो अनुभव को सर्वाधिक तरजीह देता है। इसीलिए जब तक धन नहीं होता तब तक हर व्यक्ति की इच्छा यही होती है कि वह भी धनवानों में शुमार किया जाए। जब धन का आना शुरू होता है और उसके साथ ही यह कल्पना भी आनंदित करती है कि अब जीवन में कोई कमी नहीं रहेगी, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं होता। जीवन में ऐसा बहुत कुछ है जिसे धन नहीं खरीद सकता। इसमें आनंद, स्वास्थ्य, प्रेम और सम्मान मुख्य रूप से शामिल हैं। धन का आगमन जिंदगी की गा़ड़ी के सुगम संचालन में मदद करता है, लेकिन जीवन से जु़ड़ी बहुत सी समस्याओं को हल करने में धन की कोई भूमिका नहीं होती। सम्मान,आनंद, प्रेम और मुक्ति धन से नहीं खरीदी जा सकती। अगर ऐसा होता तो इस दुनिया के करो़ड़पति-अरबपति व्यक्ति शायद लाखों-करो़ड़ों और अरबों रूपए की बोली लगा कर इन दुर्लभ अनुभूतियों को खरीद लेते। महान सिकंदर ने यूनान में एक फकीर के बारे यह सुन रखा था कि वह कभी किसी से कुछ नहीं मांगता है। दुनिया के एक बडे हिस्से को फतह करने वाले सिकंदर का अहंकार छटपटा उठा। आखिर ऐसा कौन सा व्यक्ति है, जो किसी प्रलोभन के आगे नहीं झुकता है। सिकंदर उस फकीर को खोजते हुए दूर समुद्र तट पर पहुंचा। उसने वहाँ देखा कि बस एक लंगोटी पहने एक व्यक्ति रेत पर लेटा हुआ है। सिकंदर उसके पास पहुंचा और ललकार कर कहा कि देख ए फकीर तेरे सामने दुनिया को रौंदने वाला सम्राट सिंकदर ख़ड़ा है। लेकिन उस व्यक्ति पर कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। एक-एक करके सिकंदर ने उस फकीर से बहुत कुछ कहा और उसे ब़ड़े-ब़ड़े प्रलोभन भी दिए, लेकिन फकीर उसी तरह रेत पर लेटा रहा। आखिर में चि़ढ़ कर सिकंदर ने कहा कि सुन ए फकीर मैं तुझे अपनी सारी सल्तनत देता हूं। अब तो मेरी तरफ देख। इस पर उस फकीर ने धीरे से नजर उठा कर सिकंदर को देखा और कहा कि ए सम्राट अगर तू मुझे कुछ देना ही चाहता है, तो मेरे सिरहाने से हट जा और धूप आने दे। सिकंदर ने शर्मिंदगी से सर झुकाया और उस फकीर के आगे सर झुकाते हुए वापस लौट गया। रावण सोने की लंका का मालिक था। जीवन में सब कुछ था, लेकिन शांति नहीं थी। इसी अशांति और बैचेनी के चलते उसने सीता हरण का अधर्म किया और देखते ही देखते सोने की लंका और खुद रावण अपने सारे कुल के साथ नष्ट हो गया। गलत तरीके से किया गया कोई भी काम चाहे वह धन कमाना भी क्यों न हो अशांति और पतन के मार्ग पर ही ले जाता है। जीवन में धन कमाना मुश्किल नहीं है। लेकिन मानवीय गरिमा के साथ दूसरों की मदद करना, आत्मिक शांति का मार्ग प्रशस्त करना और हर परिस्थिति में आनंदित रहने की चेष्टा करना अवश्य बहुत कठिन है। अब आप ही बताइए कि आप क्या कमाना चाहते हैं। धन या शांति।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-5647855369012125403?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/5647855369012125403/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/11/blog-post_27.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/5647855369012125403'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/5647855369012125403'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/11/blog-post_27.html' title='सब कुछ नहीं खरीद सकता पैसा'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-5815531613993985280</id><published>2009-11-24T07:41:00.000-08:00</published><updated>2009-11-24T19:46:34.035-08:00</updated><title type='text'>मेरा क्या दोष ........ ?</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;किसका विरोध?&lt;br /&gt;अंग्रेजी में शपथ लेने वालो से परेशानी नहीं, लेकिन भारत को एक सूत्र में पिरोती हिंदी में किसी ने शपथ ली तो उसको थप्पड़ मार दिया। वो भी कहाँ ... विधानसभा में। मौजूद सभी ने ध्रतराष्ट्र की भूमिका का निर्वाह किया और दू:शासनों ने राष्ट्रभाषा का चीरहरण करने में कोई कसार नहीं छोड़ी। विधानसभाओं में मारपीट नई बात नहीं हैं, लेकिन महाराष्ट्र विधानसभा में अबू आज़मी को बेइज्ज़त किया गया, वो दर्शाता हैं कि विरोध आज़मी का नहीं, बल्कि हिंदी का था। सवाल और भी हैं। क्या अपनी भाषा में बोलने का अधिकार महाराष्ट्र में छीन लिया गया हैं? कुछ एक उग्रवादी प्रवृत्ति वालो के चलते अब हिंदी बोलने का मतलब महाराष्ट्र और मराठी भाषा का अपमान मन जाएगा? जिस नए महाराष्ट्र के निर्माण का ख़म मनसे भर रही हैं, क्या उसकी प्राचीरें हिंदी कि 'चिता' पर कड़ी की जाएंगी? विरोध किसका हैं...हिंदी बोलने वाले का, या फिर राष्ट्रभाषा हिंदी का? &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;ताक पर संविधान&lt;br /&gt;संविधान की 16वीं अनुसूची के अनुसार किसी भी भाषा में कोई भी व्यक्ति शपथ लेने के लिए आज़ाद हैं। लेकिन विधानसभा में 13 विधायको को लेकर पहुंचे मनसे मुखिया राज ठाकरे ने पहले ही जाहिर कर दिया था कि शपथ केवल मराठी में ही ली जाएगी। अबू आज़मी ने 'नाफ़रमानी' कर दी और नतीजा पूरे देश ने देखा। इस सीनाजोरी, छिना-झपटी, मारपीट से मनसे क्या सन्देश देना चाहती हैं? ये भी साफ़ हैं और स्पष्ट ये भी हैं कि संविधान की मर्यादा और देशप्रेम की भावना से ज्यादा महत्त्व मतलब और क्षेत्रीयता की राजनीती को मिल रहा हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आगे क्या होगा?&lt;br /&gt;क्षेत्रवाद की जो तस्वीर महाराष्ट्र में पेश की गई हैं. उसके नतीजे क्या होंगे, ये मुश्किल सवाल नहीं हैं। देश के आतंरिक विखंडन की आधारशिला को मजबूत करने वाली इन घटनाओं के चलते विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश लड़खड़ा सकता हैं। 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' तो पाषण कालीन परंपरा थी। इसे लोकतांत्रिक वातावरण में प्रश्रय क्यों दिया जा रहा हैं। भस्मासुरों की ये प्रवत्तियां देश की आत्मा में समाई अनेकता में एकता की जड़ो को खोखला करने में कसार बाकी नहीं रखेंगी। एक राज्य में उत्तर भारतीयों के भय के साए में रहना पड़ रहा हैं। भय का जहर दूसरो में नहीं फैलेगा, इसका दावा कैसे किया जा सकता हैं?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इजाजत कौन देगा?&lt;br /&gt;महाराष्ट्र में अभिव्यक्ति का अधिकार कौन देगा? सवाल उठना लाजमी हैं। फिल्मो के प्रदर्शन पर भयवश रोक लगा दी जाती हैं, माफ़ीनामे के बाद जैसे-तैसे गाड़ी खिंचती हैं। स्वतंत्र देश के संविधान में तमाम मौलिक अधिकारों के बावजूद में चलने-फिरने, सांस लेने और बोलने के लिए 13 विधायको वाली मनसे से इजाजत लेनी होगी? सत्ता, शासन व प्रशासन भी इसे मूक सहमती देगा, केवल इसलिए कि 'किंग मेकर' खुश रहे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कब सबक लेंगे?&lt;br /&gt;परेशानी की बात ये हैं कि हमें भूलने की आदत हैं। कश्मीर और पंजाब के जख्मो पर आज भी मरहम की आवश्यकता पड़ती हैं। भूल गए हैं इसलिए नेजो पर धार दी जा रही हैं और शारीर के दुसरे हिस्से पर ज़ख्म दिए जा रहे हैं। हिंदी की विशेषता उसकी ग्राहता में हैं। किसी भी दूसरी भाषा से ज्यादा लोग इसे समझते-बोलते हैं। महाराष्ट्र में ही हिंदी भाषियों की तादाद कम नहीं हैं। नागपुर, नासिक या पूना के लोग मराठी और हिंदी पर समान अधिकार रखते हैं। सचिन तेंदुलकर, लता मंगेशकर भी हिंदी बोलने में माहिर हैं। फिर इस राजनीती का मुद्दा क्यों बनाया जा रहा हैं। एक इसे ख़त्म कने के नाम पर 'नाम' कमा रहा हैं, तो दूसरा इसे बचाने की कोशिश का दम ठोंक रहा हैं। पंजाब में भिंडारवाले, असं में उल्फा और जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों को ठंडा हुए ज्यादा अरसा तो गुजरा नहीं हैं फिर इतनी जल्दी हम कैसे भूल रहे हैं?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राजू-अबू : पुराणी हैं दुश्मनी&lt;br /&gt;शिवसेना के मुखिया बाल ठाकरे के मुताबिक मामला पहले से तय था। राज ने फरमान जारी किया था और अबू को नाफ़रमानी करनी ही थी। नुक्सान कोई नहीं था अलबत्ता फायदा दोनों को पहुंचना था। राज और अबू के बीच की लड़ाई कोई नई नहीं हैं। पिछले साल राज ने उत्तर भारतीयों के खिलाफ अभियान शुरू किया और मराठी मानुष का नारा बुलंद किया। आगजनी, तोड़फोड़, मारपीट के बाद सैकड़ो की तादाद में उत्तर भारतीयों को जमीन तलाशनी पड़ी। उत्तर भारतीयों के 'तारहरण' बनने की कोशिश में अबू आज़मी ने कहा कि वो मनसे कार्यकर्ताओं से लोगो को बचाने के लिए लाठिया बाटेंगे। अगर अबू आज़मी ने बाल ठाकरे के खिलाफ कोई भी बयान दिया तो हम उन्हें मुंबई छोड़ने पर मजबूर कर देंगे। ठाकरे लाखो लोगो के लिए भगवान् हैं और उनके खिलाफ एक भी शब्द बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।&lt;br /&gt;बाल नंदगाओकर, मनसे लीडर &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आज़मी को विधानसभा में पीटना निंदनीय हैं। ये ऐसी हरकत हैं जो मनसे के तालिबानियों की राह पर चलने का प्रतीक हैं। तालिबानी और चरमपंथी ऐसा करते हैं। कल्याण सिंह, निर्दलीय विधायक, एटा&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज़मी और उसके जैसी हरकत करने वालो को शिवसेना के सिंकी तंदूरी बना देंगे। अगर किसी ने भी मराठी अस्मिता से खिलवाड़ किया तो उसका भी वही हश्र होगा।&lt;br /&gt;बाल ठाकरे, शिवसेना प्रमुख&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह बेहद शर्मनाक हैं, इसकी जितनी निंदा की जाए कम हैं। इससे देश बंट जाएगा। प्रधानमंत्री को इस मामले पर सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए।&lt;br /&gt;लालू प्रसाद यादव, राजद प्रमुख&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा हैं। देश के हर नागरिक का कर्त्तव्य हैं कि इसके सम्मान की हर हाल रक्षा करे। राज ठाकरे देश को बांटने की राजनीती कर रहे हैं और उन पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए। मुलायम सिंह यादव, सपा अध्यक्ष&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सिर्फ विधायको का निलंबन इलाज नहीं हैं। एम.एन.एस. जैसे पार्टियों की मान्यता रद्द होनी चाहिए और सख्त कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए।&lt;br /&gt;शरद यादव, जदयू अध्यक्ष &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-5815531613993985280?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/5815531613993985280/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/11/blog-post_24.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/5815531613993985280'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/5815531613993985280'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/11/blog-post_24.html' title='मेरा क्या दोष ........ ?'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-1715797001311107610</id><published>2009-11-15T12:18:00.000-08:00</published><updated>2009-11-15T00:32:16.800-08:00</updated><title type='text'>शिवराज के कार्यकाल में ही बच्चों के प्रति अपराधों का ग्राफ बढा !</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:courier new;font-size:130%;"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5404242867722204994" style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 177px; CURSOR: hand; HEIGHT: 178px" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/Sv-6QVqFN0I/AAAAAAAAAWw/fiGiShktlMc/s200/2.jpg" border="0" /&gt;स्वर्णिम मध्यप्रदेश का एक सच यह भी आज के बच्चे कल भविष्य हैं उन्हें अच्छी शिक्षा दी जाए, तो वे भटक नहीं सकते लेकिन मध्यप्रदेश में बच्चों की कहानी कुछ और ही हैं। जब से प्रदेश में भाजपा सतारूढ़ हुई है तभी बच्चों के प्रति अपराध का ग्राफ बढ़ा हैं। एक तरफ जहां भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय पंडित जवाहर लाल नेहरू के बच्चों के प्रति रेत्रह को अक्सर प्रदर्शित किया जाता है, वहीं मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार, खासकर स्वर्णिम मध्यप्रदेश बनाने की घोषणा करने वाले शिवराज सिंह चौहान यह भूले जाते हैं कि उनके कार्यकाल वर्ष २००६ से बच्चों के प्रति अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ा हैं। बच्चों को सर्व शिक्षा अभियान के तहत मुफत शिक्षा, मध्यांह भोजन, गणवेश, सायकल वितरण जैसी योजनाएं प्रारंभ कर शिवराज सिंह चौहान ने अपने पिछले ढाई वर्ष के कार्यकाल में काफी वाह - वाह लूटी है, हालांकि इनमें भ्रष्टाचार के आरोप लगे है। वहीं तस्वीर का दूसरा पहलू है बच्चों पर होने वाला उत्पीड़न, उनके प्रति बढ़ते अपराध। इसी वर्ष २० जुलाई २००९ को विधान महेन्द्र सिंह ने बच्चों के प्रति अपराधों के बढ़ने का सवाल किया तब तत्कालीन गृहमंत्री जगदीश देवड़ा ने स्वीकार किया कि वर्ष २००७ में बच्चों के प्रति ४२९० अपराध घटित हुए हैं। इसी वजह से प्रदेश का देश में पहला स्थान है। वर्ष २००८ में ४२५९ अपराध घटित हुए, परन्तु इस वर्ष भी प्रदेश का देश में पहला स्थान कहना इसलिए संभव नहीं, क्योंकि क्राइम इन इंडिया की रिपोर्ट का प्रकाशन नहीं हुआ हैं। कहने का आशय, राज्य के गृहमंत्री ने स्वंय स्वीकार किया है कि शिवराज सिंह के मुख्यमंत्री रहते बच्चों के प्रति अपराध में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर था। अब यदि भाजपा सरकार के जुलाई २००९ से पहले के ६ माह का बच्चों के प्रति अपराध का ग्राफ देखे तो २१९३ घटनाए हुई हैं। इनमें भोपाल पहले नम्बर पर है जहां १७४ घटनाएं हुई हैं। जबकि छिंदवाड़ा में १६१तथा इंदौर १२३ घटनाएं पंजीबद्व हुई हैं। अन्य जिलों उज्जैन में ११७, सतना में १०८, शिवपुरी में ८६, ग्वालियर में ८३, शाजापुर व भिंड में ७७ - ७७, सागर में ७६, &lt;/span&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/Sv-5yxPfiaI/AAAAAAAAAWo/PMV0n64QZUs/s1600-h/1.jpg"&gt;&lt;span style="font-family:courier new;font-size:130%;"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5404242359730801058" style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 124px; CURSOR: hand; HEIGHT: 200px" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/Sv-5yxPfiaI/AAAAAAAAAWo/PMV0n64QZUs/s200/1.jpg" border="0" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;बैतूल में ६८, राजगढ़ व विदिशा में ६७ - ६७, शहडोल में ६१बालाघाट में ६०, मुरैना में ५९, राजगढ़ व मंडला में ५८ - ५८ जबलपुर में ५७, होशंगाबाद में ५५, दमोह व नरसिंहपुर में ५३ - ५३,कटनी व खरगोन में ५० - ५० दतिया में ४९, टीकमगढ़ व खंडवा में ४६ - ४६ सीहोर में ४५, पन्ना में ४० सीधी में ३९, छतरपुर में ३८, अशोक नगर में ३७, झाबुआ में ३५, रतलाम व धार में ३२ - ३२, उमरिया में २९, सिंगरौली व बड़वानी में २६ - २६, डिडौरी में २२ अपराध पंजीबद्व किए गए। इसी तरह अनुपपूर में १९ नीमच में १६ बुराहनपुर में १५, देवास में १४, अलीराजपुर में १० मदंसौर में ३ और श्योपूर में २ अपराध पंजीबद्व हैं। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-1715797001311107610?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/1715797001311107610/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/11/blog-post_15.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/1715797001311107610'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/1715797001311107610'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/11/blog-post_15.html' title='शिवराज के कार्यकाल में ही बच्चों के प्रति अपराधों का ग्राफ बढा !'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/Sv-6QVqFN0I/AAAAAAAAAWw/fiGiShktlMc/s72-c/2.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-1894133409001713507</id><published>2009-11-10T16:10:00.000-08:00</published><updated>2009-11-10T04:13:28.011-08:00</updated><title type='text'>बुक्सा जनजाति में शादी के लिए आज भी खरीद जाती हैं कन्याएं</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SvlYhJxL8eI/AAAAAAAAAWg/zdKxaKN-M9o/s1600-h/1.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5402446554588770786" style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 200px; CURSOR: hand; HEIGHT: 128px" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SvlYhJxL8eI/AAAAAAAAAWg/zdKxaKN-M9o/s200/1.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt; &lt;span style="font-family:arial;font-size:130%;"&gt;उत्तराखंड के नैनीताल, पौड़ी गढ़वाल और देहरादून की ग्रामीण बस्तियों में निवास करने वाली बुक्सा जनजाति में विवाह करने के लिए आज भी कन्या को ख़रीदा जाता हैं। इसका कारण यह हैं कि इस जनजाति में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या काफी कम हैं। बुक्सा जनजाति की कन्या विवाह से पहले परिवार के आर्थिक उत्पादन में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं लेकिन विवाह के बाद कन्या पक्ष कन्या के सहयोग से मिलने वाले लाभ से वंचित हो जाता हैं जिसकी भरपाई के रूप में कन्या का पिटा कन्या का मूल्य पाने का अधिकारी माना जाता हैं। यह राशि विवाह से पहले वर पक्ष कन्या पक्ष को देता हैं।जिसे माल्गति कहा जाता हैं। इस जनजाति में पुरुष का विवाह तभी संभव हैं जब उसके पास खेती के लिए इतनी भूमि हो कि वह अपना तथा अपने परिवार का भरण-पोषण कर सके। यह भी महत्वपूर्ण बात हैं कि इस जनजाति में विवाह अपेक्षाकृत अधिक उम्र में किये जाते हैं। कन्या के विवाह के की उम्र अमूमन १८-२० और वर की उम्र २०-२४ वर्ष होती हैं। अंतर जातीय और बहिर्गोत्रिय विवाह की प्रथा इस आदिवासी समाज में प्रचलित हैं।&lt;br /&gt;इनमे रक्त संबंधियों के बीच विवाह नहीं होता और एक ही गाँव में भी विवाह निषिद्ध हैं। इनमे दहेज़ प्रथा भी प्रचलित है,जो साधारणत: वस्त्राभूषण आदि के रूप में दिया जाता हैं। बुक्स जनजाति में विवाह विच्छेद सुविधा हैं, लेकिन विवाह विच्छेद नहीं के बराबर हैं। इसकी कई वजह हैं। क्रय विवाह में जिस कन्या को धन देकर ख़रीदा जाता हैं उसे छोड़ने का मतलब प्रत्यक्ष आर्थिक क्षति हैं। इसलिए कोई भी पति आसानी से अपनी विवाहिता को तलाक़ नहीं दे सकता। इस जनजाति में बहुपत्नी प्रथा का प्रचालन भी नहीं हैं। इसकी वजह यह हो सकती है कि इस समाज में पुरुषों की संख्या स्त्रियों के काफी अधिक हैं। इसलिए विवाह विच्छेद के बाद पुरुष का विवाह कठिन हो जाता हैं। इनमे विधवा का विवाह तो आसानी से हो जाता हैं लेकिन विधुर का विवाह सरलता से नहीं हो पाता हैं। पत्नी के सम्बन्ध तोड़ने पर पूर्व पति उसके पिता या नए पति से क्षतिपूर्ति की मांग कर सकता हैं और यदि पत्नी पति को छोड़ दे तो उसके पिता को मालगति वापिस करनी पड़ती हैं। सन् १९९१ की जनगणना के अनुसार बुक्स जनजाति की कुल आबादी ४२०२७ हैं और इसका ६० प्रतिशत भाग नैनीताल जिले के विभिन्न विकासखंडो में निवास करता हैं। जिन क्षेत्रो में यह जनजाति बसी हैं उसे भोक्सर कहते हैं। इनकी भाषा हिंदी और कुमाउंनी का सम्मिश्रण हैं लेकिन जो लोग पढ़ना-लिखना जानते हैं वे देवनागरी लिपि का ही प्रयोग करते हैं।बुक्सा जनजाति की उत्पत्ति के विषय में ब्रिटिश इतिहासकार विलियम क्रुक ने बताया हैं कि यह अपने को राजपूतो का वंशज मानती हैं लेकिन कुछ लोगो का कहना हैं कि इस जनजाति के लोग दक्षिण से आये जबकि कुछ का मत है कि ये उज्जैन में धार नगरी के मूल निवासी थे। कुछ इतिहासकारों का अनुमान हैं कि देश पर मुगलों के आक्रमण के समय चित्तोड़ की राजपूत जाति की अनेक स्त्रियाँ निम्न वर्ग के अनुचरों के साथ भाग आई और उन्होंने तराई क्षेत्र में शरण ली। बुक्सा जनजाति के लोग उन्हीं के वंशज हैं। शायद इसीलिए इस जनजाति की पारिवारिक योजना में स्त्रियों की प्रधानता हैं और पुरुषों को अब भी घर के बाहर भोजन करना पड़ता हैं। बुक्सा जनजाति में पिता के नाम पर वंश चलता हैं। परिवार का ज्येष्ठ पुरुष मुखिया होता हैं और असीमित अधिकारों के साथ एक निरंकुश शासक की तरह काम करता हैं। उसके आदेश का परिवार के सभी लोगो को पालन करना पड़ता हैं। परिवार की समस्त आमदनी उसी को सौंपी जाती हैं जिसे वह उचित समय पर व्यय करता हैं। इस आदिवासी समाज में संयुक्त और वैयक्तिक दोनों प्रकार के परिवार पाए जाते हैं। परिवार के सभी सदस्य खेती करते हैं और खेती पर सभी का अधिकार माना जाता हैं। बदलते दौर में अब बुक्सा जनजाति में भी संयुक्त परिवारों का स्थान एकल परिवार लेते जा रहे हैं। हालाँकि इन परिवारों में पुरुषों की प्रधानता हैं लेकिन स्त्रियाँ भी कम महत्वपूर्ण स्थान नहीं रखती है। परिवार में उनकी बात अधिक मानी जाती हैं। अशिक्षित होते हुए भी इस जनजाति की महिलाओ में पर्दा प्रथा बिलकुल नहीं हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-1894133409001713507?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/1894133409001713507/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/11/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/1894133409001713507'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/1894133409001713507'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/11/blog-post.html' title='बुक्सा जनजाति में शादी के लिए आज भी खरीद जाती हैं कन्याएं'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SvlYhJxL8eI/AAAAAAAAAWg/zdKxaKN-M9o/s72-c/1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-6183493022952621694</id><published>2009-10-14T08:31:00.000-07:00</published><updated>2009-10-13T20:39:43.570-07:00</updated><title type='text'>भुल जाओ गुजिये ........</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5392294878256804818" style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 200px; CURSOR: hand; HEIGHT: 200px" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/StVHn0ans9I/AAAAAAAAAWY/Doj64ayFeC0/s200/untitled.JPG" border="0" /&gt;&lt;span style="font-family:times new roman;font-size:130%;"&gt;दिपावली देश का वह सबसे बड़ा त्यौहार है, जिसमें हर घर में मीठा बनाया जाता है साथ ही परम्परा अनुसार मिठाई एक - दूसारों के घर भेजी भी जाती है। इस त्यौहार पर मिठाईयों का बड़ा कारोबार भी होता है और देश के दुश्मनों ने इस बार इन मिलावट खोरों को निज स्वार्थ ने इतना गिरा दिया है कि इन्हें देश जनता के स्वाथ्य की भी चिन्ता नहीं है। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इन मिलावटखोरों के खिलाफ शासन भी हार मान बैठे है। खाघ निरीक्षकों के अपर्याप्त पदों के रहते पहले ही काम में चुस्ती नहीं लाई जा सकती थी ऊपर से दिन प्रतिदिन बढ़ती मिलावट खोरी के यह समस्या और बड़ी होती जा रही है। शासन ने २८० खाघ निरीक्षकों के पद स्वीकृत हैं जिनमें सिर्फ २०२ पदों पर ही खाघ निरीक्षक सेवा में है शेष पद रिक्त हैं। जबकि प्रदेश की आबादी लगभग ७ करोड़ के आसपास है तब मात्र २०२ पद इस मिलावटी लोगों के खिलाफ क्या कर पायेंगे। नही खाघ एवं औषधि नियंत्रण विभाग के पास पर्याप्त संसाधनों की व्यवस्था ही है। शासन - प्रशासन की कमियों का मिलावट खोर भरपूर फायदा उठाते हैं। हमारे कानून की लचर व्यवस्था में भी इनके लिए कोई कठोर सजा का प्रावधान भी नहीं है। फिर लंबी चलने वाली न्याय व्यवस्था का भी यह भरपूर फायदा उठाते हैं। विदेशी टाफियों ने काफी हद तक वैसे भी भारतीय मिठाईयों में सें धमारी कर ली हैं कुछ मीठा हो जाये का विज्ञापन करते सदी का महानायक जब त्यौहारों पर इससे मुंह मीठा करने की बात करता है और अपने बेटे की शादी में बताशों की जगह निमंत्रण पत्र के साथ के साथ केटबरी की टॉफी भेजता है तब सच लगने लगता है कि अब इस देश की संस्कृति मिठास में विदेशी कीड़े लग चूके हैं। बचा - खुचा काम मिलावट खोरों ने कर दिया जिससे लोग मजबूरन इन विदेशी कंपनियों की मिठास से ही मुंह मीठा करने में ही अपना भला समझेंगे। इन सबके चलते भारतीय महिलाओं के लिए खुशखबरी भी है कि उन्हें त्यौहारों पर परिश्रम करने की जरूरत नहीं, सेलिब्रेशन का आधूनिक ढंग अपनाएं और त्यौहार पर सजधज कर तैयार रहें। चीनी ड्रेगन की सजावटी मालाओं चमचमाती झिलमिलाती लड़ों के बीच बीच इस भारतीय पुरातन त्यौहार को अब हम विदेशी मिठाईयों के साथ मनाएंगे। आने वाले समय के लिए कुछ देशी मिठाईयों की तस्वीरों को जरूर सहेज कर रखना होगा जिससे आने वाली पीढ़ी के बच्चों को बता सके कि इसे देश में भी मिठाईयां बनाई जाती थी।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-6183493022952621694?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/6183493022952621694/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/10/blog-post_13.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/6183493022952621694'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/6183493022952621694'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/10/blog-post_13.html' title='भुल जाओ गुजिये ........'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/StVHn0ans9I/AAAAAAAAAWY/Doj64ayFeC0/s72-c/untitled.JPG' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-6509094289979735025</id><published>2009-10-03T08:16:00.000-07:00</published><updated>2009-10-02T20:27:52.971-07:00</updated><title type='text'>साबरमती के संत के नाम सोने का पेन</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5388209909260298130" style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 160px; CURSOR: hand; HEIGHT: 200px" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SsbEXVCzJ5I/AAAAAAAAAWQ/Byj0M_KM3Cw/s200/mahatma+gandhi.jpg" border="0" /&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;&lt;span class=""&gt;महात्मा&lt;/span&gt; गांधी जो आधी धोती और खड़ाऊ में दुनिया घूम आए। एसेसरी के नाम पर कमर में लटकाने वाली घड़ी ,चश्मा और एक लकड़ी जिनकी कीमत कुल मीलाकर उस समय शायद दस - पंद्रह रू. से ज्यादा न होगी। हाथ से सूत कातने वाला महात्मा गांधी,खुद अपने हाथों से झाडू , साफ - सफाई करने वाला महात्मा गांधी, सादगी का प्रतिमान महात्मा गांधी आज फैशन के बाजार में आ पहुंचा है। जिस महात्मा गांधी वाक्स थे कि जिस देश में लाखों भूखें - नंगे रहते हों उस देश के लोग कैसे शरीर पर सोना पहन सकते हैं ? आश्चर्य होता है। उसी महात्मा गांधी के नाम पर क्लासिक कलम बनाने वाली विख्यात कंपनी ''मोब्ला'' भारत में अंग्रेजी राज द्वारा नमक कर लगाने पर ''नमक कर'' के खिलाफ महात्मा गांधी की ''दांडी मार्च'' से प्रेरित होकर महात्मा गांधी लिमिटेड एडिशन २४१ ब्रांड कलम सोने के तार के साथ निकल रहा है, जिससे चरखे के धागे से बुने कपड़े के स्पर्श का सा अनुभव होगा। सोने के तार,महात्मा गांधी के चरखे का सुत का आपको अनुभव देगे। रेडियम पालिश वाले १८ केरेट की सोने की नीब होगी, जिसमें लाठी पकड़े महात्मा गांधी की आकृति अंकित होगी। जो महात्मा गांधी सादगी का पूरजोर समर्थक ही नहीं, बल्कि साक्षात उदाहरण थे, उनके नाम पर यूं सोने, चांदी के पैन बनाने वालों ने कभी सोचा कि महात्मा गांधी एक साधारण कलम से पेपर के दोनों ओर लिखते थे,जिससे पेपर की भी बचत हो सकें। ऐसे महात्मा गांधी की आत्मा को क्यों दुःख दिया जाए। दुनिया भर के पूंजीपति अगर महात्मा गांधीको सच्ची श्रद्वा करते हैं और महात्मा गांधी के आदर्शों पर चलने की सोचते हैं,तो उनका पहला कदम महात्मा गांधी की दांडी यात्रा के साथ होना चाहिए दुनिया से गरीबी हटाना, हिंसा रोकना,युद्व विहिन, हथियार विहिन संसार का निर्माण करना। अगर महात्मा गांधी के नाम के साथ आगे आना चाहते हैं तो अंधी परम्पराओं को तोड़ आत्म ज्ञान से नाता जोड़कर सदाचार और अहिंसा परमोधर्म से दुनिया को जोड़ने का काम करें न कि सोने - हीरे - जवाहरात के महात्मा गांधी नामी पैन सिक्के निकाल उनके नाम पर व्यापार करें। महात्मा गांधी को पहले नेताओं ने भूनाया फिर कुछ दुकानदार टाईप लोगों ने, अब महात्मा गांधी के साथ जबकि ओबामा जैसी शख्सियत डिनर करना चाहती है, तो बड़े उघोगपतियों की नजर महात्मा गांधी नाम के उस हीरों पर आ टिकी है, जिसे प्रचार की जरूरत नहीं,हाथों - हाथ उनका माल बिक जाएगा और महात्मा गांधी को भी मॉडल बनाने की कीमत नहीं देनी होगी।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-6509094289979735025?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/6509094289979735025/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/10/blog-post.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/6509094289979735025'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/6509094289979735025'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/10/blog-post.html' title='साबरमती के संत के नाम सोने का पेन'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SsbEXVCzJ5I/AAAAAAAAAWQ/Byj0M_KM3Cw/s72-c/mahatma+gandhi.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-1051429156904381140</id><published>2009-09-25T08:25:00.000-07:00</published><updated>2009-09-24T20:39:54.372-07:00</updated><title type='text'>कब आएगी बहार वीराने में ?</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/Srw5EglYzhI/AAAAAAAAAWA/R6HvugE4tDg/s1600-h/13.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5385242004057280018" style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 200px; CURSOR: hand; HEIGHT: 142px" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/Srw5EglYzhI/AAAAAAAAAWA/R6HvugE4tDg/s200/13.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;आजादी के छ : दशक पार करने के बाद भी देश को गरीबी के बंजर से निजात नहीं मिल पायी है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र ने कितने हीकीर्तिमान क्यों न गढ़े हों, लेकिन हकीकत यही है कि आज भी देश में अस्सी प्रतिशत लोग बीस रूपए से भी कम की दैनिक आमदनी में जीवन - यापन कर रहे हैं। ये ऐसा बंजर है, जहां खुशहाली की लहलहाती फसल का सपना देखने वाली आंखें इसके इंतजार में बूढी हो गई, लेकिन खुशहाली का वो मंजर उन्हे ताउम्र नजर नहीं आया। दौर आए और गए, मगर गरीबी का बदस्तूर आज भी जारी है। बढ़ती महंगाई ने भी आम आदमी की कमर तोड़ रखी है। देश में कांक्रीट का जंगल भले ही बढ़ रहा हो, लेकिन इस सच्चाई को झुठलाया नहीं जा सकता कि दुनिया की सबसे बड़ी झोपड़पटी भी हमारी आर्थिक राजधानी मुंबई के धारावी में ही है। इस गरीबी के दलदल में जीने वाले करोड़ों लोगों की आंखों में भी सपने पलते है। यो बात और है कि वो इन सुखद सपनों को यथाथ के धरातल पर नहीं ला पाते, लेकिन दो वक्त की रोजी का जुगाड़ करने वाला गरीब आंखों में ये सपने लिए जीभर के सोता है। देश तरक्की कर रहा है और यह भी संभव है कि विकाससशील देशों की श्रेणी में आने वाल भारत विकासित देशों की श्रेणी में भी आ जाए, लेकिन गरीब की आंखों में पलने वाले सपनों को मूर्तरूप दे पाने में हमें कितना वक्त लगेगा यह एक अबूझ पहेली ही जान पड़ती है। &lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/Srw5_oRzwPI/AAAAAAAAAWI/wv4_5RZ84KI/s1600-h/14.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5385243019734925554" style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 123px; CURSOR: hand; HEIGHT: 200px" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/Srw5_oRzwPI/AAAAAAAAAWI/wv4_5RZ84KI/s200/14.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;जिस तरह गरीबी को परिभाषित करने के कई तरीके हैं, उसी प्रकार गरीबी के बारे में कई तरह के आंकड़े भी हैं। अर्थशास्त्री और राज्यसभा के सदस्य अर्जुन सेनगुप्ता का एक स्टेटमेंट था कि भारत में ऐसे ८३.६ करोड़ लोग हैं जो रोजाना २० रूपये से भी कम पर गुजारा करते हैं, उस हिसाब से देश की ७७ फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे थी। अब यह आंकड़ा अंस्सी को पार कर गया है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त कमिश्नर की हैसियत से काम करने वाले अवकाश प्राप्त नौकरशाह एन.सी.सक्सेना ने हाल ही में गरीबी के जो नए आंकड़े पेश किए हैं, उनके अनुसार देश की कुल आबादी में से १.१५ अरब लोग गरीबी रेखा के नीचे हैं। इसका मानक ग्रामीण इलाकों में प्रति व्यक्ति आय ७०० रू प्रतिमाह और शहरी इलाकों में १००० रू प्रतिमाह बताया गया है।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;क्या है पैमाना :- विश्व बैंक के गरीबी निर्धारित करने के पैमाने के मुताबिक १.२५ डॉलर प्रतिदिन की आय प्राप्त करने वाले को गरीब माना जाता है। विश्व बैंक के अनुसार भारत में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोग २००५ में ४२ प्रतिशत थे, जो आज ५० प्रतिशत के करीब पहुंच चुके हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;पैमाने के निर्धारक :- वास्तव में गरीबी और गरीबी रेखा को तय करने वाले लोगों की ओर नजर दौड़ाई जाए तो हकीकत सामने होगी। हमारे साथ यह विडंबना है कि निर्धारक किस आधार पर ये पैमाना तय करते हैं। कभी प्रति व्यक्ति आय इसका आधार होती है तो कभी जीडीपी। इस मामले में विशेषज्ञों और सरकारी आंकड़ों में असमानता दिखाई देती है, लेकिन सच्चाई को आकड़ों से झुठलाया नहीं जा सकता। गरीबी का आधिकारिक आंकड़ा चार दशक पहले तैयार किया गया था और यह भोजन की जरूरत पर होने वाली लागत पर आधरित था। आधिकारिक आकलना अब उपयोगी नहीं रह गया है। दूसरी ओर यह तर्क दिया जा सकता है कि गरीबी के आंकडे लंबी अवधि के संकेतक के तौर पर उपयोगी हैं, लिहाजा इन्हें अस्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। चाहे गरीबी को फिर से पारिभाषित करते हुए इसमें शिक्षा व स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच नहीं रखने वालों को शामिल किया जाए। समस्या यह है कि ये आंकड़े परस्पर असंगत हैं। अगर एक अनुमान सही है तो फिर अन्य अनुमान गलत होने चाहिए। एनसीएईआर ने अनुमान लगाया है कि २००९ - १० में आधे भारतीय परिवार अब ७५०० रू. प्रति माह ( २००१ - ०२ की कीमत पर ) से ज्यादा रकम पर जीवन यापन कर रहे हैं। महंगाई को समायोजित करने के बाद आज यह ११००० रू. प्रति माह बैठता है। यह मानते हुए कि औसत परिवार में पांच सदस्य होते हैं, ५० फीसदी भारतीय २००० रूपये मासिक प्रति व्यक्ति आय पर जी रहे हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;विश्व बैंठ की रिपोटे :- विश्व बैंक द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में गरीबी, जितनी सरकार द्वारा बताई जाती है। अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि भारत के कई लोगों की सालाना तनख्वाह सरकार की आधिकारिक गरीबी रेखा से कहीं अधिक बताई जाती है, लेकिन बावजूद इसके लोगों को अपनी मूलभूत आवश्कताओं को पूरा करने के लिए जरूरी आमदनी की रकम को जिस प्रकार सरकार ने निर्धारित किया है, आम लोगों के उससे कहीं ज्यादा पैसे लगते हैं। इस आधार पर विश्व बैंक का मानना है कि भारत में गरीबी रेखा के नीचे कहीं ज्यादा लोग हैं। जहां तक भारत में आमदनी की बात है, इस रिपोर्ट के अनुसार भारत का एक तिहाई हिस्सा आज भी दिन में एक डॉलर यानि ५० रूपये से कम कमाता है। साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के लगभग सभी हिस्सों में लोग गरीबी की रेखा से नीचे रहते हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-1051429156904381140?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/1051429156904381140/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/09/blog-post_24.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/1051429156904381140'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/1051429156904381140'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/09/blog-post_24.html' title='कब आएगी बहार वीराने में ?'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/Srw5EglYzhI/AAAAAAAAAWA/R6HvugE4tDg/s72-c/13.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-695185989850885355</id><published>2009-09-22T08:02:00.000-07:00</published><updated>2009-09-21T20:07:27.416-07:00</updated><title type='text'>बाजार में सच का सामना</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/Srg--JhayhI/AAAAAAAAAV4/IF4m6w3pwCs/s1600-h/12.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5384122591950326290" style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 161px; CURSOR: hand; HEIGHT: 200px" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/Srg--JhayhI/AAAAAAAAAV4/IF4m6w3pwCs/s200/12.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-family:courier new;font-size:130%;"&gt;सच का सामना इन दिनों एक टीवी चैनल पर आ रहा कार्यक्रम - सच का सामना,खासी चर्चा ओं में है। कई तरह के सवालों के साथ इसे नैतिकता के खिलाफ और पक्ष में बताने वाले लोगों के वर्ग खड़े हो गए हैं। मीडिया में बहसें हो रही हैं और कुछ लोग इसे रोकने के लिए कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा रहे हैं। इस सबके बीच शायद इसकी असलियत तक पहुंचने की जरूरत और समझ गुम हुई जा रही है। सबसे पहली बात यह की मीडिया को इस सीरीयल के महिमामंडन या खालिस निदां से ऊपर उठकर आम आदमी को यह बात समझाने की कोशिश करनी चाहिए थी कि इसमें न कोई सच है न ही किसी को इसका सामना करना पड़ता है, इस पूरे झमेले में यदि कोई बात सच है तो वह है बाजार। यह बाजार का सच है या यूं कहें कि यह बाजारू होता सच है। यह सीरीयल साल २००८ में अमेरिका में प्रसारित धरावाहिक द मोमेंट आफ ट्रथ का भारतीय संस्करण है। यहां यह बात गौरतलब है कि अमेरिकी समाज की भारतीय समाज से बुनियादी तौर पर कोई समानता नहीं है। अमेरिकी समाज हमेशा से ही पूंजी ही समाज के केंद्र में रही है, यह समाज सफलता को ही सच मानता है। इस समाज का आदर्श यह कभी नहीं रहा कि क्या कहा जा रहा है, इसका आदर्श रहा है कि कौन कह रहा है। यदि सफल आदमी कोई बात कहता है तो वह भले ही दो कौड़ी की हो, उसकी कोई भी सामाजिक उपयोगिता न हो लेकिन उसे बड़े ही ध्शन से सुना जाता है। इसी प्रवृति के कारण वहां सफल लोगों की अंतरंग बातें ध्यान से सुनी जाती हैं, उनके सेक्स वीडियो टेप जारी होते हैं और ऐसे सेलेब्रिटी खुद अपनी फूहड़ और घटिया करतूतों का महिमागान करते देखे जा सकते हैं। किसी दार्शनिक ने कहा था कि अमेरिकी समाज सभ्य नहीं है। यह बर्बरता से सीधे विकसित अवस्था में आ गया है। इसके बीच की एक जरूरी सीढ़ी होती है सभ्यता जिसे वह गोल कर गया,इसलिए सभ्य समाजों के जरूरी संस्कार वहां मौजूद ही नहीं हैं। ऐसे अमेरिकी समाज के लोकप्रिय धारावाहिक का भारतीय संस्करण है सच का सामना। इसमें आने वाले सेलेब्रिटी प्रतिभागियों से पूछा जाता है शादी के पहले आपके शारीरिक संबंध थे ? शादी के बाद आपके शारीरिक संबंध रहे है ? क्या आपने कभी गर्भपात कराया है या आपने किसी महिला को अपने बच्चे का गर्भपात कराने के लिए कहा ? ऐसे ही सवालों के कारण यह सीरियल चर्चाओं में है। यह ध्यान देने वाली बात है कि इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों से कुल २२ सवाल पूछे जाते हैं, इनमें से कुछ सवाल ऐसे जरूर होते हैं जिनका संबंध सेक्स से होता है। यदि इन सवालों को कार्यक्रम से हटा दिया जाता है तो यह दूसरे कार्यक्रमों के समान ही हो जाएगा, इसीलिए इसे खास बनाने के लिए ऐसे सवाल इसमें शामिल किए गए हैं। इस सीरीयल के मुताबिक सेक्स ही सच की सबसे बड़ी कसौटी है। सेक्स से जुड़े ऐसे सवालों के जवाब जो भारतीय समाज में सहज नहीं माने जाते हैं, इस कार्यक्रम के आकर्षण की वजह हैं। उदाहरण के विनोद कांबली से उनकी पत्री की मौजूदगी में पूछा गया कि क्या उनके शादी से पहले किसी औरत से जिस्मानी ताल्लकात थे ? यह सवाल और इस पर विनोद की स्वीकारोक्ति ही ऐसी बातें हैं जिनमें इस कार्यक्रम की जान है। धड़कने बढ़ जाती हैं। यह मशीन इसी सिद्वांत पर काम करती है। लेकिन यह भी ध्यान देने की बात है कि ऐसा तभी होता है जब जब कुछ अचानक हो। यदि कोई व्यक्ति झूठ के प्रति बेहद सहज हो जाए तो उसे पकड़ पाना इस मशीन के बस की बात नहीं होगी, कयोंकि तब उसकी धड़कने सामान्य होंगीं। यह बात इस कार्यक्रम के प्रायोजक भी जानते हैं इसीलिए वे सच के लिए इस मशीन पर निर्भर नहीं हैं। जानकारों का मानना है कि दर असल होता यह है कि जिस सेलेब्रिटी की इस कार्यक्रम में शामिल होने की सहमति मिल जाती है उसमें जुड़ी कुछ ऐसी बातों के बारे में जानकारी हासिल कर ली जाती है जो लोगों के लिए जिज्ञासा का कारण बन सकती हैं। ये जानकारियां ऐसे सेलेब्रिटी के दोस्तों, रिश्तेदारों और कभी - कभी खुद उसी से मिल जाती हैं। जाहिर है कि जो बात एक तरह से जग जाहिर हो उसे ही पर्दे पर लाने के लिए मशीन के टोटके का इस्तेमाल किया जाता है ताकि लोगों में प्रामाणिकता की छाप छोड़ी जा सके। जो लोग कार्यक्रम के प्रतिभागी होते हैं वे भी जानते हैं कि उनके बारे में जानकारियां जुटा ली गई हैं इसलिए वे मशीन के सामने भी सहज होते हैं। कभी - कभी ऐसा हो सकता है कि कोई प्रतिभागी अपनी जिंदगी की अंतरंग बातों को पर्दे पर लाए जाने से अचानक घबराए और झूठ साबित कर देगा। इसमें इस मशीन की कोई भूमिका सही अर्थों में बिल्कुल नहीं होती। मशीन का कुल इस्तेमाल दर्शकों पर धाक जमाने के लिए ही किया जाता है। कुल मिलाकर यह सीरीयल जन - भावनाओं को भुनाने की नई कोशिश है लेकिन इसका सामाजिक प्रभाव बहुत गहरा हो सकता है। सेलेब्रिटी हमेशा से ही आम - आदमी के लिए रोल मॉडल रहे हैं। वे जो कहते और करते हैं उन्हें आम - आदमी अपने जीवन में उतारने की हर संभव कोशिश करता है, ऐसे में यदि उसके रोल मॉडल ही अनैतिकता और मुक्त सेक्स संबंधों की बात खुलकर करेंगे तो उनसे प्रभावित लोगों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, यह आसानी से समझा जा सकता है।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-family:courier new;font-size:130%;"&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;सिर्फ अनैतिकता है सच :- सवाल यह है कि जो बोला जा रहा है क्या वह सच ही है ? क्या ऐसा नहीं हो सकता कि जो बोला जा रहा है वह बाजार के इस रूख को भांप कर ही बोला जा रहा हो कि अनैतिकता ही आकर्षण का केंद्र है तो उसे ही बोला जाए, उसे ही अपना सच बताया जाए ? मामला बड़ा सीधा सा है। अब यदि आपने चोरी नहीं कि तो आप इस बाजार में कौड़ियों के मोल भी नहीं बिकेगी। यदि आप यह कह दें कि शादी के पहले या बाद में आपका किसी से अनैतिक संबधं नहीं रहे तो आप इस बाजार के नहीं, इसके कूड़ादान में फेंके जाने वाली चीज हैं। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:courier new;font-size:130%;"&gt;सच के टोटके :- इस कार्यक्रम में एक नई बात भी है जो लोगों को आर्षित कर रही है। इसमें पॉलीग्राफ मशीन इस्तेमाल किया गया है जो कार्यक्रम प्रायोजकों के मुताबिक झूठ पकड़ लेती है। इसी प्रचार के कारण आम - आदमी को इस कार्यक्रम पर बड़ा विश्रास है, कई तो ऐसे लोग हैं जो इसी कारण प्रायोजकों से ज्यादा वजनदारी से इस कार्यक्रम के सच की वकालत करते दिखाई देते हैं। लेकिन कुछ सवाल हैं जो इस मशीन और इस पूरे कार्यक्रम को मजबूत शक के दायेर में लाते हैं। पहला सवाल है मशीन की कार्यप्रणाली और क्षमता पर - ऐसा माना जाता है कि यह मशीन लाई डिटेक्टर यानी झूठ पकड़ने का काम करती है। यह सर्वमान्य बात है कि यदि कोई व्यक्ति झूठ बोलता है उसके हदय की&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:courier new;font-size:130%;"&gt;सीरीयल का मनोविज्ञान :- यह सीरीयल दरअसल भारतीयता के दो मूल्यों को अपनी तरह से भुनाने की कोशिश है। पहला नैतिकता और दूसरा सच। ये दोनों ही बातें हजारों सालों से भारतीय समाज की बुनियाद रही हैं। यदि कोई व्यक्ति नैतिकता के मापदंड पर खरा नहीं उतरता था तो उसे सामाजिक निंदा का पात्र बनना पड़ता था। अब ऐसी बात भले ही कम होती जा रही हो लेकिन किसी व्यक्ति का नैतिकता का उल्लंघन और फिर उसका स्वीकार लोगों को मनोवैज्ञानिक रूप से अजीब सा सुकून देता है, क्योंकि बकौल दुष्यंत - इस सिरे से उस सिरे तक सब शरीके जुर्म हैं, हर कोई अनैतिकता में कहीं न कहीं से शामिल है, मात्रा में भले ही भेद हो सकता है लेकिन शामिल जरूर है। तो इस सीरीयल का पहला मकसद आदमी को यह तृप्ती प्रदान करना है कि वह अकेला अनैतिक नहीं है, दूसरे लोग भी खासकर समाज के सफल लोग भी अनैतिक हैं। लोगों में तुष्टि की यह भावना जगाने के साथ ही यह सीरीयल इसमें शामिल प्रतिभागियों के प्रति सहानुभूति और सम्मान जगाने की कोशिश भी करता है। दर्शकों को लगता है कि देखो इसने कितनी हिम्मत से आखिर सच तो बोला।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-family:courier new;font-size:130%;"&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;नेता क्यों नहीं :- यदि सच परख इतनी आसान है तो देश के नेताओं को इस कार्यक्रम का हिस्सा बनाने की जुगत क्यों नहीं की जाती ? इसका कारण यह लगता जरूर है कि नेता इस कार्यक्रम में आना ही नहीं चाहेंगे लेकिन ऐसा है नहीं। ऐसा न होने के पीछेसबसे कारण है प्रामाणिकता का अभाव। यदि किसी नेता को कार्यक्रम में बुलाया गया तो यह पहले से ही तय बात होगी कि वह झूठ ही बोलेगा लेकिन उसे पकड़ने के लिए न ही तथ्यात्मक रूप से कोई जानकारी होगी और न ही पॉलीग्राफ मशीन उसे पकड़ पाएगी, ऐसे में कार्यक्रम का मकसद ही धरा रह जाएगा। इसीलिए नेताओं को इसमें नहीं बुलाया जाता। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-695185989850885355?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/695185989850885355/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/09/blog-post_21.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/695185989850885355'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/695185989850885355'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/09/blog-post_21.html' title='बाजार में सच का सामना'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><media:thumbnail 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में बदलाव की सूरत में मध्यप्रदेश के नेताओंको भी नए माहौल में ढलना होगा, जो एक चुनौती साबित होगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ की विदाई वेंकैया नायडू मजबूत होंगे वहीं उनके समर्थकों का कद यहां और बढ़ जाएगा। सता में मध्यप्रदेश के मंत्री बाबूलाल और कैलाश विजयवर्गीय का दबदबा बढ़ेगा क्योंकि कैलाश विजयवर्गीय और अरूण जेटली की छत्रछाया में ही आगे बढ़ रहे और अरूण जेटली से भी उनकी हैं। संगठन में नरेंद्र सिंह तोमर और कप्तान सिंह सोलंकी और अनिल दबे और राजनाथ सिंह ने बेहतर संबंध के चलते ही सांसद की दौड़ में शामिल हो पाए हैं वहीं प्रभात झा को संघ का वरद हस्त प्राप्त है। अब ये नेता गुणा भाग में जुटे हुए हैं। मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सबके चहेते बने हुए हैं। केंन्द्रीय राजनीति के कभी प्रमोद महाजन के करीब रहे आज लालकृष्ण आडवाणी और राजनाथ सिंह दोनों के विश्र्रास पाप्त हैं। सुषमा स्वराज और अरूण जेटली से भी उनकी नजदीकियां है। सुषमा स्वराज केंन्द्रीय मजबूत होते ही मध्य प्रदेश की राजनीति में और असरदार साबित होंगी। राज्यसभी के बहाने मध्य प्रदेश में दाखिल हुई सुषमा स्वराज अब प्रदेश की सबसे बडी+ नेता बन गई है। लोकसभा में मध्य प्रदेश से ही प्रवेश पाई। उपनेता प्रतिपक्ष बनी और नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में सबसे आगे है। राजनाथ सिंह की विदाई से मध्य प्रदेश में कैलाश विजयवर्गीय , सुषमा स्वराज और अरूण जेटली का हाथ पकड़कर और आगे जाने की प्रयास करेंगे। अनिल दबे ने राजनाथ सिंह के चलते राज्यसभा में प्रवेश किया अब वे सुषमा स्वराज के विश्र्रस प्राप्त बने हुए हैं। कप्तान सिंह सोलंकी पर अब संघ का हाथ नहीं हैं। वे पूरी तरह राजनाथ के कृपा प्राप्त है। प्रभात झा संघ के नुमाइंदे होने के कारण मध्य प्रदेश पर नजर जमाएं हुए हैं। मध्य प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर केंन्द्रीय नेतृत्व में पैर जमाने के फिराक में हैं। सफल अध्यक्ष के रूप में जाने जाते हैं। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-2145833690975464382?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/2145833690975464382/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/09/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/2145833690975464382'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/2145833690975464382'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/09/blog-post.html' title='भारतीय जनता पार्टी में उठा - पटक से मध्य प्रदेश में खलबली'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-8053513820470451589</id><published>2009-08-22T12:04:00.000-07:00</published><updated>2009-08-23T00:19:49.493-07:00</updated><title type='text'>ब्राम्हण पत्रकारों के भोज का सच</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SpDqqYL-A0I/AAAAAAAAAVw/CtLtEQyBhTs/s1600-h/journalist.jpg"&gt;&lt;span style="font-family:georgia;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5373052369221059394" style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 151px; CURSOR: hand; HEIGHT: 200px" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SpDqqYL-A0I/AAAAAAAAAVw/CtLtEQyBhTs/s200/journalist.jpg" border="0" /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-family:georgia;"&gt;&lt;strong&gt; मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को बदले जाने के लिए ब्राम्हण पत्रकारों ने लाबिंग शुरू कर दी हैं इंदौर के पैसे से भोपाल में पत्रकारों के लिए एक भोज रखा गया था भोज तो दरसल एक बहाना था इंदौर के एक बीजेपी नेता ने इस सब को प्रयोजित किया ओर ब्राम्हण पत्रकारों को उनका उचित स्थान दिलवाने के लिए ब्राम्हण मुख्यमंत्री को वक़्त की जरूरत बताया हलाकि इस आयोजन के जरिये एक तीर से दों निशाने साधने की कोशिश की गयी हैं एक तो ब्राम्हण मंत्रियों को इसके जरिये सीएम शिवराज सिंह से लड़वाने की कोशिश हैं और दूसरा अगर यह लडाई शुरू होती हैं तो इसका सीधा लाभ इंदौर को दिलवाया जाये और मालवा के दमदार नेता कैलाश विजयवर्गीय को मुख्यमंत्री बनवाया जाये इस सब जोर गणित के पीछे ब्राम्हण पत्रकारों को मोहरा बनाया जा रहा हैं और गरीब गुरबे पत्रकार अपने ही बीच के कुछ दल्ले नुमा पत्रकारों की चाल को भोज करने के बाद ही समझ पाए भोज में शामिल अधिकांश पत्रकार भोज कर वापस हो लिए क्यूंकि इस आयोजन में जो चहरे सामने आये उनमे कुछ घोषित दलाल , कुछ घोषित शराबी और कुछ घोषित स्त्रीलोलुप पत्रकार थे इनमे वे लोग भी शामिल हैं , जिनके दामन पर अमानत में खयानत और लड़कीबाजी तक के दाग लगे हैं इस भोज में गए पत्रकार सुरेश शर्मा ने बताया की मुझे तो इनका एजेंडा तक नहीं पता था , मुझे तो अचानक भाषण देने को खडा कर दिया गया इसका औचित्य क्या था मुझे तो यह तक नहीं पता था ब्राम्हण भोज के लिए लाखों रूपये एक इन्दौरी दलाल ने दिए थे उनका मकसद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के खिलाफ ब्राम्हण पत्रकारों को एकजुट करना और इस बात को फैलाना था कि शिवराज के सामने ब्राम्हण मंत्री अनूप मिश्रा , गोपाल भार्गव और लक्ष्मीकांत शर्मा अब एक चुनौती हैं लेकिन इस आयोजन में बिचौलिये और कुछ चरित्रहीन ब्राम्हण पत्रकारों के सामने आने से यह शो फ्लॉप हो गया , अच्छी संख्या के बावजूद सभी ब्राम्हण पत्रकारों को एक राए नहीं किया जा सका इसमें शामिल दो पत्रकारों को लाल बत्ती चाहिए थी तो आठ को सरकारी फिल्म के टेंडर तो बाकि को सप्लाई ऑडर चाहिए थे सब के अपने अपने एजेंडे थे इनमे से २७ लोग ऐसे थे जो पत्रकार बिरादरी में सिर्फ काले काम को छुपाने के लिए हैं एक एसा था जिसके चेहरे पर उसके काले कारनामो कि कालिख साफ़ नज़र आती हैं इनमे कुछ अपने कारनामों से इतने बदनाम हो चुके हैं कि वे ऐसे आयोजन के जरिये अपने अस्तित्व को तलाश रहे हैं इनमे से कुछ कि चिंता यह थी कि उनकी सरकारी नौकरी वाली बीवियों के तबादले न हो और अगर हो गया हैं तो उसे कैसे रुकवाया जाये ब्राम्हण पत्रकारों कि एकता के नाम हुए इस आयोजन से तमाम सारे उन पत्रकारों ने दूरी भी बनाये राखी जो सिर्फ पत्रकारिता में यकीन रखते हैं इंदौरी अंदाज में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के खिलाफ मोर्चा खोलने के इस अभियान कि वैसे तो अपने आप ही हवा निकल गयी क्यूंकि २७ लोग मिलकर क्या खिचडी पका रहे हैं , यह बाकि पत्रकारों कि समझ में आ गया कार्यक्रम में शामिल मनोज मिश्रा ने कहा कि "दलालों और चरित्रहीन के रहते ऐसा कोई आयोजन सफल नहीं हो सकता क्यूंकि पत्रकारिता किसी जाती विशेष से जुडा मसला नहीं हैं हम सारे समाज के हैं सिर्फ ब्राम्हणों के नहीं जो लोग भी इस आयोजन के पीछे हैं वे भी समझ ले पहले पत्रकार को पत्रकार बन जाने दो फिर उसे ब्राम्हण और राजपूत या दीगर जात में बाँटना वैसे भी उस आयोजन में जो लोग सामने थे उनके लक्षण ब्राम्हणों वाले थे नहीं कुछ कि काम वास्नाये उनके चेहरे पर थी तो कुछ सुबह से ही दारु पी कर चले आये थे" इस आयोजन से उम्मीद थी कि सारे ब्राम्हण कलमघिस्सू एक हो कर राजनीती में बदलाव की नई इबारत लिखेंगे लेकिन हुआ ठीक उसका उल्टा इनमे जिन चेहेरों को सामने लाया गया उनके कारनामों से ब्राम्हण जाति और पत्रकारिता दोनों शर्मसार हुई सो अधिकांश ब्राम्हण पत्रकारों ने भोज किया और अपने-अपने घर खिसक लिए आयोजन स्थल पर जो लोग बचे थे वे सोंचे ,वे क्या वाकई पत्रकार हैं और क्या सिर्फ पत्रकारिता कर रहे हैं या इसकी आड़ में उनकी मंशा कुछ और हैं&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-8053513820470451589?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/8053513820470451589/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/08/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/8053513820470451589'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/8053513820470451589'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/08/blog-post.html' title='ब्राम्हण पत्रकारों के भोज का सच'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SpDqqYL-A0I/AAAAAAAAAVw/CtLtEQyBhTs/s72-c/journalist.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-7695149621363900493</id><published>2009-07-16T19:22:00.000-07:00</published><updated>2009-09-04T06:47:52.902-07:00</updated><title type='text'>अब ठगी भी कर रहा है साधना न्यूज़ चनैल</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/Sl84b_ebbqI/AAAAAAAAAVo/GXFIJ3atIsw/s1600-h/nnnnnnnn.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5359064135140863650" style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 200px; CURSOR: hand; HEIGHT: 124px" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/Sl84b_ebbqI/AAAAAAAAAVo/GXFIJ3atIsw/s200/nnnnnnnn.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt; &lt;span style="font-family:arial;font-size:130%;"&gt;मध्यप्रदेश का साधना न्यूज़ चैनल अब गरीब पत्रकारों के साथ ठगी भी कर हैं उमरिया के पत्रकार राजकुमार सिंघई ने पुलिस में शिकायत की है कि साधना न्यूज़ के एस.पी.त्रिपाठी ने उसे नौकरी देने के नाम पर पच्चीस हज़ार का डी.डी ले लिया और नौकरी किसी और को दे दी और डी.डी भी वापस नहीं किया पीड़ित पत्रकार ने पुलिस से ठगी की शिकायत की हैं और अपने पसीने कि गढ़ी कमाई वापस दिलाने की मांग की हैं पुलिस को की शिकायत में पत्रकार राजकुमार सिंघई ने बताया कि १४ फरवरी को राज एक्सप्रेस में संवाददाता-रिपोर्टर बनाने के लिए विज्ञापन निकला था जिसकों पढ़ कर मेरे द्वारा अपना बायोडाटा ई.मेल के माध्यम से दिल्ली एवं डाक द्वारा साधना न्यूज़ चैनल मध्यप्रदेश के ब्यूरो आफिस भोपाल भेजा था २३ मार्च २००९ को फोन द्वारा मुझे सूचित किया गया की आप 2५०००/- रु की डी.डी लेकर आ जाये २४ मार्च २००९ को मेरे द्वारा स्टेट बैंक ऑफ़ इंदौर से २५०००/- डी.डी जिसका क्र. १७१७५७ हैं जो २४ मार्च २००९ को बनवाकर २४ मार्च २००९ को रात दुर्ग भोपाल से ट्रेन द्वारा भोपाल के लिए रवाना हुये मेरे साथ कौशल विश्वकर्मा भी भोपाल के लिए रवाना हुए २५ मार्च २००९ को साधना न्यूज़ चैनल के एम्.पी.नगर जोन-१ के कार्यालय पहुँचकर योगेन्द्र शुक्ला जो उक्त कार्यालय के हेड हैं उनको उनको मैंने २५०००/- रु की डी.डी दी उनके द्वारा बोला गया की आप दो मिनट के लिए एस.पी.त्रिपाठी (न्यूज़ एडिटर) से मिल ले जब तक एग्रीमेंट एवं ज्वानिंग लेटर तैयार करा रहा हूँ मैं तत्काल योगेन्द्र शुक्ला के बगल में स्थित एस.पी.त्रिपाठी के चेम्बर में पंहुचा उन्होंने मेरे से कैमरे के बारे में जानकारी ली उस समय वहाँ पर मध्यप्रदेश के ब्यूरो चीफ अजय त्रिपाठी भी उपस्थित थे उसके बाद एस.पी.त्रिपाठी मेरे को थोडी देर में मिलने को बोले मैं तत्काल चेम्बर से बहार आया चेम्बर के अन्दर एस.पी.त्रिपाठी एवं कौशल विश्वकर्मा के बीच चर्चा होती रही उनके बीच क्या चर्चा हुई इसके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं हैं एस.पी.त्रिपाठी एवं कौशल विश्वकर्मा के सम्बन्ध काफी समय पहले से थे इस बात की जानकारी मुझे उसी दिन लगी फिर एस.पी.त्रिपाठी द्वारा मेरे को अपने चेम्बर में बुला कर बोला गया की आप ३ बजे के बाद आइये उसी दिन जब मैं ३ बजे उनके पास पहुंचा तो एस.पी.त्रिपाठी ने कहा की अभी दिल्ली चर्चा नहीं हो पायी हैं आप का बायोडाटा एवं पता हमारे पास हैं नियुक्ति की सूचना एक-दो दिन में फोन या लिखित रूप से उमरिया भेज देंगे यह सब हो जाने के बाद उसी दिन इंदौर-बिलासपुर से उमरिया वापिस आ गया एक सप्ताह तक इंतजार करने के बाद साधना न्यूज़ भोपाल एवं दिल्ली से किसी तरह की भी मुझे सूचना न मिलने पर फोन से योगेन्द्र शुक्ला एवं एस.पी.त्रिपाठी जो की साधना न्यूज़ चैनल भोपाल हेड हैं फोन से सम्पर्क करने पर उनसे अनुरोध किया की अभी तक साधना न्यूज़ चैनल से हमारा नियुक्ति पत्र नहीं आया हैं तो कृपया कर हमारे द्वारा दिया गया पच्चीस हजार वापस कर दे तो उन्होंने बताया की कुछ समय और लगेगा क्यूंकि साहब इंडिया से बहार गए हुए है इसी बीच मुझे पता लगा की साधना न्यूज़ में कौशल विशकर्मा को नियुक्त कर दिया गया है तो मैंने फोन से सम्पर्क किया और अपने पैसे की मांग की उनके द्वारा बताया गया की आपकी डी.डी कंपनी द्वारा बैंक से भुगतान प्राप्त कर लिया हैं आप को चे़क के माध्यम से आपका भुगतान जल्द ही करा दिया जायेगा ,लेकिन आज तक मुझे मेरा पैसा वापिस नहीं दिया गया तब मुझे लगा की साधना न्यूज़ चैनल में पदस्थ योगेन्द्र शुक्ला , एस.पी .त्रिपाठी एवं कौशल विशकर्मा ने साथ मिलकर मेरे साथ २५००० /-रु की ठगी कर ली गयी हैं पत्रकार राजकुमार सिंघई मध्यप्रदेश वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के प्रदेश प्रतिनिधि हैं उन्होंने अपने साथ हुई ठगी की शिकायत सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय दिल्ली , मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक से भी की हैं उमरिया के पुलिस अधीक्षक ने इस मामले में पीड़ित पत्रकार को पैसा वापस दिलवाये जाने के लिए भोपाल एस.पी. को शिकायत पत्र भेज दिया हैं दूसरी ओर साधना चैनल के प्रवक्ता ने कहा कि राजकुमार सिंघई हमारे यहाँ ब्लैक लिस्टेड हैं इस लिए उन्हें नौकरी नहीं दी गई ऐसे में सवाल यह है कि राजकुमार ब्लैक लिस्टेड हैं तो साधना के लोगो ने उनसे २५०००/-रु क्यों लिए साधना चैनल इससे पहले भी उमरिया में सुशील सिंघल ओर सुरेन्द्र त्रिपाठी से पैसे लेकर ऐसा ही बर्ताव कर चूका हैं इन लोगो का कहना हैं साधना चैनल पत्रकारिता तो कम अवैध वसूली ज्यादा करवाता हैं वैसे भी साधना चैनल में एस.पी.त्रिपाठी से नीचे तक ऐसे लोगो की भरमार ज्यादा हैं जिनके गिरेवान में सिर्फ दाग ही दाग हैं यही वजह हैं की साधना न्यूज़ साहरा समय को चुनौती देना तो दूर उसके आस पास भी नहीं फाटक पा रहा हैं &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-7695149621363900493?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/7695149621363900493/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/07/blog-post_16.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/7695149621363900493'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/7695149621363900493'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/07/blog-post_16.html' title='अब ठगी भी कर रहा है साधना न्यूज़ चनैल'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/Sl84b_ebbqI/AAAAAAAAAVo/GXFIJ3atIsw/s72-c/nnnnnnnn.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-2436280399564494252</id><published>2009-07-01T20:10:00.000-07:00</published><updated>2009-07-01T08:12:37.223-07:00</updated><title type='text'>कांग्रेस की बढ़त, भाजपा को सदमा</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;छह माह पहले भाजपा ने विधानसभा चुनाव में जिस तरह शानदार प्रदर्शन किया था, उससे तमाम राजनीतिक विश्लेषक, राज्य में भाजपा की एकतरफा बढ़त का अनुमान लगा रहे थे । कांग्रेस के कद्दावर नेता लोकसभा चुनाव लड़ने से कन्नी काट रहे थे । प्रदेश कांग्रेस के महासचिव राजकुमार पटेल ने जानबूझकर विदिशा संसदीय सीट से आधा-अधूरा फार्म भरा, ताकि उन्हें चुनाव लड़ने की जहमत नहीं उठाना पड़े । निराशा के वातावरण में वे ही नेता टिकट पाने के लिए लालायित थे जो विधानसभा चुनाव में शिकस्त झेल चुके थे । प्रेमचंद गुड्डू, राजा पटैरिया जैसे नेता अपनी किस्मत एक बार पुनः आजमाना चाहते थे, असलम शेरखान लंबे अरसे से लोकसभा चुनाव का टिकट पाना चाहते थे । ऐसे ही नेताओं में रामेश्वर नीखरा भी शुमार थे । भाजपा में हर नेता यह समझ रहा था कि चुनाव में उनकी विजय सुनिश्चित है । कई बार चुनाव लड़ चुके सांसदों के ऊपर पार्टी को विश्वास था कि वे आसानी से चुनाव जीत जाएंगे, इसलिए डॉ० लक्ष्मीनारायण पांडे, सुमित्रा महाजन, सत्यनारायण जटिया, चन्द्रमणि त्रिपाठी, कैलाश जोशी को पार्टी ने हरी झंडी दे दी । हालांकि इन नेताओं से जनता की गहरी नाराजगी थी, वहीं कार्यकर्ताओं से भी उनके बेहतर संवाद-रिश्ते नहीं थे । चूँकि इन सांसदों का केन्द्रीय नेताओं से अच्छा संपर्क है । ऐसे में इन नेताओं को बदलना मुख्यमंत्री शिवराज सिंह, प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर एवं संगठन मंत्री माखनसिंह ने उचित नहीं समझा । वैसे भी इन नेताओं की जीत का पार्टी को अति आत्मविश्वास था । भाजपा में विक्षुब्ध नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का बड़ा वर्ग इन तीनों नेताओं को सबक सिखाने के लिए मौके का इंतजार कर रहा था, जिन्हें तिकड़ी ने राज्यसभा में प्रत्याशी नहीं बनाया, न ही निगम के अध्यक्ष मंडलों पर नियुक्ति की । वैसे भी मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने रामपालसिंह को होशंगाबाद से चुनाव लड़वाकर यह संदेश देना चाहा कि वे कहीं से भी अपनी पसंद के उम्मीदवार को चुनाव में विजयी बना सकते हैं । शिवराजसिंह चौहान का लक्ष्य छिन्दवाड़ा, गुना, झाबुआ सीटें कांग्रेस से छीनना था । बिजली, पानी, सड़क जैसे मुद्दों को उठाकर कांग्रेस ने भाजपा विरोधी वातावरण बनाने की कोशिश की, जिसने जनभावनाओं को भड़काया, इसका समाधान भाजपा वाकई में नहीं कर पाई । पानी के लिए दर-दर भटकने वाले मतदाता बिजली की कमी को लेकर भी आक्रोशित हुए । अन्य मुद्दों पर भी सांसदों से सवाल करने लगे । वहीं भाजपा के अनेक विधायकों ने सांसदों को निपटाने का खेल खेला, जो पहले कांग्रेस में ही होता था । कांग्रेस के अपेक्षाकृत कमजोर उम्मीदवार धीरे-धीरे जीत के करीब पहुँच गए, जबकि कांग्रेस नेतृत्व भी म.प्र. को हारा हुआ प्रदेश मान रहा था । कांग्रेस के नेताओं में यदि आत्मविश्वास होता और सही ढंग से वे कुछ सीटों पर उम्मीदवार उतारते तो नतीजा भाजपा के लिए ज्यादा घातक होता । भिण्ड से भागीरथ प्रसाद को चुनावी समर में उतारना प्रत्याशी के लिए रस्म अदायगी जैसा ही था । यदि वहाँ से किसी पूर्व विधायक को पार्टी प्रत्याशी बनाती तो निश्चित ही यह सीट कांग्रेस को मिलती । सीधी से अजय सिंह को टिकट देती तो सतना, सीधी दोनों ही सीटें कांग्रेस के खाते में होती । फिर भी सज्जनसिंह वर्मा, मीनाक्षी नटराजन, प्रेमचन्द गुड्डू, अरूण यादव की जीत से मालवा-निमाड़ में भाजपा का मजबूत किला ढह गया । हार-जीत का बारीकी से अध्ययन करेंगे तो इन्दौर में एक माह पूर्व सत्यनारायण पटेल को उम्मीदवार बना देती तो नतीजा कांग्रेस के पक्ष में ही हो जाता । बहरहाल, इतनी सीटें खोने से भाजपा में निराशा है । शिवराज सिंह के लिए यह चुनाव ऐसा सबक है, जिससे वे कुछ सीख ले सकें । भविष्य में उनकी प्रशासन पर पकड़, पार्टी संगठन एवं कार्यकर्ताओं में असर और जनता के हित में बिजली, पानी जैसे मुद्दे से निजात दिलाना और प्रदेश में विकास की तेज गति ही उन्हें सफलता दिलाएगी । &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-2436280399564494252?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/2436280399564494252/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/07/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/2436280399564494252'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/2436280399564494252'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/07/blog-post.html' title='कांग्रेस की बढ़त, भाजपा को सदमा'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-2515379050148688776</id><published>2009-06-28T16:53:00.000-07:00</published><updated>2009-06-28T04:59:24.910-07:00</updated><title type='text'>कुछ पर लगाम तो कुछ के गले में पट्टे बांधने होंगे</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:courier new;font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:courier new;font-size:130%;"&gt;लंबे अरसे बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आचार व्यवहार में एकदम तब्दीली आई है, जो प्रशंसनीय है। उन्होंने स्वयं समयानुशासन का पालन कर अफसरशाही को इसका पालन करने की हिदायत दी है। कतिपय अफसरों पर इसका असर भी हुआ है। परन्तु अधिकतर अफसरों ने शिव की भाषा को बिगड़ैल बच्चे की तरह लिया, जो अपने पिता की बात को एक कान से सुनता है और दूसरे कान से निकाल देता है। दरअसल समूचे शासन तंत्र को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजिय सिंह ने इस कदर बिगाड़ दिया है कि नौकरशाही में सामंतवाद के अवगुण समाहित हो गए हैं, क्योंकि दिग्विजिय काल में नौकरशाह जनप्रतिनिधियों को डिक्टेट करते थे। इससे पूरे प्रदेश में कलेक्टर और एसपी राज कायम हो गया था। वहीं व्यवस्था शिव 'राज' में भी 'इकबाल' (यानी स्वीकार्य) है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;span style="font-family:courier new;font-size:130%;"&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;वर्तमान नौकरशाही, नव सामंतवाद का जीता जागता नमूना है। सामंती समाज की यह पूर्व निर्मित छवि दरबारियों, रइसों और दूसरे अभिजात्य वर्ग के जीवन को निर्धारित करती रही है। उनके कानून, नैतिकताएं, उनकी प्रतिज्ञाएं और दोस्त-दुश्मनों के बीच आचार-व्यवहार सभी कुछ इतना तय हो चुका है कि आसानी से उनके भावी व्यवहार को बताया जा सकता है। खानदानों की रवायतें, वंशानुगत कुंठाएं, ठसक और इसकी गौरव गाथाएं, शेखियां, आत्मसम्मान की सरहदें, उदारता-क्रूरता के क्षेत्र, अपमान-अवज्ञाओं की परिभाषाएं और सजाएं, स्वेच्छाचारिताओं और दूसरों के जीवन पर उनका नियंत्रण जरूर उनके अहंकारों को खाद-पानी देता रहा होगा। निजी सुरक्षा, अपनों से भय, जालसाजियां और बदलती निष्ठाएं शायद उन्हें कभी चैन की नींद सोने नहीं देती होगी। सामंती समय के ताने-बाने को देखकर ऐसा लगता है कि मप्र की वर्तमान नौकरशाही उस समय का वर्तमान व्याकरण बन गई है।&lt;/p&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;शिवराज सिंह ने सर्विस रूल का हवाला देते हुए समयानुशासन और समयसीमा पर फाइलें निपटाने के निर्देश दिए थे। सवाल यह उठता है कि यह उपक्रम करने की जरूरत क्यों पड़ी? निश्चित तौर पर नौकरशाही और प्रशासन तंत्र में लेतलाली तथा टालू प्रवृत्ति आई है। लिहाजा यह कदम उठाना पड़ा। मुख्यमंत्री के इस नवाचार का कितना असर नौकरशाही पर होगा? इसका जवाब मेरे पास है। इसका कोई असर नहीं होगा, क्योंकि हमारे पूरे सामाजिक एवं प्रशासनिक तंत्र में हरामखोरी, रिश्वतखोरी, लेटलतीफी की बीमारी 'घर' कर गई है। इसे जड़ से मिटाने के लिये नौकरशाही पर चाबुक चलाना होगी। एसडीओ, डॉक्टर और सीईओ को सस्पेंड करने से कुछ नहीं होगा। बड़ी मछलियों पर हाथ डालोगे तो सिस्टम में 'भय' होगा। 'भय' होगा तो 'जय' होगी। इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री कार्यालय से करनी होगी। शिवराज को स्वयं यह आकलन करना होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठे अफसरान और स्वयं मुख्य सचिव ने साढ़े तीन साल में कितने संभागीय कार्यालयों का दौरा किया? कितनी मर्तबा गांव में रुके? सत्ता के साकेत में बैठने के बाद अफसर हो या मंत्री, सब 'लाभ-शुभ' में लग जाते हैं। इनसे कोई उम्मीद रखना बेमानी है। 'भ्रष्टों को नहीं बक्शा जायेगा, 'अफसर समयसीमा में फाइलें निपटाएं', 'फलां योजना लागू की जायेगी', 'किसानों को मुफ्त बिजली देंगे', 'अफसर गांव में रात बिताएं' इस तरह के तमाम बयानात मुख्यमंत्री देते रहेंगे और अफसरान एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकालते रहेंगे। यह सब दिग्विजय सिंह भी करते थे, लेकिन नतीजा सिफर रहा। उसका मूल कारण यह था कि अफसरान उनके मुंह लग गए थे और जनप्रतिनिधि उनसे दूर हो गए थे। अब सत्ता की गलियां इतनी मलीन हो चुकी हैं कि हर गली में रिश्वत, कमीशनखोरी की बू आती है। &lt;/p&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;शिवराज सिंह की कोशिशें ईमानदार हैं, लेकिन उन्हें निस्पृह भाव से सत्ता के घोड़े पर बैठकर मठाधीश बने अफसरान पर चाबुक चलाना होगी। कलेक्टर और एसपी नाम की 'संस्था पर स्वयं नियंत्रण रखना होगा। अभी हाल ही में मुझे संघ के एक बड़े पदाधिकारी ने बताया कि पिछले पौने चार साल में कलेक्टर और एसपी की पोस्टिंग मुख्यमंत्री सचिवालय के दो अफसरों ने ही की, जिससे उनका आर्थिक स्वास्थ्य सुधरा है। निश्चित तौर पर अब कलेक्टर और एसपी भी फील गुड में हैं। ऐसी गुडी-गुडी प्रशासनिक व्यवस्था में परिवर्तन कैसे होगा? राज्य मंत्रालय में ही ४५० से ज्यादा ऐसे कर्मचारी हैं, जो बरसों से 'सदा सुहागन' बने हुये हैं। जब तक मंत्रालय में आमूलचूल फेरबदल नहीं होगा, तब तक मंत्रालय की गति मंथर रहेगी और भ्रष्टाचार चरम पर होगा। शिवराज सिंह इस बात से भिज्ञ हैं या नहीं, यह मुझे नहीं मालूम कि पिछले सात सालों में ३३ से ज्यादा आईएएस, आईपीएस और आईएफएस लोकायुक्त दागी हैं। भ्रष्टाचार का मंगलाचरण हो रहा है और शिवराज की स्मृति चैतन्यता के लिए यह बताना जरूरी है कि उक्त लोकायुक्त दागी सभी अफसरान मलाईदार पदों पर बैठे हैं। संभवतः शिव के सलाहकारों ने उन्हें यह बात जंचा दी है कि भ्रष्ट अफसर ज्यादा इफिशिएंट होते हैं। इससे मप्र के ईमानदार अफसरों का मनोबल गिर रहा है। अरेरा क्लब, जहांनुमा और नूर-उस-सबाह में हराम की स्कॉच पीने वाले ग्यारह ऐसे अफसरों को मैं जानता हूं, जो महीने में एक या दो मर्तबा मंत्रालय अथवा संबंधित कार्यालय जाते हैं। भोपाल में पदस्थ पांच आईएएस और तीन आईपीएस अफसरान पटवारी, तहसीलदार, टीआई, सीएसपी की मदद से सिर्फ और सिर्फ कालोनाइजिंग और जमीन खरोद-फरोख्त के धंधे में लगे हुये हैं। शिवराज के एक चहेते अफसर ने पिछले पौने चार साल में प्रमोटी कलेक्टरों की नियुक्ति में २५ से ४० लाख रुपये लिये हैं। नौ ऐसे बड़े अफसर हैं, जिनके घर में अशांति का वातावरण है। कारण परस्त्रीगमन है। हराम की शराबखोर, भ्रष्टाचार को शिष्टाचार बताने वाली जमीनखोर अफसरशाही शिवराज के नैतिक कर्म-धर्मिता को कैसे आत्मसात कर पाएगी? प्रश्न नकारात्मक है। लेकिन निराश होने की जरूरत नहीं है। कुछ पर लगाम, कुछ पर चाबुक तो कुछ के गले में पट्टे बांधने होंगे। तभी सब कुछ ठीक होगा। &lt;/p&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;यही हाल शिव के गणों का है। वे भी बेलगाम हो गए हैं। एक महिला मंत्री शासकीय बैठकों में तू-तड़ाक करती हैं तो दूसरी महिला मंत्री हर टेण्डर प्रक्रिया में ठेकेदारों से सीधे डिलिंग करती हैं। महाकौशल के एक मंत्री ने लोकसभा चुनाव में जमकर चंदा वसूली की और अब ईमानदारी का आवरण ओढ़ रहे हैं। यही मंत्री शिवराज की महत्वाकांक्षी लाडली लक्ष्मी योजना पर सवालात उठा रहे हैं। दो मंत्री अगला चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। संघ की मदद से जीतने वाली एक डॉक्टर की पूर्व पत्नी कम मतों से जीतने का ठीकरा संघ पर थोप रही है। एक हारे हुए पूर्व सांसद हारे हुये लोगों को राज्यसभा में नहीं भेजने की बात कर रहे हैं। लगभग चार हारे हुये और एक जीती हुई सांसद सेबोटेज की शिकायत कर रही है। &lt;/p&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;जिधर देखो उधर अनुशासनहीनता, बदमिजाजी और वैचारिक अराजकता का माहौल है। इसी बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मप्र भाजपा के संगठन महामंत्री माखन सिंह ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान कुछ इस तरह बयानबाजी की...&lt;/p&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;- समीक्षा क्या करें। सबको पता है, जहां हारे हैं, क्यों हरे।&lt;br /&gt;- सत्यनारायण जटिया को तो हारना ही था। उनसे कहा गया था कि सीट एक्सचेंज कर लें, पर माने नहीं।&lt;/p&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;- डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे पहले हाथ जोड़कर टिकट के लिए गिड़गड़ाते रहे। टिकट मिल गया तो जेब में हाथ नहीं डाला। इतना नीचे जाएंगे यह कल्पना से बाहर था। ऐसा लग रहा था कि डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे को तालाब में पत्थर बांध कर डुबो दें।&lt;/p&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;- तय हो गया था कि कुछ लोगों को टिकट नहीं देना है, फिर भी दिया, इसलिए ऊपर वाले भी जानते हैं, क्यों हारे। &lt;/p&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;- पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री जैसे पद पर रह चुके पूर्व सांसद कृष्णमुरारी मोघे सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री को कार्यशैली बदलने की न सिर्फ सलाह दे रहे हैं, बल्कि सत्ता और संगठन में तालमेल के लिए उनकी मांग समन्वय समिति की भी है। &lt;/p&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;अब जब संगठन में संघ परंपरा एवं संस्कार के लोगों की खुलेआम यह टिप्पणी होगी तो फिर कार्यकर्ताओं पर कौन लगाम लगाएगा? मैं फिर कहता हूं शिव बाबा कुछ पर लगाम लगाओ तो कुछ के गले में पट्टे बांधो वरना....... &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-2515379050148688776?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/2515379050148688776/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/06/blog-post_28.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/2515379050148688776'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/2515379050148688776'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/06/blog-post_28.html' title='कुछ पर लगाम तो कुछ के गले में पट्टे बांधने होंगे'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-5797705304901168355</id><published>2009-06-18T20:03:00.000-07:00</published><updated>2009-06-18T08:06:39.144-07:00</updated><title type='text'>शराब से महक रहे शहर के थाने</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SjpXpcY32RI/AAAAAAAAAU0/4zb7sK2WTbE/s1600-h/large.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5348683876962654482" style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 200px; CURSOR: hand; HEIGHT: 138px" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SjpXpcY32RI/AAAAAAAAAU0/4zb7sK2WTbE/s200/large.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt; &lt;span style="font-family:courier new;font-size:130%;"&gt;भोपाल राजधानी में करीब सभी थाने पिछले एक सप्ताह से रोज रात को शराब की महक से महक रहे हैं। दरअसल पुलिस ने पब्लिक प्लेस पर शराब पीने वाले मदिरा प्रेमियों के खिलाफ अभियान छेड रखा है। अब तक लगभग पांच सौ मदिरा प्रेमी हवालात की हवा भी खा चुके हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-family:courier new;font-size:130%;"&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;पुलिस कप्तान जयदीप प्रसाद के निर्देश पर राजधानी पुलिस ने सार्वजनिक स्थलों पर शराब पीने वालों के खिलाफ जो अभियान शुरू किया है, अभियान के तहत पुलिस पिछले एक सप्ताह के दौरान करीब पांच सौ मदिरा प्रेमियों को हवालात की हवा खिला चुकी है। पुलिस द्वारा शुरू किया गया यह अभियान अभी भी जारी है। थानों की पुलिस रोजाना अपने इलाकों के सार्वजनिक स्थलों से आधा दर्जन से ज्यादा सुरा प्रेमियों को पकड कर हवालात की हवा खिला चुकी है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-family:courier new;font-size:130%;"&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;हबीबगंज थाना अव्वल :- पुलिस कप्तान के निर्देश का पालन करने में हबीबगंज थाने की पुलिस पिछले एक सप्ताह की कार्रवाई में आगे चल रहा है। हबीबगज पुलिस पिछले एक सप्ताह के दौरान अपने इलाके के सार्वजनिक स्थलों एकांत पार्क, पांच नंबर स्टाप, छह नंबर स्टाप, मनीषा मार्केट, दस नंबर, बिट्टल मार्केट आदि से करीब सौ मदिरा पे*मियों को हवालात की हवा खिला चुकी है। इनके अलावा रात बारह बजे के बाद एक युवती सहित तीन लोगों को हबीबगंज पुलिस ने संदिग्ध हालत में मिलने पर धारा 109 के तहत गिरफ्तार भी किया। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:courier new;font-size:130%;"&gt;आठ से दस का टारगेट :- जानकारी के मुताबिक हर थाने ने कम से कम 10 सुरा प्रेमियों को हवालात की हवा खिलाने का टारगेट तय कर रखा है। थानों की पुलिस शाम होते ही अपने-अपने इलाकों के सार्वजनिक स्थलों पर नजरे गढा रही है और जैसे ही वहां कोई मदिरा पान करते नजर आ रहा है उसे फौरन दबोच रही हैं। पुलिस की इस कार्रवाई से देर रात तक शराब पीकर सडकों पर मटरगस्ती करने वाले युवाओं पर अंकुश लगा है। साथ ही चौराहों पर आवार तत्वों का जमावडा कम होने से शहर में अपराध पर लगाम लगी है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-5797705304901168355?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/5797705304901168355/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/06/blog-post_18.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/5797705304901168355'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/5797705304901168355'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/06/blog-post_18.html' title='शराब से महक रहे शहर के थाने'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SjpXpcY32RI/AAAAAAAAAU0/4zb7sK2WTbE/s72-c/large.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-982288950750006955</id><published>2009-06-16T20:04:00.000-07:00</published><updated>2009-06-16T08:07:43.228-07:00</updated><title type='text'>मेरे भाई कुछ तो शर्म करो</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:courier new;font-size:130%;"&gt;जबलपुर में महाकौशल प्रेस क्लब के दफ्तर में ११ जून को पुलिस ने छापा मारकर जुआ खेलते हुए पत्रकारों को पकडा.उनके पास से तीन लाख रूपये नगद, लगभग ४० मोबाइल और दुसरा आपत्तिजनक सामान बरामद हुआ दिलचस्प ये है कि प्रेस क्लब के मेनेजर के पास एक डायरी भी मिली जिसमे लाखों रुपयों कि उधारी का हिसाब था ये उधारी हार जाने वाला पत्रकार लेता था पुलिस ने ३० लोगों को गिरफ्तार किया है और पहले क्लब के संचालक मंडल के खिलाफ भी मामला बना रही थी बाद में "कर्मठ मीडिया वालों" के अनुरोध पर सिर्फ कर्मचारियों पर ही मामला बनाया जबलपुर के प्रेस क्लब में कई नामचीन संपादक और पत्रकारों कि भागीदारी है जो समाज को नैतिकता का पाठ पढाते हैं, उन्ही के घर में जब अनैतिक काम पकडाया तो पुलिस के हाथ-पैर जोड़ कर किसी तरह खुद को बचाया पुलिस ने प्रेस क्लब को सील कर दिया है नेपियर टाऊन जहां ये प्रेस क्लब है, वहां के लोग बताते हैं कि रोज़ रात को यहाँ शहर के कई बड़े पत्रकार बैठ कर शराबखोरी करते थे और जमकर हंगामा करते थे चूँकि मामला पत्रकारों से जुडा था लिहाजा शिकायत के बाद भी कोई करवाई होने का सवाल ही नहीं था भला हो उन प्रोबेज्नरी आई पी एस अधिकारियों का, जिन्होंने साहस दिखाया और समाज के सामने ये सन्देश देने कि कोशिश की जुहारियों और शराबियों की न कोई जात होती है और न ही वे कानून से ऊपर हैं अब चेहरा छिपाते घूम रही पत्रकार कोम कह रही है कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है जबलपुर के कुछ अखबारों ने साहस दिखा कर ये खबर प्रकशित कि और अपने ही भाई बंधुओं को आइना दिखाया लानत है ऐसे लोगों पर जो दलाली, जुआ, शराब और अवैध वसूली करने के बावजूद खुद को पत्रकार कहते घूमते हैं ये होना जरुरी था ताकि पत्रकारिता का बेजा इस्तेमाल करने वाले पर नकेल तो रहे &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-982288950750006955?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/982288950750006955/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/06/blog-post_16.html#comment-form' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/982288950750006955'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/982288950750006955'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/06/blog-post_16.html' title='मेरे भाई कुछ तो शर्म करो'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-9033764075581370224</id><published>2009-06-09T09:41:00.000-07:00</published><updated>2009-06-09T21:58:19.167-07:00</updated><title type='text'>सूचना के अधिकार से डरते है नौकरशाह</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:georgia;"&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;वस्तुतः जिनके भी हाथ में शक्ति है वे खुलेपन के विरूद्ध हैं । भ्रष्टाचार को दबाने-छिपाने के लिए गठजोड़ अवश्य सक्रिय है, लेकिन मैं यह नहीं मानता कि जो लोग खुलेपन के विरोधी हैं वे पूर्ण रूप से गठजोड़ का अंग बन गये हैं । दरअसल, नौकरशाही को लगता है कि हर किसी को प्रशासन से संबंधित जानकारियां देने से ब्लैकमेलबढ़ेगा । इस बात को लेकर नौकरशाही के मन में डर है । मेरा मानना है कि खुलापन से ब्लैकमेल बढ़ेगा नहीं, कम होगा । ऐसा इसलिए कि सूचना के अधिकार प्राप्त होने के बाद लोगों के पास दस्तावेज होंगे और वे उसी के आधार पर किसी अधिकारी के खिलाफ आरोप लगायेंगे । इसी तरह यह भी भ्रम hai कि नौकरशाही में कामकाज का बोझ बढ़ेगा ।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:georgia;"&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;वस्तुतः सरकार के हर अधिकारी की अपने वरिष्ठ के प्रति जिम्मेदारी तो रहती ही हैं कनिष्ठ अपने कामकाज का ब्यौरा वरिष्ठ को देते हैं । अब उन्हें केवल इतना करना है कि इस ब्यौरे की एक प्रतिलिपि जनता को भी मिल जाये । मुझे नहीं लगता कि जनता को कामकाज का ब्यौरा देने से अधिकारियों पर कोई ज्यादा बोझ पड़ेगा । लोगों को नियमों और कानूनों की जानकारी न देना, प्रशासन से संबंधित सभी मसलों को गोपनीय रखना नौकरशाही की बुनियादी चरित्र है । नियम क्या है, प्रावधान क्या है, या अमुक विषय पर निर्णय लेने वाले लोग कौन थे, या अमुक विषय पर किन वजरों से निर्णय लिये गये, इन बातों को नौकरशाही गोपनीय रखना पसंद करती है । दरअसल, शासन या प्रशासन से संबंधिम मामलों को गोपनीय रखकर वह अपनी सीधी जवाबदेही से बच जाती है। अधिकांश नौकरशाहों को लगता है कि यदि वे पारदर्शिता और खुलापन बरतते हुए लोगों को नियमों की जानकारी देने लगेंगे तो अपने उस विवेकाधिकार से वंचित हो सकेते हैं, जिसके तहत मनमानी करने की उन्हें एक हद तक छूट मिली होती है । &lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:georgia;"&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;वस्तुतः नौकरशाही को अपनी शक्ति का इस्तेमाल करने का सुख तभी मिलता है, जब उसे मनमानेपन का अधिकार प्राप्त हो । इसलिए मेरा मानना है कि शासन-प्रशासन में जितनी पारदर्शिता आएगी, नौकरशाह दुःखी होंगे जो मनमानेपन में विश्वास रखते हैं, लेकिन दूसरी ओर ऐसे नौकरशाह भी हैं, जो साफ-सुथरा और निष्पक्ष प्रशासन चाहते हैं और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। दरअसल, नौकरशाहों में यह भावना अभी तक नहीं आ पायी है कि वे जनता के सेवक हैं । नौकरशाही को यह स्वीकार नहीं है कि जनता के प्रति उनकी कोई जवाहदेही हो । राजस्थान में ग्राम सेवक संघ ने खुलेआम कहा था कि हम लोग आय-व्यय का लेखा-जोखा अपने वरिष्ठों को देने को तैयार हैं लेकिन जाता को देने के पक्ष में नहीं हैं । मेरा मानना है कि जनता संप्रभु है, सर्वोच्च है । उसे सूचनाएँ देने में किसी तरह की आपत्ति नहीं होनी चाहिए। जनता को इस प्रक्रिया में मेरी तरह भागीदार बनाना होगा । उसे समझाना पड़ेगा कि उसकी सक्रिय भागीदारी से भ्रष्टाचार खत्म हो सकता है । स्वच्छ और पारदर्शी प्रशासन की मांग सरकार विरोधी गतिविधि नहीं है । यदि एक सरकारी अधिकारी सूचना के अधिकार के अभियान से जुड़ता है, तो यह कहीं से भी नाजायज नहीं है । &lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-9033764075581370224?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/9033764075581370224/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/06/blog-post_09.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/9033764075581370224'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/9033764075581370224'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/06/blog-post_09.html' title='सूचना के अधिकार से डरते है नौकरशाह'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-4284015789804474278</id><published>2009-06-07T15:07:00.000-07:00</published><updated>2009-06-09T21:57:13.411-07:00</updated><title type='text'>संत लाल साईं को बचा रही हैं पुलिस</title><content type='html'>&lt;p align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:georgia;"&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;मध्यप्रदेश का सीआईडी विभाग कथित संत लाल साईं के बलात्कार मामले पर खात्मा लगता की उसके पहले अदालत ने लाल साईं की गिरफ्तारी के आदेश दे दिए हैं मध्यप्रदेश सीआईडी पत्रकार एस.पी.त्रिपाठी के अपनी सहयोगी पत्रकार के साथ बलात्कार की कोशिश के मामले को ऐसे ही दबा चुकी हैं अब यह मामला अदालत में हैं मध्यप्रदेश की भोपाल पुलिस और सी आई डी यौन उत्पीडन करने वालों को बचाने वाली संस्था बन गई हैं बैरागढ़ के टैम्पल ऑफ़ संबोधि के संत लाल साईं पर आरोप हैं कि उन्होंने अपनी नाबालिग़ शिष्या के साथ रेप किया 18 अक्टूबर 2008 से अब तक लाल साईं को पुलिस ने पकड़ना तो दूर उसे बचाने में अपनी पूरी ताकत लगा दी भोपाल एसपी ने तो चिट्ठी लिखकर लाल साईं को गिरफ्तार न करने के निर्देश दिए ऐसे में अदालत ने कहा हैं कि भोपाल पुलिस अधीक्षक ने लाल साईं को गिरफ्तार न करके परोक्ष रूप से अग्रिम जमानत का ही लाभ प्रदान किया हैं &lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;span style="font-family:georgia;"&gt;&lt;em&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;अदालत द्वारा लाल साईं की गिरफ्तारी के आदेश दिए जाने के बाद पीडिता के वकील विजय चौधरी ने कहा हैं कि अगर एक-दो रोज में लाल साईं नहीं पकडा गया तो वे न्यायालय कि अवमानना का केस लगायेंगे ऐसे ही एक मामले में वीओआई के पत्रकार रहे एस.पी.त्रिपाठी को भी भोपाल पुलिस ने गिरफ्तार नहीं क्या था और उसे छुट्टा घूमने दिया बाद में चैनल ने एस.पी.त्रिपाठी को बाहर कर दिया एस.पी.त्रिपाठी ने अपनी जूनियर पत्रकार के साथ बलात्कार कि कोशिश कि थी सीआईडी और भोपाल पुलिस ने इस मामले को ले देकर कुछ ऐसे ही पत्रकारों के दबाव में मामले को दबा दिया था अब यह मामला भी अदालत में है &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;एस.पी.त्रिपाठी और लाल साईं के मामले ने भोपाल पुलिस का असली चेहरा सामने ला दिया हैं, प्रदेश की सभी महिलाओं और लड़कियों के भाई और मामा होने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के लिए यह किसी तमाचे से कम नहीं हैं कि उनकी पुलिस व्याभिचारियों को लाभ पहुंचती हैं और मासूमों पर जुल्म करती हैं &lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-4284015789804474278?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/4284015789804474278/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/06/blog-post_07.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/4284015789804474278'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/4284015789804474278'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/06/blog-post_07.html' title='संत लाल साईं को बचा रही हैं पुलिस'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-3917207548893821973</id><published>2009-06-06T20:22:00.000-07:00</published><updated>2009-06-09T22:02:24.299-07:00</updated><title type='text'>कहीं तस्वीरों में ना रह जाएं वनराज</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SiqKYpq3j5I/AAAAAAAAAUs/fEV9nJpekG0/s1600-h/tigers.jpg"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5344236063935664018" style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 193px; CURSOR: hand; HEIGHT: 200px" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SiqKYpq3j5I/AAAAAAAAAUs/fEV9nJpekG0/s200/tigers.jpg" border="0" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;&lt;span class=""&gt;एक&lt;/span&gt; अनुमान के मुताबिक सौ साल पहले भारत में बाघों की संख्या 40,000 थी। राष्ट्रीय बाघसंरक्षाण ऑथारिटी के अनुसार सनृ 2002 के सर्वेक्षण में जहां बाघों की संख्या 3500 आंकी गईथी, वहीं 2008 में यह घटकर 1411 हो गई है। यानि कि अब भारत में मात्र 1411 बाघ बचे हैं।बताया जाता है कि पिछले पांच वषोर्ं में बाघों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वन्य जीवों के लिए काम करने वालों का मानना है कि साल 2025 तक बाघों के विलुप्त हो जाने का खतरा है। बाघों की कुल आबादी के 40 फीसदी बाघ भारत में पाए जाते हैं। भारत के 17 प्रदेशोंमें बाघों के 23 संरक्षित क्षेत्र हैं।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;एशिया महाद्वीप में बाघों की संख्या में लगातार आने वाली कमी का मुख्य कारण उनके अंगों का गैरकानूनी व्यापार है। शिकारी भारत में बाघों को मार कर उनके अंगों को नेपाल और फिर नेपाल के रास्ते चीन के बाजारों तक पहुंचाते हैं, जहां उनकी बिक्री की जाती है। चीन में बाघों की खाल और हडियों की भारी मांग हैं और उसे नौ सौ फीसदी मुनाफे तक पर बेचा जाता है। इधर उतर प्रदेश पुलिस भी इस बात को मानती है कि आये दिन उनका पाला शिकारियों से पड़ता है। अभी हाल ही में वहां की पुलिस ने प्रतापगढ़ जिले से बाघ और चीते की 20 खालें बरामद की थी। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरक्तार भी किया था। उनका कहना था कि वे खालों को नेपाल ले कर जा रहे थे। बाघों की घटती संख्या के पीछे अवैध शिकार और घटते जंगलों को सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में संरक्षण के उपायों के बावजूद बाघों की संख्या लगातार घट रही है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;क्या कहते हैं पर्यावरणविद :- सुनीता नारायणन ने बाघों के संरक्षण के लिए तीन उपाय सुझाए हैं। बाघों के संरक्षण के लिए जंगलों में सुरक्षा के ठोस इंतजाम किए जाएं, वन्य जीव अपराध ब्यूरो का गठन किया जाए और बाघों के संक्षरण से स्थानीय लोगों को जोड़ा जाए।बाघों की घटती संख्या के मद्देनजर टाइगर टास्क फोर्स ने बाघों के संरक्षण के लिए पुख्ता सुरक्षा उपाय और वन्य जीव अपराध ब्यूरो के गठन की सिफारिश की थी। सुनीता नारायणन कहती हैं, बाघों की गिनती के वास्तविक आंकड़े सामने आ जाएं तो हमें रूला देंगे, लेकिन यह जानना जरूरी है कि कहां और कितने बाघ हैं ताकि उन्हें बचाया जा सके। बाघों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई फिल्में बना चुके वन्यजीव संरक्षक वाल्मिकी थापर कहते हैं कि वन और पर्यावरण मंत्रालय बहुत सुस्ती से काम कर रहा है। वाइल्ड लाइफ क्राइम ब्यूरो की फाइल वर्षों से मंत्रालयों के चक्कर काट रही है। इसी तरह प्रोजेक्ट टाइगर को कानूनी हैसियत देने संबंधी प्रस्ताव भी सरकारी महकमों में धूल चाट रहा है। वाल्मिकी थापर एक गंभीर समस्या की ओर ध्यान दिलाते हैं। वे बताते हैं कि 18 वर्षों से फॉरेस्ट गार्ड के लगभग 25 हजार पद खाली पड़े हैं। एक वनरक्षक की औसत उम्र अब 50 वर्ष से ऊपर है और वे एक जगह बैठे उंघते रहते हैं। यह बहुत खतरनाक स्थिति है इसलिए जल्द से जल्द स्थानीय नौजवानों को भर्ती किया जाना चाहिए। यूरोपीय संसद में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व कर चुकीं नीना गिल कहती हैं कि भारत अकेले बाघों की घटती संख्या जैसे मसले से नहीं निपटसकता और वक्त आ गया है कि बाघों को बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया जाए।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;कहां कितनी संख्या :- मध्यप्रदेश में इनकी संख्या सबसे अधिक 290 है। उतराखंड में 178, उतर प्रदेश में 109 और बिहार में 10 बाघ होने का अनुमान है। इसी तरह आंध्र प्रदेश में 95, महाराष्ट्र में 95, उड़ीसा में 45 और राजस्थान में 32 बाघ होने का आकलन किया गया है। भारत में बाघों की घटती संख्या के बारे में लगातार दी जा रही चेतावनियों के बावजूद एक ताजा रिपोर्ट के अनूसार बाघों की संख्या जैसी आशंका थी उससे कहीं अधिक कम हुई है। भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ राज्यों में बाघों की संख्या में अपेक्षा से 65 प्रतिशत तक की कमी देखी गई है। जारी रिपोर्ट के अनुसार 2002 में मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या 710 थी जबकि इस समय यह संख्या 290 है। इसी तरह महाराष्ट्र में पिछले पांच वर्षों में बाघों की संख्या 238 से घटकर 95 रह गई है और राजस्थान में 58 से 32 हो गई है। सिर्फ जिम कार्बेट नेशनल पार्क में ही बाघों की संख्या बेहतर देखी गई है जहां अभी भी 500 वर्ग किलोमीटर में 112 बाघ हैं। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;एशिया में सिर्फ अब पांच से सात हजार बाघ :- बाघों का अस्तित्व बचाए रखने के लिए दुनिया भर के विशेषज्ञों ने नेपाल की राजधानी काठमांडू में सम्मेलन किया। सम्मेलन में इस बात पर चिंता व्यक की गई कि बाघों की कई प्रजातियां लुप्त होने की कगार पर हैं। इस सम्मेलन का आयोजन विश्व वन्यजीव कोष के सौजन्य से किया गया था। बैठक के दौरान बाघों के खाल और सम्मेलन में विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष चिंता जाहिर की कि दुनिया भर में बाघों की आठों प्रजातियां जंगलों पर बढ रहे दबाव और शिकार के कारण संकट में हैं। पूरे एशिया में अब पांच से सात हजार बाघ ही बचे हैं। इस सम्मेलन में भारत, रूप इंडोनेशिया और नेपाल समेत 12 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;चीन का मामला :- बाघों के संरक्षण पर चीन का रूख विवादास्पद रहा है। वर्ष 1993 में चीन ने बाघों की हडियों के कारोबार पर रोक लंगा दी थी लेकिन अब वहां की सरकार पर यह प्रतिबंध हटाने का दबाव बढ रहा है। इसके पक्ष में एक तर्क ये है कि बाघों की हडियां इलाज के काम आती है। नेपाल सम्मेलन में चीन द्वारा बाघ की हडियों और चमड़ी पर से प्रतिबंध हटाने की मांग उठी, लेकिन बाघों की कम होती संख्या को देखते हुए अन्य एशियाई देश प्रतिबंध बरकरार रखना चाहते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;बनती है शराब :- बताया जाता है कि चीन में बनने वाली राइस वाइन में बाघ की खाल को भिगोया जाता है और उससे तथाकथित टाइगर बोन वाइन बनाई जाती है। वाइन पीने वाले लोगों का मानना है कि इससे उनमें ताकत आती हैं। बाघों की खाल का चीन बहुत बड़ा बाजार है। भारतीय बाघ की खालें चीन के बाजारों में खुलेआम बिकती हैं। वन्य जीव संरक्षण से जुड़ी प्रमुख संस्थाओं का कहना है कि भारत और चीन दोनों देशों में बाघ एक संक्षरित प्राणी है, लेकिन इसके बावजूद अवैध कारोबार जारी है। संयुक्त राष्ट्र की संधि पर भारत और चीन दोनों देशों ने हस्ताक्षर किए हैं और दोनों देशों में बाघ को मारने पर कानूनी प्रतिबंध है। वन्य जीव संरक्षण की दिशा में सक्रिय संस्थाओं का कहना है कि चीन में जितनी भी खालें बिकती पाई गई हैं वे सब की सब भारत के बाघों की हैं। अगर भारत और चीन इस मामले पर एकजुट नहीं हुए तो बाघों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;बाघ मारने पर यहां मनता है उत्सव :- पुर्वोतर भारत के मेघालय प्रांत में एक गांव ऐसा है, जहां मनाए जाने वाले उत्सव से वहां के बाघ भी खौफ खाते हैं। जनजातीय आबादी वाले मेघालय की जयंतिया पहाड़ियों पर बांग्लादेश सीमा के पास स्थित नोंग्तालांग नामक गांव में रोंगख्ली उत्सव तब मनाया जाता है जब ग्रामीण किसी बाघ या तेंदुए को मारने में कामयाब होते हैं। जयंतिया भाषा में रोंग का मतलब होता है बाघ और ख्ली उत्सव को कहते हैं। गांव की पुरानी परंपरा के हिस्से के रूप में मनाए जाने वाले इस उत्सव का अंत बाघ के भुने हुए मांस के साथ सामुदायिक भोज से होता है।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;बाघों के मरने की घटनाएं एक नजर में :- वर्ष 1994 में 95, वर्ष 1995 में 121, वर्ष 1996 में 52, वर्ष 1997 में 88, वर्ष 1998 में 44, वर्ष 1999 में 81, वर्ष 2000 में 53, वर्ष 2001 में 72, वर्ष 2002 में 43, वर्ष 2003 में 35, वर्ष 2004 में 34,वर्ष 2005 में 43, वर्ष 2006 में 37, वर्ष 2007 में 27, वर्ष 2008 में 28, स्त्रोत :- डब्ल्यूपीएसआई &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;इस साल की कुछ घटनाएं :- मध्यप्रदेश के नेशनल पार्क कान्हा में इस साल के शुरूआती दो महीन में तीन बाघों मौत हो चुकी है। भोपाल के वन विहार में 22 फरवरी को एक बाघ की मौत हो गई। मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक बाघ मृत पाया गया। उतर प्रदेश के पीलीभीत से निकले बाघ की मौत फैजाबाद में 24 फरवरी को हो गई। 18 मार्च को कार्बेट राष्ट्रीय उधान में एक बाघ को मृत पाया गया यह एक ही हफते के भीतर दूसरी ऐसी घटना थी।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-3917207548893821973?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/3917207548893821973/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/06/blog-post_06.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/3917207548893821973'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/3917207548893821973'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/06/blog-post_06.html' title='कहीं तस्वीरों में ना रह जाएं वनराज'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SiqKYpq3j5I/AAAAAAAAAUs/fEV9nJpekG0/s72-c/tigers.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-8347255573888254764</id><published>2009-06-02T21:46:00.001-07:00</published><updated>2009-06-09T22:05:06.326-07:00</updated><title type='text'>स्टाइल बनती स्मोकिंग</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SiYAh68i6BI/AAAAAAAAAUk/WqVBLRMD9Z4/s1600-h/manojthakur.jpg"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5342958590680557586" style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 200px; CURSOR: hand; HEIGHT: 144px" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SiYAh68i6BI/AAAAAAAAAUk/WqVBLRMD9Z4/s200/manojthakur.jpg" border="0" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;युवाओं में खुलापन अच्छी बात है लेकिन स्मोकिंग के मामले में इसका सामने आना घातक सिद्व हो रहा है। अधिकांश युवाओं में स्मोकिंग स्टाइल बनती जा रही है और इसके पीछे युवाओं के बेफ्रिकी भरे तर्क भी सामने आ रहे हैं। इसका कलेजे को तिल - तिल कर फूंकना उन्हें नजर नहीं आता बल्कि वो धुएं से फिक्र को उड़ाने की बात करते हैं। एक सर्वे के मुताबिक युवा बीस साल की उम्र तक पहुंचते ही धुंए के छल्ले बनाने लगते हैं। हालात ये हैं कि इस मामले में लड़के तो आगे हैं ही लेकिग लड़कियां भी उनसे कदमताल मिलाकर चल रही हैं।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;बड़े शहरों में हैं ज्यादा : बडे महानगरों की पेज थ्री पार्टियां हो या फिर पांचसितारा होटलों में होने वाली पार्टियां। इन जगहों पर तो आपको स्मोकिंग करने वाले मिल ही जाएंगें। इसके अलावा औसत दर्जों के शहरों ही नहीं कस्बों में तक स्टाइल की यह दीवानगी देखी जा सकती है। जिधर नजर डालो पान गुमटिठयों में आसानी से धुएं के छल्ले उड़ते देखे जा सकते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;स्टाइल स्टेटमेंट :- एक सर्वे के दौरान यह बात निकल कर सामने आई कि अधिकतर युवा स्टाइलिस दिखने के लिए सिगरेट का सेवन करते है। आज के युवाओं को स्टाइलिस दिखने की चाह भी रहती है। ऐसे में वे स्टाइल के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। आज स्मोकिंग भी एक स्टाइल स्टेटमेंट बन चुका है। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;लड़कियां भी पीछे नहीं :- कई सर्वे में ये बात सामने आई कि लड़कियां स्मोकिंग को अच्छा मानती हैं। वर्ल्ड एंटी स्मोकिंग डे के अवसर पर किये गए एक सर्वे में कॉलेज गोइंग स्टूडेंटस में 70 फीसदी लड़कियों ने स्मोकिंग को अच्छा माना जबकि वहीं इसकी गिरक्त में आए 30 फीसदी छात्रों ने अपनी स्मोकिंग की लत को बुरा माना। कई लड़कियों ने तो स्मोकिंग को अपनी लत में शुमार कर लिया है। वे स्मोकिंग की आदी हो गई है।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;धुएं से मस्ती :- अधिकांश युवा मस्ती के लिए स्मोकिंग करते हैं। उनका मानना है कि सिगरेट से निकलने वाले धुएं को देखकर उन्हें मस्ती सुझती है। सर्वे के दौरान ये पाया गया कि करीब 83 फीसदी युवा और 87 फीसदी युवतियां सिर्फ मस्ती के लिए सिगरेट पीती हैं। अक्सर ये देखा भी जाता है कि युवाओं में मस्ती की आदत कुछ ज्यादा ही होती है। उन्हें मस्ती के लिए सिगरेट पीना अच्छा लगता है। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;&lt;br /&gt;समझते हैं नफा - नुकसान :- ऐसा नहीं कि स्मोकिंग करने वाले युवा इससे होने वाले नुकसान से वाकिफ नही हैं। उन्हें ये बात मालूम हे कि सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है लेकिन उन्हें पीते समय इस बात से कुछ भी लेना - देना नहीं रहता।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;तनाव से दिलाता है निजात :- युवाओं के बीच किये गये इस सर्वे में यह बात भी निकलकर सामने आई कि अधिकांश युवा सिगरेट का सेवन टेंशन दूर करने के लिए पीते हैं। युवाओं का मानना था कि उन्हें जब भी कोई मानसिक रूप से परेशानी होती है तो वे अपनी टेंशन मिटाने के लिए सिगरेट का सहारा लेते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;मिलता है रिलैक्स :- युवाओं के पास सिगरेट पीने के भी अपने - अपने बहाने हैं। किसी का कहना है कि सिगरेट पीने से उन्हें रिलैक्स मिलता है। सर्वे के दौरान युवाओं का मानना था कि जब भी लगातार काम करते - करते उन्हें थकान होती है तो वे स्मोकिंग करते है और आरामतलब होते हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;वजन घटाता है :- सर्वे में ये बात भी पता चली कि युवतियां केवल तनाव या अवसाद कम करने या मुक्ति पाने के लिए सिगरेट का सेवन नहीं करती बल्कि वे स्लिम दिखने के लिए भी सिगरेट पीती हैं। युवतियों का मानना है कि सिगरेट पीने से वजन कम होता है। इससे उनका फिगर मेंटेन रहता है।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;पीछा छुड़ाना जरूरी :- सिगरेट पीना एक बुरी लत है। इससे छोड़ना आवश्यक है। अगर आप इससे छुटकारा पाना वाहते हैं तो एक बार द्वढ़ इच्छाशक्ति से इसे छोड़ने की ठान लीजिए तभी आप इससे पीछा छुड़ा पाएंगे। इससे मिलने वाले आनंद पर ध्यान मत दीजिए। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-8347255573888254764?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/8347255573888254764/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/06/blog-post_02.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/8347255573888254764'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/8347255573888254764'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/06/blog-post_02.html' title='स्टाइल बनती स्मोकिंग'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SiYAh68i6BI/AAAAAAAAAUk/WqVBLRMD9Z4/s72-c/manojthakur.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-2151757978016286347</id><published>2009-06-01T19:00:00.000-07:00</published><updated>2009-06-09T22:17:36.771-07:00</updated><title type='text'>लाडली और लाडलों के बीच शिवराज</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;अलिखित संविधान में सर्वप्रथम अधिकार भ्रम में रहने का है। कोई व्यक्ति, समाज और व्यवस्था भ्रम में रहे तो उसका क्या किया जा सकता है? इस लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जो गत हुई है उसके लिए स्वयं शिवराज सिंह, उनकी लाड़ली लक्ष्मी योजना और लाड़ले सलाहकार जिमेदार हैं। साथ ही संगठन के बेसुध कथित कार्यकर्ता भी। शिवराज के सारे सलाहकारों और संगठन के कर्ताधर्ताओं ने शिव' को आत्ममुग्धता की ऐसी हवा भरी कि वे भ्रम' के उच्चस्तरीय शिखर पर बैठ गए और जनता की मूलभूत समस्याओं से वास्ता नहीं रखा। सीएम हाउस में उनके लाडले और पूरे प्रदेश में छाई लाड़ली लक्ष्मी योजना के भरोसे वे पूरे चुनावी समर में रहे। सीएम हाउस में बैठे भाट-चारण उन्हें भावी पीएम इन वेटिंग के रूप में देखने लगे। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भी उनके मुंहलगे नौकरशाहों ने डुबोया था। शिवराज स्व. कुशाभाऊ ठाकरे के खास शिष्य रहे हैं। उन्होंने कभी मोहमाया को अपने पास फटकने नहीं दिया। हमेशा निस्पृह भाव से रहे। चूंकि शिवराज उनके शिष्य हैं, लिहाजा उन्हें कुशाभाऊ के आदर्शों पर चलना चाहिए। वे सुंदरलाल पटवा के भी शागिर्द हैं। पटवा जी से भी उन्हें सीखना चाहिए कि नौकरशाही पर लगाम कैसे लगाएं और कैसे औकात में रखें। शिवराज सिंह अगर वाकई इस हार से सबक लेना चाहते हैं तो उन्हें कुछ बिंदुओं पर गौर करना पड़ेगा। इस बार के लोकसभा चुनावों में नौटंकी करने वाले नेताओं को जनता ने नकार दिया है। पिछले दो संपादकीय में यह लिखा जा चुका है कि मध्यप्रदेश के नौकरशाह शिवराज सिंह को जबूरा बनाकर नौटंकी करवा रहे हैं। पूरे प्रदेश की नौकरशाही और मंत्री भ्रष्टाचार की धूम मचाए हुए है और मुख्यमंत्री उनके इशारे पर नाच रहे हैं। जिसकी जो मर्जी हो रही है वह वैसा कर रहा है। सार्वजनिक जीवन में शुचिता की बात करने वाले लोगों की कथनी और करनी में अंतर हो तो जनता उसे नकारती है। संगठन के कुलिनों में वैमनस्यता और एक दूसरे को नीचा दिखाने की प्रवृत्ति भी शिव सरकार को नुकसान पहुंचा रही है। मंत्री कितने बेलगाम हो गये हैं कि उन्हें संगठन की चिंता नहीं है, और संगठन के उँचे औहदे पर बैठे लोग आत्म केन्द्रित होकर अपने लाभ शुभ के हिसाब से निर्णय ले रहे हैं। उधर चंद अफसरान शिव से मिसलीड कर रहे हैं। इन परिस्थितियों पर यह शेर मौजूं है- तुम बन गए इस मेले में तमाशबीन देखो तुहारी दुकान कोई और चलाता है।विधानसभा चुनाव से पूर्व इन्हीं चंद नौकरशाहों ने शिवराज सिंह से लाड़ली लक्ष्मी, कन्यादान योजना, किसानों की क़र्ज माफी तथा छठे वेतनमान की घोष्णाएं करवा दीं। अब घोष्णाएं तो हो गईं, सस्ती लोकप्रियता भी पा ली, शिवराज प्रदेश की जनता के काका, मामा, भाई, दादा सब हो गए, किन्तु इन घोष्णाओं के अमल के लिए धन कहां से आएगा? मूलभूत बुनियादी समस्याओं पर सरकार के पास कोई कारगर योजना नहीं है। पूरे प्रदेश में पानी को लेकर हा-हाकार मचा हुआ है। अब तक पूरे प्रदेश में पानी को लेकर हुए संघर्ष में 13 लोगों की जानें जा चुकी हैं। पूरे प्रदेश में भरी गर्मी में बिजली कटौती को लेकर हंगामा हो रहा है। शिवराज और उनके नौकरशाहों को इसकी चिंता क्यों नहीं सताती? फिर बातें होती हैं प्रदेश में औद्योगिकीकरण की। जब प्रदेश में मूलभूत सुविधाएं नहीं होंगी तो क्यों कोई औद्योगिक घराना प्रदेश में पूंजी निवेश करेगा। बिजली पर मचे हा-हाकार पर ही सभवतः साहित्यकार मनोज श्रीवास्तव के गीत की पंक्तियां प्रासंगिक हैं - अंधेरा हँसता है, अंधेरा डसता है। उजालों की कीमत चुका न पाए जिन्दगी भर, अंधेरा सस्ता है। गांव गरीब के लिए संघर्ष की बात करने वाले शिवराज सिंह को यह ज्ञात होना चाहिए कि प्रदेश का विकास नहीं विनाश' हो रहा है। अफसरानों, नेताओं, भाजपा कार्यकर्ताओं, ठेकेदारों और दलालों का ही विकास हो रहा है। मीडिया मैनेजमेंट, दलाल संपादकों के लाभ-शुभ से शिवराज जरूर अखबारों में सुर्खियां पा सकते हैं, लेकिन गरीब सर्वहारा जनता का मन नहीं जीत सकते। आज भी प्रदेश में 200 से ज्यादा ऐसे गांव हैं, जहां आजादी के बाद से आज तक बिजली नहीं पहुंची है। सैकड़ों गांव ऐसे हैं, जिन्होंने कलेक्टर नाम की संस्था का नाम तक नहीं सुना है। प्रदेश के अधिकांश प्रमोटी कलेक्टर धन बटोरू हो गए हैं। हर जिले में अंडरवर्ल्ड की तर्ज पर कल्याणकारी योजनाओं में कमीशनखोरी हो रही है। राहुल गांधी ने जब इस कमीशनखोरी के मुद्दे को उठाया था तो शिवराज को उसे सहजता से स्वीकार करना था। शिव, तुम आसमां की बुलंदियों से जल्द लौट आना हमें तो जमीं के मसलों पर बात करनी है। शिवराज सरकार के नए नवेले मंत्रियों में अधिकांश लजाऊ ठीकरे' हैं, मंत्री बनने के बाद मीडिया में सर्वाधिक छाने के लिए तरह-तरह की घोषणाएं करने वाले। जल्दी से सब कुछ पाने की होड़ में लगे सर्वश्री गौरीशंकर बिसेन, कन्हैयालाल अग्रवाल, जगदीश देवड़ा, पारस जैन, देवी सिंह सैयाम, अर्चना चिटनीस और रंजना बघेल के क्षेत्र में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। क्यों? शिव मंत्रिमण्डल में ऐसे कई और लजाऊ ठीकरे हैं, जिनकी आर्थिक सेहत पिछले छह सालों में सुधरी है। होशंगाबाद में शिव के खासमखास रामपाल सिंह चुनाव हार गए। भाजपा नेतृत्व भले ही हार के दूसरे कारण गिनाए, लेकिन यहां की हार के पीछे रेत और लकड़ी माफिया की छवि बहुत बड़ा कारण रही। एक भाजपा विधायक जिसने अपने बच्ची की शादी के कार्ड में प्रेषक के रूप में शिवराज सिंह का नाम छपवाया था, वह होशंगाबाद के आसपास से अवैध रेत उत्खनन को लेकर कुख्यात है। इस विधायक पर जंगल की अवैध कटाई और सागौन बेचने के भी आरोप हैं। शिवराज और रामपाल सिंह के परिजनों पर भी इसी तरह के आरोप हैं। कांगे्रस ने इस बात को जनता में खूब प्रचारित किया, जिसका लाभ उसे मिला। प्रदेश के मुखिया के परिजन और मुंह लगे अवैध कार्यों में लिप्त रहेंगे और आतंक फैलायेंगे तो पूरे प्रदेश में क्या होगा? यही कारण है कि मध्यप्रदेश दलित अत्याचार में पूरे देश में नंबर दो पर, महिला अत्याचार में नंबर एक पर, बाल उत्पीड़न में नंबर एक पर तथा लचर कानून व्यवस्था में भी भारत में अव्वल है। शिवराज सिंह अगर वाकई में मध्यप्रदेश को स्वर्णिम बनाना चाहते हैं तो उन्हें नौकरशाहों, मंत्रियों और अपने परिजनों पर लगाम कसनी होगी। लालू यादव का सोफेस्टिकेटेट वर्जन' बनने की बजाय मनमोहन सिंह की कार्यप्रणाली को अपनाना होगा। मध्यप्रदेश की जमीं के मसलों को सुलझाना होगा। यह तभी सभव है जब वे मंत्रालय में बैठेंगे, विकास योजनाओं की मानीटरिंग करेंगे, भ्रष्टों का नाश करेंगे, मूलभूत समस्याओं को एजेण्डा में लेंगे और प्रमोद महाजनी संस्कृति की बौद्धिक अय्याशियां बंद करवाएंगे। नहीं तो...तुमसे पहले भी इक शख्स यहां ततनशीं था उसको भी खुदा होने का तुम जैसा यकीं था। &lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-2151757978016286347?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/2151757978016286347/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/06/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/2151757978016286347'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/2151757978016286347'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/06/blog-post.html' title='लाडली और लाडलों के बीच शिवराज'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-3785854014231665453</id><published>2009-05-26T20:18:00.000-07:00</published><updated>2009-06-09T22:25:04.839-07:00</updated><title type='text'>क्या होंगे कामयाब।</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:georgia;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;पंद्रहवीं लोकसभा में चुनकर आई महिलाओं की संख्या पिछली चौदह लोकसभा चुनावों में जीतकर संसद पहुंची महिलाओं से ज्याद है। इसी वजह से महिलाओं के कल्याण के लिए काम करने वाले संगठनों में एक सवाल बड़ी तेजी से गूंज रहा है - क्या इस बार पास हो जाएगा महिला आरक्षण बिल। आंकडे इसकी उम्मीद जगाते हैं लेकिन इस मामले में संसद में जिस तरह का रूख दिग्गज राजनेताओं ने दिखाया है उससे यह राह बहुत आसान भी दिखाई नहीं दती। इस बाबत क्या संभावनाएं हैं &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:georgia;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;और क्या आशंकाएं :- पंद्रहवीं लोकसभा की स्थिति महिलाओं के लिहाज से थोड़ी बदली हुई होगी, क्योंकि इस बार आजादी के बाद सबसे ज्याद 59 महिला सांसद होंगी। जो कुल सांसदों का 10.07 प्रतिशत हैं। जिसमें 17 महिला सांसद 40 साल से कम उम्र की हैं। ये सुकून की बात संसद में बढ़ी महिला सांसदों की तादाद से उस वर्ग के दर्द को बेहतर आवाज दी जा सकेगी, जिसे हमेशा नजर अंदाज किया जाता रहा है। जनता ने पहली बार संसद में पचास से अधिक महिला प्रतिनिधियों को चुनकर भेजा है। हालांकि ये संख्या 1995 से संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी 33 प्रतिशत तय करने के लिए जारी कोशिशों के अनुरूप अभी भी नहीं है। यानी की 19 सालों से यह संघर्ष जारी है। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:georgia;font-size:180%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:georgia;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;मुश्किले कम होने की उम्मीद :- महिला आरक्षण विधेयक के प्रारूप में संसद के अंदर महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण की बात की जाती रही है लेकिन इसका विरोध हमेशा ही किया जाता रहा। संसद के भीतर भी कई बार पुरूषों की प्रधानता तब स्पष्ट रूप से दिखाई दी जब लालू पासवान और मुलायम जैसे नेताओं ने महिला आरक्षण का खुलकर विरोध किया। हो सकता है कि संसद में आने के बावजूद लालू और मुलायम की आवाज उनकी पार्टी के प्रदर्शन के कारण धीमी पड़ जाए। महिला आरक्षण बिल पास हो जाने का रास्ता सिर्फ इस एक वजह से आसान तो नहीं हो जाता लेकिन फिर भी थोड़ी सी ही सही, मुश्किलें कुछ कम तो होंगी ही।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:georgia;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;बदलेगी राजनीति की तस्वीर :- महिला आरक्षण बिल महिलाओं के कल्याण के लिहाज से उठाए गए तमाम कदमों में से सबसे अहम हो सकता है। इसके जरिए महिलाओं की सत्ता में भागीदारी सुनिश्रित होगी। यह एक विडंबना ही रही है कि इस देश में महिलाओं से जुड़े तमाम मुद्दों पर पुरूषों ने ही खूब राजनीति की और जो फैसले लेने थे वे लिए। यह एक मनोवैज्ञानिक तथ्य है कि पुरूषों का दिमाग और सोच महिलाओं से कई मायने में अलग होती है, इसमें ईगो जैसे कारक सबसे बड़ी भूमिका का निर्वाह करते हैं। फिर बात राजनीति की हो तो और भी मुश्किलें हो जाती हैं और यह संभावना खत्म सी हो जाती है कि इस बारे में कोई न्यायसंगत फैसला हो पाएगा। पुरूषों का माइंडसेट ही ऐसा होता है कि वे महिलाओं के बारे में उस तरह से सोच ही नहीं पाते। महिला आरक्षण बिल पास हो जाने के बाद इस बात की उम्मीद ज्यादा है कि संसद में अपनी तादाद के बूते पर महिलाएं महिलाओं के विकास और कल्याण के लिए अपना मॉडल बना पाएंगी। इससे रानीति की दिशा और दशा दोनों में बदलाव आ सकता है। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:georgia;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;दमदार उपस्थिति :- बीजेपी ने कांग्रेस के मुकाबले में कम महिला उम्मीदवार उतारी थी। फिर भी संसद में बीजेपी 13 महिला सांसद नजर आएंगी। सीपीएम के मजबूत गढ़ को ढ़हाने में लगी ममता बनर्जी की पार्टी से 5 महिला सांसद जीती हैं, मायावती की बसपा से 4 और जनता दल से दो महिला सांसद जीकर आई हैं। सोनिया गांधी के यूपीए अध्यक्ष के तौर पर इसका पैरोकार होना, बीजेपी की सुषमा स्वराज का सबसे मुखर आवाज बनना और वापंथियों में से वृंदा कारत का कमान संभालना महिला आरक्षण के बेहतर आसार थे। सोनिया गांधी के एक बार फिर सत्ता के केंद्र में हैं और सुषमा स्वराज भी मौजूद रहेंगीही। इनके अलावा मीनाक्षी नटराजन भी हैं जो एनएसयूआई की राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुकी हैं। उम्मीद की जारही है कि इन सबने मिलकर यदि जमकर मोर्चा संभाला तो बात बन जाएगी ऐसी उम्मीद की जा रही है।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:georgia;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;और जवान हुई संसद :- इस बार संसद में पुरूषों के साथ - साथ जो महिलाएं चुनकर पहुंचीं हैं उनमें 40 से 60 साल की उम्र के सांसदों की संख्या सबसे ज्यादा है। 56.90 फीसदी महिला सांसद इसी उम्र के बीच हैं। हालांकि पिछली संसद के मुकाबले इस बार संसद तें युवा महिला सांसद ज्यादा चुनकर आयी हैं। पिछली लोकसभा में 40 साल से कम उम्र की महिला सांसदों का प्रतिशत 17 था, जो इस बार बढ़कर 29.23 हो गया है। संसद में महिला सांसदों और खासकर युवा महिला सांसदों की बढ़ती तादात निश्चित रूप से सुकून देने वाली है। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:georgia;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;आ गई नई महिला ब्रिगेड :- लोकसभा में पुरानी कद्दावर महिला सांसदों के अलावा इस बार चुनकर आए नये चेहरों में प्रिया दत्त, श्रुति चौधरी, अनु टंडन, अगथा संगमा, विजयाशांति, हर सिमरन कौर, शताब्दी राय,मीनाक्षी नटराजन, मौसमी नूर और ज्योति मिर्धा आदि सभी पार्टियों से चुनकर आई सांसदों के कारण महिला आरक्षण बिल के पक्ष में माहौल बनने की संभावना है।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:georgia;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;मतदाताओं ने दिखया उत्साह :- मतदाताओं ने सार्वजनिक जीवन में महिला की सहभागिता को बढ़ाने के लिए इस बार रानीतिक दलों से ज्यादा उदारता दिखाई है। ऊपरीतौर पर कांग्रेस, वामपंथी और बीजेपी संसद में महिला आरक्षण की पैरवी करती रही हैं, लेकिन जब टिकट में बंटवोर का वक आया तो महिला प्रत्याशियों की हिस्सेदारी तय करने में सब आनाकानी करने लगे। 33 प्रतिशत टिकट महिला प्रत्याशियों को बांटने की बात पर सब बंगले झांकने लगे। बेमानी तर्क दिया गया कि महिलाएं नहीं जीत पाएंगी और पार्टी का नुकसान हो जाएगा। इस तर्क का आधार राजनीति को सिर्फ दबगं और अपराधी तत्वों का धधा मानना रहा। इस तर्क से अच्छे और बेहतर लोगों के राजनीति में आने का रास्ता रूकता है। तैंतीस प्रतिशत ना सही फिर भी सबसे ज्यादा टिकट कांग्रेस ने महिलाओं को दिया। नतीजा सबके सामने है। सबसे ज्यादा १९ महिला सांसद कांग्रेस की ही जीतकर आई हैं। इसमें बंसीलाल की पोती श्रुति चौधरी, नाथुराम मिर्धा की पोती ज्योति मिर्धा और अब्दुल गनी खान की नातिन मौसम नूर भी शामिल हैं। तीनों ने पहली बार संसद का रास्ता देखा है।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-3785854014231665453?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/3785854014231665453/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_26.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/3785854014231665453'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/3785854014231665453'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_26.html' title='क्या होंगे कामयाब।'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-1267294837299964455</id><published>2009-05-23T19:39:00.000-07:00</published><updated>2009-06-09T22:28:23.604-07:00</updated><title type='text'>साधना के पत्रकार ने की सहारा की महिला पत्रकार से बदतमीजी</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;भोपाल में बीजेपी नेता सुषमा स्वराज के निवास पर साधना चैनल के एस,पी,त्रिपाठी ने सहारा मध्यप्रदेश की पत्रकार मोनिका के साथ बदतमीजी की और लाइव टेलीकास्ट को रुकवा दिया मोनिका इसके बाद बेहद नाराज़ नज़र आई बाद में सुषमा स्वराज ने मोनिका को समझाया और साधना के पत्रकार की शिकायत उसके मालिकों से करने की बात कही भोपाल में सुषमा स्वराज के निवास पर एन,डी,टीवी की रुबीना खान शापू अपना लाइव कर रही थी उसके बाद सहारा समय मध्यप्रदेश की मोनिका मिश्रा ने सुषमा स्वराज का लाइव शुरू किया लाइव शुरू हुआ ही था कि साधना चैनल के एस,पी,त्रिपाठी ने सहारा समय का लैपल माइक निकलवा दिया इस घटना का विरोध करने पर मोनिका के साथ गैर जिम्मेदाराना सलूक किया गया इस घटना के बाद में मोनिका बेहद खफा नज़र आई और घटना कि शिकायत उन्होंने सहारा समय के अधिकारियों से की मोनिका की नाराज़गी और उनके साथ किये गए दुर्व्यवहार के लिए बीजेपी के मिडिया प्रभारी गोविन्द मालू क्षमा मांगते नज़र आए तब मोनिका ने कहा कि सारी बदतमीजी एस,पी,त्रिपाठी की हैं आप उसके लिए क्यों माफ़ी मांग रहे हैं इस पूरी घटना की जानकारी जब सुषमा स्वराज को लगी तो उन्होंने मोनिका को कूल रहने को कहा और घटना की शिकायत साधना के मालिकों से करने की बात कही सुषमा स्वराज ने मोनिका से यह भी कहा तुम्हे कोई दिक्कत आए तो मैं हूँ न तभी सुषमा स्वराज और उनके स्टाफ को जब कुछ पत्रकारों ने यह बताया की आप के साथ बैठ कर इंटरव्यू करने वाला पत्रकार एस,पी,त्रिपाठी अपनी ही साथी महिला पत्रकार के साथ यौन शोषण का आरोपी हैं तो सुषमा स्वराज और उनके स्टाफ के लोग भी सन्न रह गए सुषमा स्वराज के निवास पर मौजूद सभी पत्रकारों ने साधना चैनल के कथित पत्रकार के इस व्यवहार की कड़ी आलोचना की इस घटना का पूरा विडियो भी एक कैमरा मैंन ने रिकॉर्ड किया हैं जिसे साधना चैनल के मालिकों को भेजा जा रहा हैं &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-1267294837299964455?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/1267294837299964455/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_23.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/1267294837299964455'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/1267294837299964455'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_23.html' title='साधना के पत्रकार ने की सहारा की महिला पत्रकार से बदतमीजी'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-2210538378195846572</id><published>2009-05-20T20:02:00.000-07:00</published><updated>2009-05-20T08:05:49.919-07:00</updated><title type='text'>'विकास' ही 'हिन्दुत्व' है?</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;चुनाव में मिली पराजय की निर्मम समीक्षा ही भाजपा को दूर तक ले जा सकती है सत्ता की जबर्दस्त दावेदारी कर रही भारतीय जनता पार्टी की उतनी ही जबर्दस्त हार के बाद पार्टी में असंतोष के स्वर सामने आना स्वाभाविक है। छत्तीसगढ़ के एक नवनिर्वाचित आदिवासी सांसद ने तो सीधे भूतपूर्व "प्राइम मिनिस्टर इन वेटिंग" लालकृष्ण आडवाणी को निशाना बना दिया। कल तक श्री आडवाणी के बाद दूसरे नंबर के नेता के रूप में जिनकी छवि बनाई जा रही थी, वे नरेंद्र मोदी भी निशाने पर हैं। लोकसभा चुनाव में हार चुके कई भाजपाई अपनी हार के लिए नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार मानने लगे हैं। एक स्वर ऐसा भी उभर रहा है कि मुस्लिम विरोधी कट्टर हिन्दुत्व की राह छोड़कर भाजपा को अधिक सर्वसमावेशी आर्थिक विकास की राह पर चलना चाहिए। इसमें सबसे प्रमुख स्वर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान का है, जिन्होंने दिल्ली के एक अखबार से बात करते हुए संसद भवन पर हमले के दोषी अफजल गुरु की फाँसी को चुनावी मुद्दा बनाए जाने की आलोचना की है। उनका कहना था कि आतंकवाद के विरुद्ध सभी जातियों-धर्मों के लोगों का सम्मिलित स्वर सामने चाहिए -जैसा कि मुंबई हमले के समय हुआ- तभी इस खतरे से निबटा जा सकता है। इतना ही नहीं, उन्होंने "हिन्दुत्व" की एक नई व्याख्या दी है- "विकास ही हिन्दुत्व" है। बिजली-सड़क-पानी, बुनियादी ढाँचे का निर्माण, कृषि को लाभकर बनाना, पूंजी निवेश को बढ़ावा, महिला सशक्तीकरण आदि बुनियादी मुद्दे हैं और चुनावों में उन्होंने इन्हीं को उठाया था। यह अलग बात है कि विधानसभा चुनावों के विपरीत शिवराजसिंह चौहान अपने राज्य में लोकसभा चुनावों के दौरान भाजपा को वे नतीजे नहीं दे पाए। पिछली बार राज्य की 29 में से 25 सीटें भाजपा के पास थीं, इस बार सिर्फ 16 हैं। बहरहाल किसी चुनाव में हार-जीत के बहुत से कारण होते हैं जिनमें उम्मीदवारों का चयन भी शामिल है, जिसमें लगता है कि श्री चौहान की यह बात सुनी नहीं गई कि पुरानों की बजाए नयों को टिकट दिया जाए। लेकिन फिर भी चुनाव में मिली आंशिक पराजय के बाद भी शिवराजसिंह चौहान इस दिशा में सोच रहे हैं तो यह उनके दृढ़ विश्वास का द्योतक है कि यही रास्ता भाजपा को दूर तक ले जा सकता है। लेकिन क्या संघ-परिवार को, जो भाजपा के संगठन और विचारधारा का मुख्य स्रोत है, ये विचार पचेंगे? कहीं उनके इस "साहस" को "कायरता" न मान लिया जाए!&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-2210538378195846572?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/2210538378195846572/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_20.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/2210538378195846572'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/2210538378195846572'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_20.html' title='&apos;विकास&apos; ही &apos;हिन्दुत्व&apos; है?'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-9157958080602643681</id><published>2009-05-16T21:12:00.000-07:00</published><updated>2009-05-16T09:28:13.845-07:00</updated><title type='text'>लोकसभा चुनाव 2009: शुरुआती रुझान और परिणाम</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;&lt;em&gt;भारत में लोकसभा चुनावों के लिए मतदान 13 मई को पूरा हो गया. लोकसभा की कुल 543 सीटों के लिए मतों की गिनती 16 मई, शनिवार को सुबह से शुरु हुई है.&lt;br /&gt;अब तक हुई मतगणना के अनुसार विभिन्न राजनीतिक दलों को मिली बढ़त और परिणाम का आंकड़ा इस प्रकार है. बहुमत 272, कांग्रेस197, भाजपा112 , वाम मोर्चा24, अन्नाद्रमुक फ़्रंट10, बसपा20, समाजवादी पार्टी22 , तेलुगू देशम6 , जनता दल - यू19, बीजू जनता दल14 , आरजेडी4 , लोक जनशक्ति0 , द्रमुक18 , शिवसेना11 , राष्ट्रवादी कांग्रेस9 ,अन्य63 &lt;/div&gt;&lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-9157958080602643681?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/9157958080602643681/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/2009.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/9157958080602643681'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/9157958080602643681'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/2009.html' title='लोकसभा चुनाव 2009: शुरुआती रुझान और परिणाम'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-893121133739133239</id><published>2009-05-14T20:07:00.000-07:00</published><updated>2009-05-14T08:17:04.293-07:00</updated><title type='text'>आईपीएल बनाम राष्ट्रीयता</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;&lt;em&gt;&lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;&lt;em&gt;चारों ओर माहौल गर्म है, कहीं शिल्पा खुश तो कहीं प्रीती, रोने को तैयार हैं तो बस हमारे शाहरुख! ललित मोदी के उर्वर मस्तिष्क से पैदा हुए क्रिकेट के इस वामनावतार में एक झटके में ही हिन्द महासागर की विस्तार लांघ ली और चुनौती दे दी पवनपुत्र को और साथ ही पैदा कर दिया एक अपनी तरह की अनोखी राष्ट्रीयता को। बाजार खुश है और जनता जनार्दन भी साथ में ठुमका लगा रही है कि अब तो जीत हमारी है। बंगाल को हमने तो हरा दिया आखिर मराठा गौरव हमसे है और फिर दिल्ली की जवां मर्दी के सामने बेचारे औरों की क्या बिसात! हम हिन्दुस्तानी कम, मराठा ज्यादा या फिर राजपूताना कम तो द्रविड़ क्षेत्र का दम खम रखने वाले ज्यादा हैं खेल के बहाने धन की शर्मिन्दगी से की जा रही नुमाइश अनेकों सवालात पैदा तो करती ही है साथ ही हमें यह भी सोचने पर विवश करती है कि क्या हमारी भारतीय होने की पहचान कहीं पीछे तो नहीं छूटती जा रही। इन सब के पीछे कुछ ऐसे सवालात भी हैं जो वेताल की तरह आज भी कंधे पर टिकने को तैयार नहीं। एक सवाल तो यह है कि आई पी एल के मैचों को भारत से सरकाकर दक्षिण अफ्रिका से जाना। इसने हमारी जहाँ सुरक्षा मुहैया कराने के दावों की मिट्टी पलीद कर दी, वहीं यह प्रश्न भी पैदा किया कि जब हमारी सरकार मुठ्ठी भर खिलाडियों को सुरक्षा मुहैया नहीं करा सकती तो अवाम का क्या होगा।सवाल सिर्फ़ इतना नहीं है कि हमारी सुरक्षा की पोल पट्टी खुली बल्कि उससे भी बडा़ सवाल यह है कि इसे लेकर जनता में कोई प्रतिक्रिया भी नहीं हुई और किसी पार्टी ने इसे मुद्दा बनाने लायक भी नहीं समझा, चुनाव में नहीं तो कम से कम देश की साझा जिम्मेदारी ही समझ कर। दरअसल, यह पैसे का खेल है और इसमें किसी भी दल को क्या आपत्ति हो सकती है जब उसे भी इसमें कुछ अपने हिस्से के लिए हरे हरे नोट दिखें। कहने की बात नहीं अब सुर्खियाँ और मीडिया का न्यूज सेंस किसानों की आत्म हत्या बनता ही नहीं। दरअसल अब न्यूज सेंस की सोंच और तय करने के तरीके, समी करण सभी कुछ बदल दिए हैं बाजार की शक्तियों ने। बाजार तय कर रहा है कि क्या आना है सुर्खियों में और कहाँ किस खबर को जगह मिलनी है। संस्कृति की नई परिभाषा गढ़ने के नाम पर मीडिया इतना आगे निकल चुका है कि अब उसे न तो पब कल्चर में ही कोई बुराई दिखती है और न ही गे मैरिज में ही। आखिर, इन्हें खबर बनाना मीडिया का काम होना कोई गलत नहीं पर वैचारिक जामा पहनाना तो गलत है ही। आईपीएल का होना गलत नहीं पर यह सवाल पैदा तो करता है कि आखिर यह किस तरह की राष्ट्रीयता है, क्रिकेट के नाम पर? क्या यह ललित मोदी की "नेशनालिटी" है या फिर विदर्भ के किसानों का अपने "जन गण मन का अधिनायक" होना? क्या यह उत्तर है उन आधी से भी ज्यादा कुपोषित कल के नौनिहालों का या फिर यह दम खम है "करिबो, लडि़बो, जीतीबो" का या फिर हताशा है उन विस्थापित भारतवंशियों का अपनी जडो़ को तलाश करने का। शायद हाँ भी, शायद नहीं भी, पर इतना तो जरुर है कि पूँजीवाद का यह "पेप्सी पैक्ड जिन्न" "जेन्टलमैन के गेम" से नाभिनालबद्ध है।&lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-893121133739133239?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/893121133739133239/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_14.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/893121133739133239'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/893121133739133239'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_14.html' title='आईपीएल बनाम राष्ट्रीयता'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-8764097778300176765</id><published>2009-05-12T09:48:00.000-07:00</published><updated>2009-05-12T22:38:18.776-07:00</updated><title type='text'>ये कौन है पत्रकार के भेष में ?</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SgpSw-1V3-I/AAAAAAAAAUE/lr22w8ErKGc/s1600-h/press.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5335167710027702242" style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 128px; CURSOR: hand; HEIGHT: 200px" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SgpSw-1V3-I/AAAAAAAAAUE/lr22w8ErKGc/s200/press.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-family:lucida grande;"&gt;आजकल पत्रकार को सिर्फ पत्रकार होना जरूरी नही है . पहली शर्त की वह जुगाडू हो, फुटेज नही मिले तो किसी से जुगाड़ कर उसे अपनी चैनल पर एक्सक्लूसिव बताकर चला सके . दूसरी शर्त की अगर आपको किस्मत से ब्यूरो बनने का मौका मिल जाए तो फिर आपको स्ट्रिंगर की पकी पकाई खिचडी पर अपने नाम की मुहर लगाते आना चाहिए . जमाना विज्ञान का है तो हमारे जुगाडू भाइयो ने कई चेंनल के ऍफ़ टी पी नंबर और पासवर्ड का भी जुगाड़ कर रखा है , करना क्या ? बस इधर का माल उठाया [ कापी किया ] और अपनी चेनल को भेज दिया . लो हो गया ना काम वह भी घर बैठे . अब भाई लोगो को इसमें गलत कुछ नही लगता , उनके पास तर्क भी है , जब एक चेनल दूसरी चेनल पर से खबर उठाकर उसे एक्सक्लूसिव बताकर चला सकती है तो वह एसा क्यों नही कर सकते ?यह तो हुई इलेक्ट्रानिक मीडिया की बात अब हम आपको मिलवाते है ऐसे पत्रकारों से जो प्रिंट मिडिया से है . मेहनतकश पत्रकारों लिखी गई खबर को ज्यों का त्यों अपने समाचार पत्र को भेज देते है, ये परजीवी पत्रकार कहलाते है . कुछ तो निर्जीवी भी है जो करते कुछ नही सिर्फ प्रेस का ठप्पा लगाकर अपनी शान बघारतेहै .एक किस्म और है चापलूस पत्रकारों की .. ये कोम तब भी पायी जाती थी जब राजवंश हुआ करते थे .. फर्क सिर्फ इतना है की उस जमाने में इन्हें भांड कहा जाता था . जिनका काम राजघरानों की शान में कसीदे पड़ना होता था . राजे- रजवाडे तो रहे नही ,भांड जरुर रह गये , जो आज भी अपनी खानदानी परम्परा का बखूबी सेनिर्वाह कर रहे है ..अब बारी है मुफ्तखोरों की ..... पत्रकारों की जमात में शामिल ऐसे मुफ्तखोरों के दर्शन आपको इसी पत्रकार वार्ताओं में जरुर मिल जायेंगे जहाँ वार्ता पश्चात भोज हो . ये बिनाबुलाये मेहमान अपने तगडे सूत्रों के बूते ऐसीपत्रकारवार्ताओं में जरुर पहुँच जाते है , वार्ता में अनाप-शनाप सवाल पूछकर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाना इनकी आदत होती है . ये आखरी दम तक गिफ्ट मिलने की आस नही छोड़ते .सार्वजनिक कार्यक्रमों में कैमरे के दम पर पत्रकारिता का ढोल पीटने वाले पत्रकारों की नई किस्म भी बाजार में आ गई है . जो कार्यक्रम की रिकार्डिंग तो पूरी करते है फिर उसे घर ले जाकर रख देते है .. क्या करे किसे दिखाए ? इनमे फोटो कैमरे लेकर घुमने वालों की संख्या तो दिन रात बड़ रही है .. आप पत्रकारिता के पेशे में है ..तो ऐसी पत्रकारिता करने वालो के बारे में आपकी क्या राय है ?(जिस जगह के थे गायक किशोर कुमार,उसी खंडवा के है अनंत जब जब पड़े खलल तब तब दे दखल )&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-8764097778300176765?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/8764097778300176765/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_12.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/8764097778300176765'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/8764097778300176765'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_12.html' title='ये कौन है पत्रकार के भेष में ?'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SgpSw-1V3-I/AAAAAAAAAUE/lr22w8ErKGc/s72-c/press.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-6428178024792404844</id><published>2009-05-11T02:45:00.001-07:00</published><updated>2009-05-11T02:47:57.047-07:00</updated><title type='text'>'दादा ऐसे नहीं जैसी उनकी छवि बनाई गई'</title><content type='html'>&lt;em&gt;ओर जहाँ देश में ऐसे युवा नेताओं की लंबी सूची है जिन्हें राजनीति विरासत में मिली और अपनी विरासत के बल पर लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं तो दूसरी ओर प्रतिभा आडवाणी हैं जो यह नहीं चाहती कि उन्हें लोग सिर्फ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की बेटी होने के कारण जानें।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लिहाजा प्रतिभा ने कई साल तक अपने नाम के आगे आडवाणी नहीं लगाया। स्वयं इन्फोटेनमेंट नाम से टीवी प्रोडक्शन कंपनी चलाने वाली प्रतिभा आडवाणी ने कहा कि, राजनीति पेशा नहीं है कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को मिले। यदि देश और जनता के प्रति समर्पण की भावना नहीं है तो राजनीति करने का हक भी नहीं। भले कोई कितने बड़े राजनीतिक परिवार का क्यों न हो।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दादा ने (प्रतिभा अपने पिता आडवाणी को दादा कहती हैं) कभी भी मुझे या परिवार के किसी सदस्य को राजनीति में आने के लिए प्रेरित नहीं किया। इसका एक ब़ड़ा कारण तो यही है कि दादा राजनीति में हमेशा से वंशवाद का विरोध करते रहे हैं और वह जो कहते हैं सो करते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कई अहम मुद्दों और भावी योजनाओं पर प्रतिभा आडवाणी ने विशेष बातचीत में अपने विचार रखे । पेश है उनसे बातचीत के अंशः-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रश्न : हाल ही में आपने गाँधीनगर में अपने पिता लालकृष्ण आडवाणी के लिए प्रचार किया और वोट माँगे। कैसा अनुभव रहा?&lt;br /&gt;उत्तर : दादा पाँचवीं बार गाँधीनगर से लोकसभा चुनाव लड़े हैं। हर बार हमारा परिवार लोकतंत्र के इस पर्व में पूरे उत्साह से शामिल होता आया है। इस बार भी मैंने अपनी आहुति डाली। दादा के लिए सात-आठ दिन प्रचार किया। हम घर-घर जाते और लोगों से वोट माँगते। छोटी सभाएँ करते।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हालाँकि प्रचार के दौरान गाँधीनगर की जनता से हमें इतना प्यार मिला कि लोग कहते कि आपको आने की कोई जरूरत नहीं थी। दादा इस बार रिकॉर्ड मतों से जीतेंगे और प्रधानमंत्री बनेंगे। मैं मानती हूँ कि यह उनका दादा के लिए प्यार है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भाजपा ने आडवाणी जी को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के रूप में पेश किया इसलिए लोगों में पहले से अधिक उत्साह दिखा। प्रचार के दौरान मुझे सबसे ज्यादा हैरान स्विस बैंक में जमा काले धन के बारे में गाँववासियों की जानकारी ने किया। उनसे जब मैं इस बारे में पूछती तो वे बताते थे कि उन्हें पता है कि स्विस बैंक में देश का पैसा जमा है। शहरी क्षेत्रों में मुझे महँगाई का मुद्दा अधिक प्रभावी लगा। खासतौर से महिलाएँ इस बारे में काफी बातें करती थीं। गाँधी नगर में कानून व्यवस्था इतनी अच्छी है कि रात को भी कार्यक्रमों में महिलाओं की अधिक भागीदारी देखने को मिलती थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रश्न: आप दादा के लिए पहले भी प्रचार करती रही हैं, कैसा अंतर देख रही हैं?&lt;br /&gt;उत्तर: मुझे याद है, 1989-91 में जब बोफोर्स का मुद्दा काफी गर्माया हुआ था मैं तब भी दादा के प्रचार में गई थी। मुझे सबसे ब़ड़ा अंतर तो यही लग रहा है कि लोगों में जागरूकता आई है। लोग मुद्दों पर खास कर विकास की बात करते हैं। युवा पीढ़ी चाहती है कि हमारा देश दुनिया में सबसे शक्तिशाली बने। इसलिए दादा भी 21वीं शताब्दी का भारत बने, इस पर जोर देते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रश्न : राजनीति में वंशवाद तेजी से ब़ढ़ रहा है। इसे आप किस रूप में देखती हैं?&lt;br /&gt;उत्तर: मैं मानती हूँ कि राजनीति पेशा नहीं है कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को मिले। मेरे लिए राजनीति का मतलब देश और जनता के लिए पूर्ण समर्पण से है। यदि देश और जनता के प्रति समर्पण की यह भावना नहीं है तो राजनीति करने का हक भी नहीं। भले कोई कितने बड़े राजनीतिक परिवार का क्यों न हो।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हालाँकि मैं यह भी मानती हूँ कि यदि कोई व्यक्ति योग्य है और देश और जनता की ईमानदारी से सेवा कर सकता है तो भले वह राजनीतिक परिवार का क्यों न हो राजनीति में आना बुरा नहीं। बुरा तब लगता है जब पार्टी एक ही परिवार के इर्द-गिर्द सिमट कर रह जाए। परिवारवाद वह है जब सिर्फ एक ही परिवार के लोगों को महत्व मिले और पूरी पार्टी उस परिवार के नाम से पहचानी जाए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रश्न: क्या आप राजनीति में आ रही हैं? दादा राजनीति में आने के लिए आपको प्रेरित नहीं करते?&lt;br /&gt;उत्तर: मुझे अपना टीवी का कॅरिअर सबसे अधिक पसंद है। इसलिए राजनीति में आने का फिलहाल कोई सवाल नहीं है। मेरी राजनीति सिर्फ दादा के प्रचार तक सीमित है। दादा ने कभी भी मुझे या परिवार के किसी भी दूसरे सदस्य को राजनीति में आने के लिए प्रेरित नहीं किया। इसका एक बड़ा कारण तो मुझे यही लगता है कि दादा अपने पूरे जीवन में वंशवाद का विरोध करते रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रश्न : आपने राजनीति को करिअर क्यों नहीं बनाया?&lt;br /&gt;उत्तर: मैं अपने बल पर कुछ करना चाहती हूँ ताकि लोग मुझे सिर्फ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की बेटी होने के कारण ही नहीं जानें-पहचानें। इसलिए मैंने कई साल तक अपने नाम के आगे आडवाणी नहीं लगाया। सिर्फ प्रतिभा लिखती थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;फिल्मों का मुझे और दादा दोनों को शौक रहा है। अपने काम से अपनी पहचान बनाऊँ इसलिए 'स्वयं इन्फोटेनमेंट' नाम से टीवी प्रोडक्शन कंपनी भी बनाई। मैं मानती हूँ कि यदि हम जनता की सेवा नहीं कर सकते तो हमें राजनीति में नहीं आना चाहिए और आंख मूंदकर अभिभावकों का अनुसरण नहीं करना चाहिए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रश्न: आडवाणी जी को कैसी फिल्में अच्छी लगती हैं? उनके कौन से पसंदीदा हीरो हैं?&lt;br /&gt;उत्तर: दादा को हर तरह की फिल्में अच्छी लगती हैं। संजीव कुमार उनके पसंदीदा हीरो रहे हैं। आमिर खान का अभिनय भी उन्हें अच्छा लगता है। 'तारे जमीं पर' और 'वेडनेस डे' फिल्में हाल ही में देखी थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रश्न: आडवाणी जी की छवि एक कट्टर नेता की क्यों बनी। आप क्या मानती हैं?&lt;br /&gt;उत्तर: मैं मानती हूँ कि मेरे दादा ऐसे नहीं जैसी उनकी छवि बना दी गई। मुझे बड़ा दुख होता है जब उनके बारे में कट्टरवादी हैं जैसे शब्द सुनती या पढ़ती हूँ। दादा इतने कोमल हैं कि किसी का दिल नहीं दुखा सकते। वह सख्त भी नहीं हैं तो कट्टर कैसे हो सकते हैं? मीडिया ने भी उनकी नकारात्मक छवी बनाई। मैं उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखती हूँ, जिसके दिल में किसी के लिए भी मैल नहीं है। वे बहुत साधारण और सहज हैं। मुझे गर्व है कि मैं आडवाणी जैसे पिता और कमला जी जैसी माँ की बेटी हूँ। मेरी माँ वास्तव में अन्नूर्णा है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रश्न: तो क्या रामजन्म भूमि आंदोलन के चलते उनकी छवि प्रभावित हुई?&lt;br /&gt;उत्तर : नहीं, मैं ऐसा नहीं मानती। अयोध्या आंदोलन वैचारिक आंदोलन था। उस आंदोलन से भाजपा और दादा दोनों को ही राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिली। &lt;/em&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-6428178024792404844?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/6428178024792404844/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_11.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/6428178024792404844'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/6428178024792404844'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_11.html' title='&apos;दादा ऐसे नहीं जैसी उनकी छवि बनाई गई&apos;'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-5444796924218850043</id><published>2009-05-09T20:45:00.000-07:00</published><updated>2009-05-09T08:46:34.783-07:00</updated><title type='text'>मध्य प्रदेश ही मेरा कुरूक्षेत्र : शिवराज सिंह चौहान</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;&lt;em&gt;भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी का यह कहना कि भाजपा में नरेन्द्र मोदी के अलावा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी आने वाले समय में प्रधानमंत्री पद के दावेदारों में शामिल हैं श्री शिवराज सिंह चौहान की पिछले कुछ वर्षो में भारतीय जनता पार्टी बढ़े कद को प्रदर्शित करता है। पिछले कुछ वर्षो में श्री मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहानसबसे प्रमुख नेताओं में उभर कर आए हैं। वर्ष २००३ के विधानसभा चुनावों में भाजपा को प्रदेश में भारी बहुमत मिला था। फिर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कुर्सी उमा भारती, बाबूलाल गौर से होते हुए नवंबर २००५ में श्री शिवराज सिंह चौहान तक पहॅुुची। पिछले साल राज्य में हुए विधानसभा चुनावों को उनकी नेतृत्व परीक्षा के रूप में देखा जा रहा था और भाजपा को दोबारा भारी बहुमत से सता में लाकर वो इस परीक्षा में पास भी हो गए। मुख्यमंत्री पद की दोबारा शपथ लेने के साथ ही चौहान ने केन्द्र की कांग्रेसनीत यूपीए सरकार के विरूद्व बिगुल बजा दिया है। उन्होंने प्रदेश की जनता के अधिकारों की रक्षा और केन्द्र सरकार की भेदभाव नीतियों के विरूद्व जन आंदोलन खड़ा करने में कामयाबी हासिल की। बिजली और कोयले के मुद्दे पर श्री चौहान ने कोयला सत्याग्रह और दिल्ली में कोयला मार्च कर साबित कर दिया कि वह वास्तव में आम आदमी के मुख्यमंत्री हैं। शिवराज को भले ही भाजपा के अहम नेताओं में गिना जाने लगा हो, लेकिन वो खुद को मध्य प्रदेश तक ही सीमित रखना चाहते हैं। भविष्य में केंन्द्र में बड़ी भूमिका के सवाल पर शिवराज कहते है कि मध्यप्रदेश के विकास के सिवा उनके दिमाग में और कोई बात आती ही नहीं हैं और मध्यप्रदेश ही उनका कुरूक्षेत्र हैं। शिवराज सिंह चौहान इस बात पर भी जोर देते हैं कि लालकृष्ण आडवाणी पार्टी और देश के श्रेष्ठतम नेता हैं और अरडवाणी के बाद भी पार्टी कई नेता हैं जो उनसे ज्यादा सक्षम हैं। राजनीति सेवा, विकास और निर्माण का सबसे सशक माध्यम है राज्य में शिवराज की लाडली लक्ष्मी और सामूहिक विवाह जैसी योजनाओं का क्रियान्वयन जिसे मध्य प्रदेश के लोगों द्वारा खूब पसंद किया गया हैं, लेकिन बिजली, पानी स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे कई गंभीर मुद्दे हैं जिनसे जनता परेशान है। राज्य में मूलभुत सुविधाओं के अभाव के बारे में पूछने पर श्री चौहान गंभीर हैं और वह उन्हें प्राथमिकता के तौर पर हल कर प्रदेश वासियों को खुशहाल जिंदगी देना चाहते हैं। लेकिन वह ये भी मानते हैं कि आजादी के बाद ६० साल में जो काम होने चाहिए थे वो नहीं हुए। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश को पूरी तरह विकसित करने में कुछ और समय लगेगा। शिवराज सिंह चौहान की सफलता का श्रेय विपक्षी पार्टी कांग्रेस को भी जाता हैं। कांग्रेस राज्य में पूरी तरह विभाजित है। लेकिन मुख्यमंत्री का कहना है कि उन्हें जनादेश उनके काम की वजह से ही मिला है। न कि कांग्रेस पार्टी की नाकामियों की वजह से। राजनीति सेवा, विकास और निर्माण का सबसे सशक्त माध्यम लाडली लक्ष्मी की प्रेरणा श्री शिवराज सिंह चौहान को कहां से मिली, इस पर उनका कहना है कि बचपन से ही मैंने लड़कियों के साथ अन्याय होते हुए देखा। लिगं अनूपात लगातार गिरता जा रहा है। मैंने सोचा कि केवल कानून से कुछ नहीं होगा और भ्रूण हत्या को तब तक नहीं रोका जा सकता, जब तक कि लड़कियों को बोझ से वरदान न बना दें। मुख्यमंत्री श्री चौहान को सड़क पर संघर्ष करने में भाजपा की राष्ट्रीय नेता एवं चुनाव प्रभारी सुषमा स्वराज की उपस्थिति से भी अधिक बल मिला है। अपने विकास कार्यो के बल पर दोबारा सता में गए शिवराज सिंह चौहान ने आत्मिविश्रास और काम के प्रति प्रेरणा बढी है। लोकसभा चुनाव के परिणाम १६ मई को आने है। अब देखना ये देखना ये है कि विधानसभा चुनावों की तरह शिवराज सिंह चौहान इन चुनावों में भी राज्य में सरकार विरोधी लहर की धारणा को धूल चटा पाते हैं या नहीं।&lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-5444796924218850043?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/5444796924218850043/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_09.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/5444796924218850043'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/5444796924218850043'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_09.html' title='मध्य प्रदेश ही मेरा कुरूक्षेत्र : शिवराज सिंह चौहान'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-2575503235890037675</id><published>2009-05-08T09:45:00.000-07:00</published><updated>2009-05-07T21:47:40.537-07:00</updated><title type='text'>राजनैतिक घमासान में सहारा ,वीओआई टॉप पर</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:arial;"&gt;&lt;em&gt;&lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:arial;"&gt;&lt;em&gt;मध्यप्रदेश का साधना न्यूज़ चैनल गलत खबरें दिखाने के कारण दर्शकों का भरोसा खोता जा रहा हैं पिछले तीन महीनों में इस चैनल का ग्राफ जितनी तेजी से नीचे आया हैं उसकी कल्पना तो चैनल चलाने वालों ने भी नहीं की थी इस चैनल के कर्ताधर्ता अब चैनल की चूल्हे हिलने का कारण तलाशने में लगे हैं मध्यप्रदेश के न्यूज़ चैनल में सहारा समय जैसे तैसे अपनी पोजीशन बचाए रखने की जद्दो जहद में लगा हैं वीओआई ने पिछले तीन हफ्तों में बेहतरीन खोज ख़बरों और विशिष्ठ राजनैतिक विश्लेषण के जरिये,साधना चैनल कि जगह तक पहुचने का अभियान शुरू कर दिए हैं ऐसे में ईटीवी मध्यप्रदेश भी अपनी पोजीशन बचाए रखने में कामयाब हुआ हैं मध्यप्रदेश के लोकसभा चुनाव में दलों के साथ इस बार प्रांतीय समाचार चैनल्स की अबरू भी दांव पर थी कई चैनल में काम करने वाले पोलटिकल एडीटर और कुछ ब्यूरो हेड तो इस बार "एकदम दलाल" की भूमिका में नज़र आए और कुछ लाख रुपए मिल जाये इसके लिए नेताओं की चरण रज अपने माथे पर रगड़ते रहे एक चैनल के पोलटिकल एडीटर ने तो २५ लाख का विज्ञापन मिल जाए इसके लिए मध्यप्रदेश भाजपा मुख्यालय में चुनाव प्रबंधन से जुड़े लोगो के पैर छुए और यह तक कहा कि जब २५ लाख का विज्ञापन पहुंचेगा तब ही मुझे एक लाख रूपये महीना मिलेगा इस दलाल किस्म के पोलटिकल एडीटर के किस्सों का खुलासा इसके साथ गए एक रिपोर्टर ने ही किया विज्ञापन कि हमाम में पहले यह काम मार्केटिंग के लोग किया करते थे अब कथित पत्रकारों को भी इस हमाम में सिर्फ इस लिए नंगा होना पड़ रहा हैं क्योंकि वे जिस पद पर रखे गए हैं वे न उस पद के लायक हैं न उनमे इतनी योग्यता हैं कि अपनी ख़बरों से चमत्कार कर चैनल का कुछ भला कर सकें २००८ के विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा पैसे उगाही के आरोप वीओआई चैनल पर लगे थे तब वहाँ के हेड एस.पी.त्रिपाठी अपनी नौकरी बचाने के लिए तरह तरह के हथकंडे इस्तेमाल कर रहे थे लेकिन उनकी छवि का नकारात्मक असर चैनल पर पड़ा और अच्छा भला चैनल रेस में शुरू होने से पहले ही हार गया वीओआई चैनल में लड़कीबाजी के किस्सों ने चैनल का दम ही निकाल दिया था लेकिन २००९ के लोकसभा चुनाव से पहले एस.पी.त्रिपाठी को चैनल से वैसे ही किक आउट कर दिया गया जैसा सहारा समय ने उसकी धोखाधडी पकड़ने के बाद किया था एस.पी.त्रिपाठी के वीओआई से बहार जाने का सीधा लाभ चैनल को मिला और वीओआई कि सेहत तो सुधरी ही उसकी बिगड़ी इमेज भी मध्यप्रदेश में ठीक हुई ऐसे में चैनल कि प्रभारी बनाई गई शिफाली शर्मा ,नीरज श्रीवास्तव ,सुरह नियाजी और रवि दुबे जैसे रिपोर्टर ने अपने दमख़म के साथ चैनल को आगे बढ़ाने में जी जान लगा दिया , जिसका नतीजा यह रहा कि वीओआई जनता के बीच में अपनी छवि सुधारने के साथ लोकप्रियता के मामले में साधना न्यूज़ से आगे आ गया पिछले डेढ़ महीने के आक्रामक तेवरों ने तो वीओआई को जनता में खासा लोकप्रिय बना दिया हैं वीओआई चैनल अपना ग्राफ जैसे जैसे बढ़ता जा रहा हैं साधना चैनल उसी स्पीड से जमीन पर आ रहा हैं यह भी इतेफाक हैं कि पहले एस,पी,त्रिपाठी के रहते वीओआई का भट्टा बैठ गया था और अब जब से एस.पी.त्रिपाठी साधना चैनल में पहुंचे हैं तब से साधना चैनल का भट्टा बैठ रहा हैं दिल्ली में बैठे साधना चैनल के निदेशक इस बात से खासे परेशान हैं , उनका अच्छा भला चलता हुआ चैनल डांवाडोल क्यों हो रहा है साधना न्यूज़ के कुछ रिपोर्टर ने दिल्ली में चैनल के मालिकों को त्रिपाठी का कच्चा चिटठा भेजा हैं साधना चैनल के प्रमुख अब एस.पी.त्रिपाठी के बारे में पूरी जाँच पड़ताल कर रहे है कि कहीं उनकी नेगेटिव छवि का असर तो चैनल को नुकसान नहीं पहुंचा रहा है वैसे भी एस,पी,त्रिपाठी के साधना पहुँचने के बाद चैनल का आक्रामक छवि भोथरी हो गई हैं साधना और वीओआई कि इस जंग में फ़िलहाल तो लड़खडाता वीओआई न सिर्फ संभल गया है उसने सभी रीजनल चैनल को अपनी आक्रामकता से खुली चुनौती भी दे दी हैं ऐसे में सहारा से वीओआई पहुंचे अखलाख और वरिष्ठ पत्रकार किशोर मालवीय का शानदार अंदाज ख़बरों में साफ़ नज़र आता हैं खबरिया चैनल की इस उठापटक के बीच भी सहारा की मध्यप्रदेश में बादशाहत कायम हैं बेहतरीन रिपोर्टर और नपी तुली ख़बरों ने उसे टॉप पर बना रखा हैं संजय रायजादा ,प्रकाश तिवारी ,मनोज सैनी ,श्रुति निमिष सहारा को नंबर वन बनाये रखने में पूरी ताकत से लगे रहते हैं, वही विश्वसनीयता की कसौटी पर सहारा के बाद ईटीवी अब भी नंबर दो पर कायम हैं कुछ सेगमेंट में तो वह सहारा को भी मात दे रहा हैं विधानसभा चुनावों से लोकसभा चुनावों तक जगदीप सिंह बैस , अनिरुद्ध तिवारी , संदीप भम्मरकर , अनुराग श्रीवास्तव जैसे पत्रकार अपने चैनल की विश्वसनीयता बनाये रखने में सफल साबित हुए हैं मध्यप्रदेश के आकाश से जमीन तक खबरिया चैनल की इस लडाई में एक पुरानी कहावत सच साबित होती नज़र आ रही हैं कि " झूठे का मुंह काला और सच्चे का बोलबाला " &lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-2575503235890037675?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/2575503235890037675/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_07.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/2575503235890037675'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/2575503235890037675'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_07.html' title='राजनैतिक घमासान में सहारा ,वीओआई टॉप पर'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-4052929119282406746</id><published>2009-05-07T10:06:00.000-07:00</published><updated>2009-05-06T22:08:22.578-07:00</updated><title type='text'>मध्यप्रदेश का हर मास्टर नरेंद्र मास्साब जैसा हो</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;शीर्षक देखकर आप चौंक गए होंगे। ये नरेंद्र मास्साब कौन हैं? यह प्रश्न आपके ज़ेहन में कौंध रहा होगा। जी हां, ये नरेंद्र मास्साब मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के बड़े भाई हैं। यूं तो मास्साब विगत तीन बरसों से राजनीतिक-प्रशासनिक वीथिकाओं और रेत, खेत और जैत की गलियों में बहुचर्चित हैं। रेत इनके लिए गाय-माता समान है। इन्हें अब तक जो कुछ मिला है, वह रेत के उत्खनन से ही मिला है। जैत इनका पैतृक गांव हैं, जहां ये एक सरकारी स्कूल में मास्टर हैं। 'हैं शब्द को आप और हम विलोपित कर सकते हैं, यह विलोपन क्रिया के पीछे रेत की रीत-राग है। आदरणीय नरेंद्र मास्साब विगत विधानसभा चुनाव के दौरान भी चर्चाओं में आए थे, जब कुछ जलकुकड़े कांग्रेसियों और उमा भारती के चंद गरीब गुरबे कार्यकर्ताओं ने नरेंद्र मास्साब की एक सीडी जारी की थी। उस सीडी में नरेंद्र मास्साब को नोटों की गड्डियां लेते दिखाया गया था। सभी इस विषय-बिन्दु पर यकीन कर रहे थे। उनके य$कीन से हमें कोई लेना-देना नहीं है। ऐसा हो ही नहीं सकता।&lt;br /&gt;प्रदेश के मुख्यमंत्री के बड़े भाई की भूमिका मैं इसलिए बांध रहा हूं, क्योंकि भोपाल पुलिस द्वारा रचित इनकी एक एब्सट्रेक्ट फिल्म की शूटिंग चल रही है। इनकी इस फिल्म का विषय वस्तु है 'चोरी या डकैती ? इस फिल्म&lt;br /&gt;के बारे स्वयं नरेंद्र मास्साब का अंत:करण कहता है कि चूंकि यह फिल्म सच्ची घटना के आधार पर है, लिहाज़ा इसका विषय पूर्ण सच यानी डकैती पर होना चाहिए। जबकि शिवराज के शुभचिंतक और भोपाल पुलिस इस फिल्म की विषय वस्तु 'चोरी पर केंद्रीत करना चाहती है। फिल्म का मुहूर्त सच्ची घटना के आधार पर विगत 22 मार्च 2009 को हो गया था।&lt;br /&gt;जब नरेंद्र मास्साब के भोपाल स्थित अलकापुरी के घर ग्रिल निकालकर उन्हें और उनके परिवारजनों को कैद करके अलमारी के ताले तोडक़र लाखों रुपए ले उडऩे की पहली पटकथा सामने आई। दूसरी पटकथा 20 लाख रुपए से ज्य़ादा की डकैती होने की आई। फिर शिवराज के मित्रों, साधना भाभी साब और पुलिस की गहन मंत्रणा के बाद यह कथा केवल चार लाख रुपए की चोरी पर आकर टिक गई। इस प्रायोजित असत्य कथा के कुछ 'कटु-सत्य तब सामने आए, जब दो अप्रैल को घटना को अंजाम देने वाले गिरोह का सरगना अपने आधा दजर्न साथियों के साथ उज्जैन में पकड़ा गया। अखबार मालिकों और सम्पादकों के हस्तिनापुर से बंधे कुछ दबे कुचलित शोषित पीडि़त क्राइम रिपोर्टरों की मानें तो आरोपियों के सरगना ने यह तुरंत स्वीकार किया है कि हमने नरेंद्र मास्साब के घर से दस लाख रुपए की लूट की थी। कहानी में 'ट्विस्ट है! पुलिस चार लाख रुपए की लूट करने वाले जिस आरोपी को ढूंढ रही थी, पकड़े जाने के बाद वह चोर या डकैत दस लाख रुपए लूटने की बात कह रहा है।&lt;br /&gt;खांटी और ईमानदार पुलिसकर्मियों की ज़ुबानी उक्त राशि 5 अप्रैल तक 22 लाख रुपए तक पहुंच चुकी थी। 'नरेंद्र मास्साब-चोरी या डकैती शीर्षक की इस थ्रिलर मूवी की शूटिंग जारी है। कयासों का दौर-दौरा भी जारी है। अपने नंबर बढ़वाने के चक्कर में हमेशा झगडऩे वाले आईजी/एसपी अलग-अलग बयानबाज़ी कर रहे हैं। उक्त फिल्म में चोरी या डकैती कितने रुपयों की हुई है, यह तो स्वयं नरेंद्र मास्साब बता पाएंगे, लेकिन पुलिस पहली बार धर्मसंकट में होगी कि जितने की डकैती हुई नहीं, उसे उससे ज्य़ादा धन मिल गया। अगर यह सच है तो पुलिस को आधिकारिक रूप से नरेंद्र मास्साब को चार लाख और समायोजन के तहत दस या अठारह लाख रुपए देने होंगे।&lt;br /&gt;मास्साब की भूमिका और कहानी के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि अगर बेचारे नरेंद्र मास्साब मुख्यमंत्री के भाई नहीं होते तो क्या होता? प्रदेश की करोड़ों करोड़ जनता को मप्र पुलिस के लिए सद्बुद्धि यज्ञ, गुरु बलवान करने के लिए पाठ, साहस के लिए बगलामुखी का जाप करवाना चाहिए। ताकि हमारी पुलिस हर चोरी, डकैती, हत्या, लूट और अन्य अपराधों की त$फ्तीश इसी तत्परता से करे। इससे जनता को राहत मिलेगी।&lt;br /&gt;करोड़ों करोड़ देवी-देवताओं को साष्टांग प्रमाण करते हुए मेरी विनती है प्रदेश का हर मास्टर, हर गुरुजी नरेंद्र मास्साब की तरह सम्पन्न हो। प्रदेश भाजपा का हर कार्यकर्ता और उनके परिजन भी उतने सम्पन्न हों, जितने नरेंद्र मास्साब हैं। बस यह दुआ है कि नरेंद्र मास्साब के घर हुई चोरी या डकैती उनके घर न पड़े। जिस मुख्यमंत्री की ईमानदारी सहजता, सरलता और सा$फगोई के चर्चे राष्ट्रीय रंगमंच पर हो, उसके परिजनों की भ्रष्ट कथा अनंता हो, यह विरोधाभास नहीं है? इस देश के अपने ध्रुव सत्य हैं, जिन्हें नहीं जानोगे तो जीवन रोते हुए ही कटेगा। यह बात सर्वमान्य सी है कि पटवारी है तो रिश्वत लेकर ही का$गज़ देगा न। थानेदार या सिपाही गाली देगा ही। वे पीट दें तो बुरा मानना मूर्खता है। साला, जीजा पर सवारी करेगा ही। सत्ता होगी तो सत्ता की बुराई आएगी ही। खदान होगी तो अवैध उत्खनन होगा ही। चुनाव आएंगे तो चंदा होगा ही। आबकारी वाला पैसे मांगेगा ही। थाने में नोट लगेंगे ही। पेट है तो गैस बनेगी ही। दूल्हा है तो दहेज मांगेगा ही। ईमानदार है तो ट्रांसफर होगा ही। आटा है तो गीला होगा ही। ज्य़ादा धन होगा तो नोट गिनने की मशीन लगेगी ही। ये सार्वभौमिक अटल सत्य हैं। इसमें बेचारे नरेंद्र मास्साब का क्या दोष? वैसे भी समरथ को नहीं दोष गोंसाई। &lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-4052929119282406746?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/4052929119282406746/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_06.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/4052929119282406746'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/4052929119282406746'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_06.html' title='मध्यप्रदेश का हर मास्टर नरेंद्र मास्साब जैसा हो'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-3193032962722502650</id><published>2009-05-06T11:56:00.000-07:00</published><updated>2009-05-06T00:02:12.825-07:00</updated><title type='text'>"मुख्यमंत्री" भी बन जाओ शिवराज</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;निश्चित तौर पर आप सपूर्ण मध्यप्रदेश के निर्विवाद जननेता बन चुके हैं। आम अवाम आपकी सभाओं में पागलों की तरह दौड़ता है, आप से प्यार करता है। माता-बहनें आपको दुआएं देती हैं; बु+जुर्ग आपको आशीर्वाद देते हैं। पूरे प्रदेश में भाजपा के किसी राष्ट्रीय नेता की छवि पर आपकी छवि भारी है। आप निष्कपट निश्छल भाव से राजनीति करते हैं। सब कुछ बेहतर है। फिर आपके अफसरान आपकी खिल्ली क्यों उड़ाते हैं? एक अफसर कहते हैं कि शिवराज को जो चंद लोगों ने घेर रखा है, वे जैसा कहते हैं, शिवराज वैसा ही करते हैं। कोई कहता है तगाड़ी उठाकर श्रमदान करो, कोई कहता है कोयला मार्च करो, कोई कहता है साइकिल से मंत्रालय जाओ, कोई कहता है आगंनवाड़ियों में बच्चों को खीर खिलाओ और कोई कहता है लाड़ली लक्ष्मी को गोद में उठाओ।&lt;br /&gt;हां, यह सच भी है कि आप पिछले कई माहों से ऐसे उपक्रम कर रहे हैं। यह जनता को लुभाने के सस्ते उपक्रम हो सकते हैं। राजनीति में ये लालू शैली के हथकंडे कहलाते हैं। माना इस सबसे आप जननेता बन गए हैं। लेकिन क्या आपके अफसरान मदारी हैं और आप उनके जंबूरे? नहीं. कतई... नहीं... अगर आप जानते बूझते सिर्फ इसलिए जंबूरे बने हुए हैं, ताकि आपको प्रदेश की जनता मामा, चाचा, काका, भैया कह कर बुलाए तो यह मध्यप्रदेश के साथ विश्वासघात है, धोखा है। यह धोखा प्रदेश के कुल चार-पांच अफसरान करवा रहे हैं। ये अफसर आपको उक्त सस्ते लोक लुभावन उपक्रमों में लगाकर सपूर्ण मध्यप्रदेश में लूट मचाए हुए हैं। ये मदारी सत्ता के मठाधीश बन गए हैं। इनकी क्रियाशीलता ही बदल गई है। ये भ्रष्टाचार के ताल में बैठकर प्रशासनिक डकैतों द्वारा प्रदत्त लूट के माल का बंटवारा कर रहे हैं। कुछ देर मुख्यमंत्री आवास और मंत्रालय में बैठिए, अपनी अक्ल लगाइए शिवराज जी। आप तो पूरे प्रदेश में जंबूरे बन कर घूमते हैं। आपके पीठ पीछे आवास और मंत्रालय में क्या होता है? इस पर ध्यान दीजिए।&lt;br /&gt;शिवराज जी, आप मध्यप्रदेश के इतिहास के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जो गाहे-बगाहे मंत्रालय जाते हो तो मीडिया में खबर बनती है कि आज मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण फाइलें निपटाईं। अरे! भाई मुख्यमंत्री का काम ही फाइलें निपटाने और कल्याणकारी तथा विकास कार्यों की मानीटरिंग करना है। दोबारा मुख्यमंत्री बनने पर आपने प्रदेश के विकास के सात संकल्प लिए थे। उन सात संकल्पों और सौ दिनों की हर विभागीय कार्ययोजना इन दोनों पर अफरशाही फिसड्डी साबित हुई। अगर सब हरा-हरा दिख रहा है तो आपको और आपके अफसरान/मंत्रियों को! वस्तु स्थिति इससे उलट है। मध्यप्रदेश आर्थिक बदहाली की ओर बढ़ रहा है। राज्य का राजस्व कर संग्रहण जो १७ ह+जार करोड़ रुपए तक पहुंच गया था, उसमें दो ह+जार करोड़ की कमी आने के आसार हैं। राजस्व में आई कमी के कारण सरकार को राज्य की वार्षिक योजना में दो ह+जार करोड़ रुपयों की कटौती करने को मजबूर होना पड़ रहा है। राज्य का सरकारी ख़जाना तो खाली है ही, उस पर ७० ह+जार करोड़ का ओवर ड्राफ्ट भी है। वित्तीय साधन जुटाने के लिए सरकार जितना कर्ज ले सकती थी, उतना ले चुकी है। अब सरकार को अपनी प्रतिभूतियां बेचना पड़ रही हैं। विभिन्न विभागों के बजट को ३० से ४० प्रतिशत कम किया जा रहा है। वित्तीय संकट के कारण राज्य सरकार की योजनाओं के लिए खरीदी पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह सोचनीय है कि आखिर आर्थिक बदहाली आई क्यों? शिवराज जी, आपके मदारियों ने आपसे जो लोक लुभावन घोषणाएं करवाई हैं, उससे ये हालात बने हैं। लाड़ली लक्ष्मी योजना और कन्यादान योजना कुछ मायनों में ठीक हैं, लेकिन इसका विकास से क्या वास्ता है? पांच इंवेस्टर्स मीट का क्या फायदा हुआ? आपके प्रदेश में जब इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं होगा तो कौन उद्योगपति प्रदेश में आएगा? तिस पर आपके भ्रष्ट दरिंदे उनके आने के पूर्व ही रिश्वत मांगेंगे। विभिन्न वर्गों की पंचायतों-महापंचायतों में दोनों हाथों से ख़जाना लुटाया गया। इस उपक्रम से आप सत्ता में तो आ गए। परंतु राज्य आर्थिक बदहाली में डूब गया। अभी भी बौद्धिक अय्याशियां, बंगलों की साज-सज्जा और हवाई यात्राएं जारी हैं। शिवराज जी, सत्ता वापसी के लिए आपने राष्य के सरकारी कर्मचारियों को छठे वेतनमान का लाभ देने की घोषणा की थी, जिसे पूरा करने के लिए राज्य सरकार को सालाना २५ सौ करोड़ रुपयों की +जरूरत होगी। इसी तरह किसानों को तीन प्रतिशत ब्याज दर पर क़र्ज उपलब्ध करवाने के लिए सरकारी ख़जाने पर पांच हजार करोड़ रुपयों का भार पड़ना तय है। इसके अलावा आपने जो लोक लुभावनी घोषणाएं की हैं, उसके लिए कम से कम २० ह+जार करोड़ रुपयों की जरूरत होगी। इतनी बड़ी रकम कहां से आएगी? जो विकास योजनाएं लागू हैं, उनका क्रियान्वयन हो रहा है या नहीं? इस मद में आने वाले पैसे का राजनेता, अफसर, ठेकेदार कैसा बंटवारा कर रहे हैं? भ्रष्टाचार कहां-कहां है? इस पर ध्यान दें तो बेहतर होगा।&lt;br /&gt;बिजली, सड़क, पानी को लेकर पूरे प्रदेश में हाहाकार मचा हुआ है। किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। इन बिंदुओं पर सोचिए, कौन है वो लोग जिन्होंने मनमाने ढंग से करोड़ों की बिजली खरीदी। महाभारत काल के ÷संजय' से नहीं तो कमलनाथ और आपके काल के ÷संजय' से पूछिए? अगर प्रदेश के ४-५ भ्रष्ट अफसर आपको वाकई नायक फिल्म का अनिल कपूर समझते हैं, तो आप अनिल कपूर की त+र्ज पर अपनी चाबुक मुख्यमंत्री निवास से ही चलाइए, जहां सर्वाधिक भ्रष्टाचार के मठाधीश विराजे हैं। भ्रष्टाचार मिटाने के लिए आप वाकई दृढ़संकल्पित हैं तो देखिए कि जिलों के वे कौन-कौन कलेक्टर हैं, जो उच्च प्रशासनिक व्यवस्था के दरबारों में चढ़ावा चढ़ाते हैं? वे कौन चार अफसर हैं, जिन्होंने अभी हाल ही में भोपाल एयरपोर्ट के पास ५४ करोड़ की जमीन खरीदी है? मुख्यमंत्री जी, वास्तव में प्रदेश का नहीं, अफसरों, सत्ता के दलालों और आपके मंत्रियों का विकास हो रहा है। जागो शिवराज जी, प्रदेश के विकास के बारे में सोचो। आप जननेता तो बन गए हैं, अब सरकारी अफसरान के ÷क्रियाशील-मुख्यमंत्री' भी बन जाइए, तभी उजाला होगा, तभी वास्तविक विकास होगा।&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-3193032962722502650?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/3193032962722502650/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_05.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/3193032962722502650'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/3193032962722502650'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_05.html' title='&quot;मुख्यमंत्री&quot; भी बन जाओ शिवराज'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-8505011948194781562</id><published>2009-05-05T09:48:00.000-07:00</published><updated>2009-05-04T21:52:59.976-07:00</updated><title type='text'>यह बंदिशे लोकतंत्र के साथ अन्याय हैं</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;सदियों तक प्रतिकूल में रही भारतीय जनता की अशिक्षा संघ-विश्वास और राष्ट्रीय मामलों में अधिकांश बार की असंवेदनशीलता हमे अपने लोकतंत्र के भविष्य को लेकर चिंतित करती रही थीं। किन्तु कई बार के चुनावी निर्णयों ने इन चिंताओं को सिरे से समाप्त भी किया था। उपरोक्त परिस्थितियों के रहते हुए भी कई बार पूरे देश ने चुपचाप ऐसे परिपक्व निर्णय दिए थे, कि सारी दुनिया दंग रह गई थी। हम आश्वस्त भी हुए कि हमारा लोकतंत्र अब समझदार होने लगा है। लेकिन इस बार के चुनाव ने हमें थोड़ी चिन्ता में डाल दिया है। समझदार परिपक्व और 62 वर्ष के उम्रदार प्रजातंत्र में वोट डालने सिर्फ पचास प्रतिशत लोग ही पहुचे । यानी आधे लोग ही अपने अधिकार या अपने दायित्व को पाने या पूरा करने पहुंचे ही नहीं। यह स्थिति सिर्फ मध्यप्रदेश की ही नहीं रही, गुजराज, महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी यही स्थिति रही। बावजूद इसके कि चुनाव आयोग से लेकर स्वेच्छिक संगठनों तक और राजनैतिक पार्टियों से लेकर मीडिया संगठनों, संस्थानों, धार्मिक पुरूषों, फिल्मी हस्तियों तक ने विभिन्न माध्यमों से अधिकाधिक मतदान की अपील की थी। इन सबके चलते अचानक भरोसा नही होता कि सूरज के आगे सियासी पारा गिरा है। प्रजातंत्र की सेहद के लिए ये अच्छे संकेत नहीं है। आधी जनता वोट देने जाए। औसतन चार लोगों में ये वोट बंटे। बीस से तीस या ज्यादा से ज्यादा 35 प्रतिशत वोट पाने वाला राज करे।&lt;br /&gt;यह कैसे हुआ जनता के द्वारा ओर जनता के लिए तंत्र ? यह तंत्र जो भी हो प्रजातंत्र तो नही ही हो सकता। अत: आज जरूरत है एक राष्ट्रीय बहस की देश व्यापी विमर्श की ओर गहरे चिन्तन की, कि हमारा प्रजातंत्र उसके सच्चे अर्थों में कैसा हो। निर्वाचन के समय निर्वाचन के सुझाव उन लोगों की तरफ से आए हैं जिन्होंने रक्त स्वेद का तर्पण कर भारत में प्रजातांत्रिक मूल्यों की स्थापना में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मैं तो एक दीर्घकालीन राष्ट्रीय बहस के साथ हर स्तर के ' ब्रेन-स्टार्मिंग ' का सुझाव प्रस्तुत कर रहा हूँ। एक ऐसे विचार का मंथन का सुझाव है जिसका परिणाम मतदान का प्रतिशत सौ फीसदी नहीं तो 75-80 प्रतिशत तो हो ही। शासकीय योजनाओं के लाभ से मतदान को जोड़ा जा सकता है। मतदाता की शिक्षा, दीक्षा, जीवन अनुभव और सामाजिक दायित्वों के मान से मत का मूल्यांकन भी निर्धारित किया जा सकता है।&lt;br /&gt;स्मरण कीजिए जब अटल जी प्रधानमंत्री थे तब एक संविधान क्रियान्वयन समीक्षा आयोग बना था। डॉ। सुभाष कश्यप इसकी ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष थे। उन्होंने तो संविधान संशोधन के जरिए मतदान को अनिवार्य करने तक का सुझाव दिया था। चुनाव सुधार अटल जी की सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। उस आयोग की एक भी अंतरिम सिफारिश पर मनमोहन सिंह - सोनिया गांधी सरकार ने कभी विचार ही नही किया। नदी जोड़ो अभियान की तरह पोटा को ठंडे बस्ते में डाला गया। चुनाव सुधार का बस्ता कभी खोला ही नही गया। क्योंकि खंडित बहुमत पर राज्य चलाने वाले जातिगत, क्षेत्रगत, भाषागत आधार पर सरकारें बनाने वाले लोग चुनाव सुधार होते ही हाशिए पर कर दिए जाते। उनकी तो राजनीतिक दुकान ही बंद हो जाती।&lt;br /&gt;हालांकि मैं इस मुद्दे पर एक पक्ष हूँ । लेकिन मतदाता को मतदान के लिए केन्द्र तक लाने ले जाने की बंदिश को मैं लोकतंत्र के साथ अन्याय मानता हूँ । या तो चिलचिलाती धुप में मतदाताओं को सरकार वोट डालने लाए या राजनीतिक दलों को लाने दे। मतदान तो गुप्त ही रहेगा। इसी देश में चुनाव में राजे, रजवाडे, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री चुनाव हारे है। मतदाता इतनी छोटी सेवा पर नही बिकता। आप माने या न माने बंबई के आतंकवादी हमले और यूपी सरकार के उस पर व्यवहार ने भी जनता में लोकतंत्र के प्रति रूचि घटाई है। गठबंधन की यह सरकार जनता की सुरक्षा में पूरी तरह नाकाम रही थी। उस समय जनता में मंत्रियों, राजनेताओं और जनप्रतिनिधियों को लेकर जो टिप्पणियां हुई थीं, वे बेहद शर्मनाक थीं। चूंकि चुनाव और मतदान को लेकर एक ब्रेन स्टार्मिंग का सुझाव है। इसलिए हमें विचार करना पड़ेगा कि युवा पीढ़ी को हमने कितनी जिम्मेदारी दी है। 18 वर्ष के युवक को मतदान का हक देकर हमने विश्व में एक कीर्तमान बनाया है, लेकिन वह चुनाव नहीं लड़ सकता। यहीं कारण हैं कि युवा मतदाता निराशा के कारण मतदान केन्द्र पर नहीं पंहुचा ।&lt;br /&gt;चुनावी कायाकल्प के लिए अटल जी जैसी तीव्र इच्छा शक्ति चाहिए। संविधान संशोधन के जरिए मतदान अनिवार्य हो सकता है। तभी प्रजातंत्र स्वस्थ और प्रभावी रहेगा। इस मुद्दे पर सामाजिक, धार्मिक, स्वेच्छिक और शैक्षणिक के साथ प्रशासनिक और राजनीतिक नेतृत्व को एक जाजम पर बैठना ही होगा।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-8505011948194781562?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/8505011948194781562/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_04.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/8505011948194781562'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/8505011948194781562'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_04.html' title='यह बंदिशे लोकतंत्र के साथ अन्याय हैं'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-9011505769416194672</id><published>2009-05-03T17:58:00.000-07:00</published><updated>2009-05-03T06:08:42.238-07:00</updated><title type='text'>कोई तो समझे इनकी पीडा</title><content type='html'>&lt;p align="justify"&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-family:lucida grande;"&gt;कोर्ट में किसी भी मामले की सुनवाई के वक्त वकीलों की पूछताछ अहम रहती हैं। यानी वादी और प्रतिवादी दोनो पक्षों से पूछताछ और बहस से बहुत हद तक फैसले प्रभावित होते हैं। कोर्ट का विद्वान न्यायधीश दोनो पक्षों को सुनता है और साक्ष्यों को जांचता - परखता है और फिर निष्पक्ष भाव से अपना फैलता सुना देता हैं। लेकिन इस दौरान अगर वकील अपनी हदें भूलता है, तो वही होता है जो दिल्ली के कडकडडूमा अदालत परिसर में हुआ। कडकडडूमा अदालत परिसर में उस वक्त अच्छा खासा बवाल मच गया जब एडिशनल सेशन जज विनय खत्रा की अदालत में बयान दर्ज कराकर बाहर आई बलात्कार पीडिता ने कोर्ट रूम के बाहरबचाव पक्ष के अधिवका की जमकर धुनाई कर दी। पीडिता का आरोप है कि वकील उसके साथ बदसलूकी कर रही हैं। गौरतलब है कि बलात्कार पीडिता पूजा ने २००४ में जिस अवतारसिंह नाम के व्यकि पर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है उसी से उसने शादी भी कर ली हैं, पीडिता ने अदालत में कहा कि बेशक बलात्कार का आरोपी मेरा पति बन गया हैं। लेकिन यह सच है कि उसने पहले मेरे साथ बलात्कार किया और फिर मुझसे शादी कर ली। गुरूवार के दिन पूजा ने अपने पति के खिलाफ बयान दर्ज कराए थे। जिस पर बचाव पक्ष के वकील और पीडिता के बीच गर्मागर्मी भी हो गई थी। इससे पहले देश में अनेक ऐसे मामले आये, जिसमें वकीले सफाई की पूछताछ के तरीके पर एतराज जताया जा रहा हैं। यह गौरतलबहै कि किसी भी स्त्री के लिए उसकी सबसे बडी पूंजी उसका शील, उसकी अस्मत हैं। इसके छिन जाने के बाद उसकी मनोदशा, उसकी व्यथा को कोई दूसरा कैसे समझ सकता हैं। इसे वहीं समझ सकता है, जिस पर हू - ब - हू ऐसा ही कुछ गुजरा हो। ऐसे में पूजा की मानसिक अवथा को समझना इतना आसान भी नहीं हैं। पूछताछ के तरीके और लोकलाज के भयवश कई बार पीडिता अपने दर्द ब्यान नहीं कर पाती अथवा कमजोर पड जाती हैं। और इसका लाभ बलात्कारी उठा ले जाता हैं। यह भी गौर के काबिल बात है कि आखिर पीडिता पूजा को उससे जबरिया दुष्कृत्य करने वाले से क्यों शादी करनी पडी। निश्चित रूप से इसके पीछे लोकलाज का भय तो है ही, बलात्कारी द्वारा एक घिनौने अपराध से बच लेने का जुगता भी हैं। पीडिता के मुताबिक वकील ने उसके वस्त्र भी ख्ींचे। यघपि पुलिस ने इस घटना को दर्ज नहीं किया है, लेकिन उसका कहना है कि पीडिता मानसिक रूप से परेशान हैं। पुलिस के इस कथन से भी यह स्पष्ट होता हैं। कि पीडिता का आक्रोश क्यों इतना मुखर हो उठा कि उसने वकील की जमकर धुनाई कर दी। बहरहाल, विचारणीय प्रश्न तो यह कि ऐसे मामलों में पीडिता को पूरी सहानुभूति मिलना चाहिए और कोशिश यह होनी चाहिए कि सामाजिक स्तर पर उसे किसी भी प्रकार से परेशानी न हो।&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-9011505769416194672?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/9011505769416194672/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_03.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/9011505769416194672'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/9011505769416194672'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post_03.html' title='कोई तो समझे इनकी पीडा'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-8107382525354592560</id><published>2009-05-02T20:24:00.000-07:00</published><updated>2009-05-02T08:30:57.524-07:00</updated><title type='text'>दारूल उलूम का स्वागत योग्य फैसला</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:arial;"&gt;&lt;em&gt;दारूल उलूम देवबंद ने लोकसभा चुनाव में निष्पक्षता दिखाकर एक अच्छा उदाहरण पेश किया हैं। यह अपने आप में महत्वपूर्ण बात है कि देश की प्रसिद्व इस इस्लामी संस्था ने एक बार फिर कटरता की बजाय लोकतांत्रिकता का परिचय दिया हैं। दारूल उलूम ने कहा है कि वह एक शिक्षण संस्थान हैं। इसलिए उनकी ओर से किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध नहीं किया जा रहा हैं। उसके द्वार सबके लिए खुले हैं। गौरतलब है कि मौजूदा चुनावी माहौल में कई राजनीतिक दलों के नेता दारूल उलूम जा चुके हैं लेकिन संस्था की ओर से किसी का समर्थन या विरोध नहीं किया गया हैं। दारूल उलूम का यह रूख उन धार्मिक संस्थाओं और संगठनों के लिए एक नजीर है, जिन्होंने ऐसे मौकों पर फतवे जारी किये हैं। इस संस्थान के इस रूख से यह स्पष्ट है कि वहां के विद्वान लोकतंत्र की अवधारणाओं में पूरी आस्था और विश्रास रखते हैं। किसी भी दल को समर्थन नहीं देने से मुस्लिम समुदाय के मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवार या पार्टी को अपना मत बिना किसी दबाव के दे सकेंगे। पिछले कई आम चुनावों में कुछ खास संस्थाएं पार्टी विशेष को अपना मत देने के लिए मुस्लिम समुदाय पर फतवे के जरिए दबाव डालते रहे हैं। जबकि लोकतंत्र की मजबूती और बेहतरी के लिए ऐसे फतवे जारी करना कई बार सही नहीं होता और मतदाताओं के बीच भ्रांतिपूर्ण स्थिति पैदा होती हैं। एक बेहतर लोकतंत्र के लिए किसी भी धर्म और संप्रदाय द्वारा किसी भी प्रकार का दबाव घातक हो जाता हैं। इससे कहीं न कहीं लोकतंत्र की स्वस्थ अवधारणा को भी चोट पहुंचती हैं। दारूल उलूल देवबद के इस कदम का स्वागत किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि दारूल उलूम ने इससे पहले भी अनेक ऐसे फैसले लिये हैं, जिससे माहौल को सदभावपूर्ण बनाने में मदद मिली हैं। अनेक बार विवादास्पद मसलों पर धार्मिक आदेशों की सही व्याख्या कर इस संस्था ने पूरे समुदाय को दुविधापूर्ण स्थिति से उबारा हैं। दारूल उलूम का यह फैसला भी मुस्लिम मतदाताओं को अपनी मर्जी से वोट देने का रास्ता प्रशस्त करता हैं। किसी भी धर्म या समुदाय विशेष को ऐसी निष्पक्षता से प्रेरित होने की जरूरत हैं। इससे लोकतंत्र और मजबूत होगा।&lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-8107382525354592560?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/8107382525354592560/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/8107382525354592560'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/8107382525354592560'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/05/blog-post.html' title='दारूल उलूम का स्वागत योग्य फैसला'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-7744411988945924172</id><published>2009-05-01T09:57:00.000-07:00</published><updated>2009-04-30T22:05:53.076-07:00</updated><title type='text'>ईवीएम में नकारात्मक बटन</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:courier new;"&gt;&lt;em&gt;चुनावों में किसी भी उम्मीदवार को पसंद नहीं करने वाले मतदाताओं को भी अपनी भावना व्यक करने का अवसर सुलभ कराने के प्रति निर्वाचन आयोग की गंभीरता स्वागत योग्य है। इस लोकसभा चुनाव के पहले और दूसरे के मतदान दौरान विभित्र क्षेत्रों के अनेक मतदाताओं ने अपने नकारात्मक रूख का प्रदर्शन किया। ऐसे मतदाताओं को कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं आया और उन्होंने अपने - अपने तरीके से नकारात्मकता का इजहार किया। जन प्रतिनिधित्व कानून आरपीए की धारा 49 ओ के तहत मतदाता को अपने निवार्चन क्षेत्र के किसी भी प्रत्याशी को वोट नहीं देने के दिये गये अधिकार को लेकर आयोग ने सरकार से कानून में संशोधन का आग्रह किया हैं। जिससे कि ईवीएम में इस विकल्प के लिए बटन रखा जा सके। इससे मतदाता अपने निर्वाचन क्षेत्र के किसी भी उम्मीदवार को वोट नहीं देने के अधिकार का उपयोग कर सके। इसमे कोई दो राय नहीं है कि चुनाव सुधार के संदर्भ में यह एक अच्छा कदम है और इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था में और मजबूती आने की संभावना बढ जाएगी। लेकिन इस सच्चाई से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि इस अधिकार का रानैतिक स्तर पर दुरूपयोग किया जा सकता हैं। संभव है इससे विध्नसंतोषी लोग लाभ उठाने की जुगत में लग जाएं। हालांकि इसका मतलब यह कतई नहीं है कि इसकी संख्या बढने पर चुनाव अवैध हो जाएगा। उधर दिल्ली में चुनाव अधिकारियों ने तय किया है कि इस बार के लोकसभा चुनाव में मताकार के दौरान किसी को भी मत नहीं देने वालों का हिसाब रखा जाएगा। ईवीएम में ऐसा कोई विकल्प नहीं होने कारण पीठासीन अधिसकारियों को निर्देश दिया जाएगा कि वे ऐसे मतदाताओं को फार्म 17 ए मुहैया कराएं जिसमें किसी भी उम्मीदवार को मत नहीं देने का विकल्प होगा। मतदान के दिन नियम 49 ओ के तहत पीठासीन अधिकारी मतदान करने से इंकार करने वाले मतदाताओं की टिप्पणी दर्ज करेगा कि वह अपना मत दर्ज नहीं कराना चाहता। पिछले विधान सभा के दौरान दिल्ली में यह विकल्प रखा गया था लेकिन इसके आंकडे रखने का कोई विकल्प नहीं था। निश्रित रूप से ऐसी व्यवस्था से यह तो पता चलेगा कि कितने प्रतिशत मतदाता अपना नकारात्मक रूख दिखाते हैं। बहरहाल अभी चुनाव सुधार की काफी गुजाइश हैं और आयोग इस दिशा में गंभीरता पूवक आगे बढ रहा हैं। चुनाव सुधारों को सख्ती से लागू करने की चल रही कवायद भी स्वागत योग्य हैं। अंतत यह विचारणीय प्रश्न है कि ईवीएम में किसी भी प्रतिनिधि को अपना मत नहीं देने का बटन का इस्तेमाल ज्यादा होने को किस रूप में लिया जाना चाहिए। अगर नकारात्मक वोटों की संख्या सकारात्मक वोटों से ज्यादा हो जाएगी तो चुनाव भले ही अवैध या निरस्त न हो लेकिन इससे चुनेगये जन प्रतिनिधि के प्रति विश्रास कायम नहीं रह सकेगा। जो भी हो मत सकारात्मक हो या नकारात्मत जनता की भावनाओं का ख्याल तो रखना ही पडेगा। &lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-7744411988945924172?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/7744411988945924172/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/04/blog-post_30.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/7744411988945924172'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/7744411988945924172'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/04/blog-post_30.html' title='ईवीएम में नकारात्मक बटन'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-1896400587489065595</id><published>2009-04-30T09:38:00.000-07:00</published><updated>2009-04-29T21:51:51.516-07:00</updated><title type='text'>जनसमस्याओं की अनदेखी करते नेता</title><content type='html'>&lt;p align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:trebuchet ms;font-size:130%;"&gt;&lt;em&gt;समाज के अंतिम सबसे गरीब व्यक्ति को न्याय और जीने का अधिकार देने के लिए ही हमारे संविधान निर्माताओं ने प्रजातंत्र की परिकल्पना की थी एवं तदनुसार उसकी रुपरेखा भी निर्धारित की थी पर सामाजिक राजनीतिक व आर्थिक स्वतंत्रता के लिए तरसते आम आदमी को उसकी अपेक्षा के अनुरूप अब तक क्या मिल पाया हैं आज देश प्रदेश और समाज को उन्नति व समृद्धि की राह पर ले जाने का जिम्मा जिन राजनीतिक दलों व नेताओं पर हैं वे ही अपने स्वार्थों के लिए समाज को तोड़ रहे हैं जाती धर्म और भाषा के नाम पर विभाजित समाज कैसे हमारे प्रजातंत्र को परिष्कृत करेगा यह सवाल तो देश के इन आकाओं से ही पूछा जाना चाहिए&lt;br /&gt;जब चुनाव आते हैं तो राजनीतिक दल समाज को विभाजित करने का काम कुछ ज्यादा ही तेजी से करने लगते हैं इसके साथ ही साथ वे तरह-तरह के लुभावने वादे भी मतदाताओं से करते हैं] ताकि उनके वोट हड़पे जा सके पर चुनाव के बाद देश के यही कर्णधार और प्रतिनिधि जनता को उसकी किस्मत के भरोसे छोड़ देते हैं और वह अगले पांच सालो तक वादों के पुलिंदों को लेकर इन नेताओं के दर पर भटकाती रहती हैं यानि हकीकत यही हैं कि किसी गाँव की गली में क्रिकेट खेलते नौनिहालों की आँखों के सपनो से हमारे कर्णधारो को कोई सरोकार नहीं होता हैं गाँव की सूखती नदी के पनघट से पानी लाती हुई किसी रमणी की समस्याओं के समाधान के लिए हमारे नीति-नियंता कतई चिंतित नहीं होते हैं अकाल से सूखती फसलो और उजड़ते हुए गाँवों के श्रमिकों की भूख भ उन्हें चिंतित नहीं कर पाती हैं&lt;br /&gt;प्राकृतिक विपदाओं और मानव निर्मित त्रासदियों कि कारण आत्महत्या को मजबूर होते किसानो की चीत्कार हमारे देश के जनप्रतिनिधियों तक पहुंचती तो है पर वे उसे सुनना नहीं चाहते अहमदाबाद सूरत मुंबई आदि महानगरो में आतंकियों द्बारा किए नरसंहारों से नाम होने वाली आँखों का आक्रोश प्रजातंत्र के पहरेदारों को दहला नहीं पा रहा हैं चुनावी मौसम में अपने-अपने दरबो से निकले हुए नेता बरसाती मेंढक की तरह अपने-अपने राग अलाप तो रहे हैं पर इस कर्णभेदी शोर के बीच जनता परेशान हैं और भ्रमित भी कि ये नेता चुनावों के दौरान भी उसकी समस्याओं को मुद्दा क्यों नहीं बना रहे हैं? आज़ादी के ६२ वर्षो के बाद की यह स्थिति देश की जनता के लिए एक त्रासदी हैं&lt;br /&gt;लगता यह भी हैं कि यह स्थिति बदलेगी भी नहीं जो राजनीतिज्ञ केवल सत्ता के पीछे भाग रहे हो वे देश की समस्याओं का समाधान कैसे करेंगे राजनीतिज्ञों की नीयत समझने के लिए केवल इतना जानना काफी हैं कि न तो आतंकवाद चुनावी मुद्दा बन पाया हैं और न ही मंदी महंगाई बेरोज़गारी बढ़ते हुए अपराध और भ्रष्टाचार भी इन सब मुद्दों से आम जनता का सीधा जुडाव हैं क्योंकि आतंकी हमलो का पहला शिकार वही होती हैं ठीक इसी तरह मंदी के कारण जिन लोगो की नौकरी जा रही हैं वे भी देश के आम नागरिक ही हैं और सरकारी दफ्तरों में जिनका वाजिब काम भी रिश्वत न देने की स्थिति में नहीं हो पाता हैं वे लोग देश के आम नागरिक ही होते हैं पर राजनीतिज्ञों के लिए आम नागरिको की ये समस्याएं जब कोई चुनावी मुद्दा ही नहीं हैं तो उनके समाधान की बात सोचना भी इसे में फिजूल ही हैं हाँ इस स्थिति का दोष केवल राजनीतिज्ञों को ही नहीं दिया जा सकता हैं आखिर जनता को भी तो अब तक देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने लायक हो जाना चाहिए था वह जागरूक क्यों नहीं हैं? अगर संविधान निर्माताओं का सपना पूरा करना हैं तो अब जनता को जागरूक होना ही पड़ेगा&lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-1896400587489065595?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/1896400587489065595/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/04/blog-post_1286.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/1896400587489065595'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/1896400587489065595'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/04/blog-post_1286.html' title='जनसमस्याओं की अनदेखी करते नेता'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-9189439137067794624</id><published>2009-04-29T00:12:00.000-07:00</published><updated>2009-04-29T00:22:41.126-07:00</updated><title type='text'>भ्रष्टाचारी अफसरों पर चार साल से कार्रवाई नहीं</title><content type='html'>&lt;p align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:arial;"&gt;&lt;em&gt;इसे अफसरों की लापरवाही कहा जाये या कृषि विभाग में भ्रष्टाचार का बोल - बोल। जहां चार साल से 17 संयुक्त संचालक तथा उपसंचालक स्तर के अधिकार और 25 सहायक संचालकों के विरूद्व कार्रवाई नहीं हो सकी हैं। साथ ही लगभग 40 रिटायर अधिकारियों के विरूद्व 20 साल से मामले लंबित पडे हुए हैं। इसके बावजूद विभाग मानता है कि इनके प्रकरण निपटाने विशेष अभियान चलाया जा रहा हैं। कृषि कल्याण एवं किसान विभाग में भ्रष्टाचार किस कदर फैला है कि ऊपर से लेकर निचले स्तर के अधिकारी भी इसमें गले - गले डूबे हुए हैं। वर्तमान में विभाग में कार्यरत प्रथम श्रेणी के 17 संयुक्त संचालक और उपसंचार स्तर के अफसरों के विरूद्व भ्रष्टाचार के मामले चल रहे हैं जबकि 11 अधिकार रिटायर भी हो गये,परन्तु उनके विरूद्व भी सरकार कोई निर्णय नहीं ले सकी हैं। रिटायर अधिकारियों के मामले में वर्ष 88 - गडबडी में फंसे कृषि विभाग के 42 अफसर 90 से लंबित पडे हुए है और ऐसे ही २५ प्रकरण सहायक संचालक स्तर के अधिकारियों के भी लंबित हैं। साथ ही लगभग 20 अधिकारी रिटायर भी हो चुके हैं। मगर भ्रष्टाचार के प्रकरण यथावत बने हुए हैं। सूत्रों ने बताया कि कृषि विभाग में गडबडियां पीछा नहीं छोड रही हैं। यहां छोडा रही हैं। यहां पर पदस्थ तत्कालीन मैरना के उपसंचालक एनआर भास्कर के विरूद्व वर्ष 2001 से जबलपुर के उपसंचालक केएल कोष्टा के विरूद्व वर्ष 2002 से मामला चल रहा है तो आंचलिक क्षेत्रीय अधिकारी एसआर रहांगडाले उपसंचालक के पी जाटव केएस तेकाम डीके पाण्डे के विरूद्व वर्ष 2004 से प्रकरण चल रहा हैं। वहीं ग्वालियर के उपसंचालक जगदीश सिंह के विरूद्व वर्ष 2005 से राजगढ के उपसंचालक रणवीरसिंह पर वर्ष 2006 से उज्जैन के तत्कालीन उपसंचालक एएस पाटिल तथा इंदौर के उपसंचालक विजय कुमार अग्रवाल के विरूद्व 2006 से अनियमितताएं किये जाने का प्रकरण लंबित हैं। साथ ही सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी जेएस यादव सीबीएस यादव एसके प्यासी उपसंचालक ओपीएस नरवरिया डीसी शर्मा बीएल पाठक के विरूद्व भोपाल में नौ परकोलेशन टेंकों कें निर्माण में की गडबडी सहित अन्य अनियमितताओं के मामले लंबित हैं। ये अनियमितताएं की उर्वरक खरीदी में घोटाला शासकीय सामग्री का उपयोग स्वयं के लिए लिए किया दस लाख की निविदा अवैध रूप से बुलाई बीज विक्रय में गडगडी एवं लाखों रूपए की शासकीय निधि का दुरूपयोग करना शामिल हैं। इनका कहना बहुत बडा विभाग है इतने अधिकारियों के विरूद्व गडगडी के मामले चलते रहते हैं। वर्तमान में इनका निराकरण करने विशेष अभियान चलाया जा रहा हैं।&lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-9189439137067794624?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/9189439137067794624/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/04/blog-post_29.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/9189439137067794624'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/9189439137067794624'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/04/blog-post_29.html' title='भ्रष्टाचारी अफसरों पर चार साल से कार्रवाई नहीं'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-6934132897168076315</id><published>2009-04-26T22:52:00.000-07:00</published><updated>2009-04-26T23:01:47.895-07:00</updated><title type='text'>प्रधानमंत्री पर उछाला जूता</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:arial;"&gt;&lt;em&gt;&lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:arial;"&gt;&lt;em&gt;आडवाणी पर फिर फेंकी चप्पल गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के भाषण के दौरान आज एक युवक ने जूता उछाला कर व्यवधान डालने का प्रयास किया। वहीं भाजपा के पीएम - इन - वेटिंग आडवाणी पर भी रविवार देर रात नवाबाडज क्षेत्र में भगवा कपडे पहने एक व्यकि ने चप्पल उछाल दी। डॉ सिंह यहां एक चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे। जूता फेंकने वाले युवक को तुरंत हिरासत में ले लिया। गया और उससे पूछताछ की जा रही हैं। युवक का नाम हितेष चौहान बताया जा रहा है जो कि इंजीनियरिंग का छात्र हैं। घटना से विचलित हुए बगैर प्रधानमंत्री ने अपना भाषण जारी रखा। दूसरी तरफ आडवाणी की सभा में मौजूद धूर्मदास बापू ने आडवाणी के पहुंचते ही जय श्री राम का नारा लगाते हुए चप्पल उछाली। बाद में पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। धर्मदास गांधीनगर में स्थित कलोल तहसील के राजपुर गांव का निवासी हैं। इससे पहले] पुलिस सूत्रों ने बताया था कि प्रधानमंत्री पर जूता फेंकने की अप्रत्याशित घटना के बाद आडवाणी की सभा की सुरक्षा व्यवस्था में बदवाल किया गया हैं। मप्र में एक चुनावी सभा के दौरान आडवाणी पर खडाऊ उछाली जा चुकी हैं। प्रधानमंत्री पर उछालने की घटना की कांग्रेस व भाजपा ने कडे शब्दों में निंदा की। कांग्रेस प्रवका अभिषेक मनु सिंघवी ने अहमदाबाद में आज प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के भाषण के दौरान एक युवका द्वारा जूता उछाले जाने की घटना की निंदा करते हुए कहा कि सभी दलों को इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने का प्रयास करना चाहिये। उन्होंने इस घटना पर गहरा क्षोभ जताते हुये कहा कि पार्टी इस तरह की घटनाओं की निंदा करती हैं। तथा चाहती है। कि राजनीति के लिये खतरनाक इस संक्रामक रोग पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिये। वहीं प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर जूता फेंके जाने की घटना की कडी निंदा की हैं। भाजपा प्रवका सिद्वार्थ नाथ सिंह ने यहां कहा कि उनकी पार्टी विरोध के इन तरीकों को सही नहीं मानती हैं। &lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-6934132897168076315?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/6934132897168076315/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/04/blog-post_26.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/6934132897168076315'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/6934132897168076315'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/04/blog-post_26.html' title='प्रधानमंत्री पर उछाला जूता'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-4529955343127599772</id><published>2009-04-24T11:05:00.000-07:00</published><updated>2009-04-24T23:10:15.010-07:00</updated><title type='text'>चुनाव के बाद श्री मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नई भूमिका</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;span style="font-family:arial;"&gt;&lt;em&gt;मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लोकसभा चुनाव के बाद बदली हुई भूमिका में नजर आएंगे। जन आंदोलन के कार्यकर्ता की तरह अब वो राज्य के कोने कोने में पहुंचकर लोगों के बीच उनकी समस्याओं को उन्हीं के जरिए दूर करने का मंत्र फूंकेगे। श्री शिवराज सिंह चौहान ने यूनीवार्ता से चर्चा में कहा कि उन्होंने महसूस किया है कि राजनीति जन आंदोलन का ही पर्याय हैं। उन्होंने कहा कि मैंने लोगों के बीच पहुंचकर उनसे चर्चा के दौरान महसूस किया कि विभित्र मुद्दों पर उनकी रूढीवादी या पारंपरिक सोच को बदलना भी बहुत जरूरी हैं। भाजपा के घोषणापत्र में शामिल राज्य की चर्चित लाडली लक्ष्मी योजना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इसकी वजह से परिवार में कन्या को लेकर लोगों की सोच में आए परिवर्तन को उन्होंने नजदीक से महसूस किया हैं। श्री मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बहुत सी ऐसी सामाजिक बुराइयां हैं जिनके लिए जनता के बीच में जाकर उन्हें जागृत करने की जरूरत हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद वह खुद व खुद दूर दराज के क्षेत्रों तक पहुचेगे और हर चीज के लिए सरकार और तंत्र पर निर्भर रहने की लोंगों की मानसिकता को बदलने का आहान करेंगे। श्री मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस काम में उनके सहयोगी मंत्री गण और पार्टी के अन्य जनप्रतिनिधि भी जुटेंगे। गांवों का उदाहरण देते हुए श्री मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अक्सर वहां साफ सफाई आदि को लेकर भी लोग तंत्र का मुंह देखते हैं। छोटी छोटी बातों को लेकर सरकार या तंत्र पर जनता की निर्भरता ठीक नहीं हैं। श्री मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भले ही इसकी जिम्मेदारी नगरीय निकायों या पंचायतों की हैं। लेकिन कभी हम भी हाथ में झाडू लेकर सफाई के लिए सडकों पर उतर सकते हैं। और ऐसा करके हम अपने आसपास के परिवेश को और बहेतर ही बनाएंगे। श्री मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस अभियान को मध्यप्रदेश बनाओ यात्रा नाम दिया गया हैं। वह चार दिन राजधानी में रहेंगे और शेष तीन इस अभियान के अंतर्गत राज्य के अलग अलग क्षेत्रों का दौरा करेंगे। अभियान के तहत बिजली चोरी पर रोक] जल संरक्षण] स्वच्छता] पर्यावरण संरक्षण और सरकारी संपति की रक्षा जौसे विषय उठाए जाएंगे। &lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-4529955343127599772?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/4529955343127599772/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/04/blog-post_24.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/4529955343127599772'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/4529955343127599772'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/04/blog-post_24.html' title='चुनाव के बाद श्री मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नई भूमिका'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_DRa4AVi-UMM/SYWJNUqiwLI/AAAAAAAAABU/6VgHTotH6Gw/S220/34copy.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-521518577725896862.post-5476480290542629154</id><published>2009-04-24T10:11:00.000-07:00</published><updated>2009-04-23T22:15:39.981-07:00</updated><title type='text'>वोटर के आगे गर्मी हारी</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-family:arial;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;p align="justify"&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-family:arial;"&gt;दिनभर की चिलचिलाती गर्मी भी प्रदेश के मतदाताओं का उत्साह नहीं रोक पाई। 15वीं लोकसभा के लिए प्रदेश में पहले चरण की 13 संसदीय सीटों पर गुरूवार को करीब 50 फीसदी वोट पडे। कडी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान तकरीबन शांतिपूर्ण रहा।रीवा समेत एक दो स्थानों पर ईवीएम में गडबडी, मशीन उठाने और जबरन मतदान की छिटपुट घटनाएं जरूर हुईं। मामले में सम्बद्ध निर्वाचन अधिकारियों ने चुनाव आयोग से चार मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान की सिफारिश की है। चुनाव कार्य प्रभावित करने पर चार नेताओं के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज किए गए हैं। गर्मी में तबीयत बिगडने से दो मतदानकर्मियों की मौत हो गई। प्रदेश में हुए पहले चरण के मतदान में भाजपा नेता सुषमा स्वराज व कैलाश जोशी और कांग्रेस नेता कमलनाथ का राजनीतिक भाग्य ईवीएम में बंद हो गया।धीमी हुई शुरूआतप्रदेश में जिस तरह धीमी गति से मतदान शुरू हुआ था, उससे एक समय सामान्य स्तर छूना भी मुश्किल लग रहा था। लेकिन बाद में इसने गति पकडी और यह पिछली बार के आंकडे को पार कर गया। देर रात तक की सूचनाओं के मुताबिक प्रदेश में कुल 49.96 फीसदी मतदान हुआ। सर्वाधिक 64.01 प्रतिशत मतदान छिंदवाडा में हुआ, जबकि न्यूनतम खजुराहो में 42.06 फीसदी रहा। भारी पडी सेहतशहडोल और होशंगाबाद में एक-एक मतदानकर्मी की मृत्यु हो गई। इसके अलावा छिंदवाडा के अमरवाडा विधानसभा क्षेत्र में मतदान केन्द्र क्रमांक 230 पर तैनात दिलीप शाह (सहायक शिक्षक) को दिल का दौरा पड गया। उन्हें स्थानीय अस्पताल में उपचार के बाद नागपुर रेफर किया गया। सौ फीसदी मतदानहोशंगाबाद की पिपरिया तहसील के कांजीघाट स्थित मतदान केन्द्र क्रमांक 105 में सिर्फ 45 मिनट में सौ फीसदी मतदान हो गया। यहां 42 मतदाता थे। उन्होंने पिछली रात तय कर लिया था कि वोटिंग करने एक साथ जाएंगे। मतदान केंद्र इसके बावजूद नियमानुसार शाम पांच बजे तक खुला रहा। चार नेताओं पर मुकदमा* नागरिक आपूर्ति निगम के उपाध्यक्ष देवेन्द्र वर्मा ने गंजबासौदा में एक मतदान केन्द्र पर तैनात पीठासीन अधिकारी को चांटा जड दिया। वर्मा के खिलाफ धारा 188 के तहत मामला दर्ज किया गया है। * सपा के पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम् एवं उनकी पार्टी की प्रदेश सचिव आराधना भार्गव को गिरफ्तार किया गया। ये वोटरों को मतदान करने से रोक रहे थे। * कटनी में एक पीठासीन अधिकारी के नशे में होने की शिकायत पर उसे हटा दिया गया। * छिंदवाडा। उज्जैन निवासी कांग्रेस नेता अशोक भाटी को पांढुर्णा विधानसभा में कांग्रेस पर्यवेक्षक का कार्य संभालने पर धारा 128 के तहत गिरफ्तार किया गया। * रायसेन में एक स्थान पर 16 एवं एक स्थान पर 5 फर्जी वोट डालने वाले पकडे गए। अर्जुन ने नहीं किया मतदानसतना। केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री अर्जुन सिंह ने अपने मताघिकार का उपयोग नहीं किया। उनके नजदीकी व्यक्तियों का कहना था कि दाऊ की तबीयत काफी खराब है।भाजपा को मिलेगा समर्थन"भीषण गर्मी और कारोबारी व्यस्तता के बीच समय निकालकर मतदाताओं ने जो उत्साह दिखाया है, उससे उनकी अटल आस्था परिलक्षित हुई है। आस्था भाजपा के पक्ष में है।"- नरेंद्र तोमर, प्रदेश भाजपा अध्यक्षकांग्रेस के पक्ष में रूझान"भाजपा द्वारा शासकीय मशीनरी के दुरूपयोग, अफसरों को डराने-धमकाने के बाद भी मतदाताओं में कांग्रेस के प्रति रूझान देखा गया है। मतदान भी कांग्रेस के पक्ष में है।"- सुरेश पचौरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष &lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/521518577725896862-5476480290542629154?l=kobrapost.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://kobrapost.blogspot.com/feeds/5476480290542629154/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/04/blog-post_23.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/5476480290542629154'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/521518577725896862/posts/default/5476480290542629154'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://kobrapost.blogspot.com/2009/04/blog-post_23.html' title='वोटर के आगे गर्मी हारी'/><author><name>kobra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08925800438098972735</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='27' height='32' 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